एक ही एजेंसी पर विश्वविद्यालय मेहरबान, आरोप के बावजूद अब मिला यूएमआइएस का कार्य

Updated at : 05 Apr 2026 6:36 PM (IST)
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एक ही एजेंसी पर विश्वविद्यालय मेहरबान, आरोप के बावजूद अब मिला यूएमआइएस का कार्य

मुंगेर विश्वविद्यालय इन दिनों आसवथ इको इंडिया प्राइवेट लिमिटेड पर कुछ ज्यादा ही मेहरबान है.

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– कोडिंग और पेमेंट गेटवे संभाल रही एजेंसी आसवथ अब संभालेगी यूएमआइएस पोर्टल

– एमयू के सीनेटर खुद लगा चुके हैं एजेंसी को बिना निविदा पूर्व में कार्य दिये जाने का आरोप

मुंगेर. मुंगेर विश्वविद्यालय इन दिनों आसवथ इको इंडिया प्राइवेट लिमिटेड पर कुछ ज्यादा ही मेहरबान है. इस कारण ही एमयू में उत्तरपुस्तिकाओं के कोडिंग और पोर्टल के पेमेंट गेटवे की जिम्मेदारी संभाल रहे इस एजेंसी को अब विश्वविद्यालय द्वारा यूएमआइएस पोर्टल की जिम्मेदारी भी दे दी गयी है. यह हाल तब है, जब खुद एमयू के सीनेटर द्वारा पूर्व में ही एजेंसी के कार्य प्रणाली पर सवाल खड़ा करते हुए एजेंसी को पूर्व में बिना निविदा के कोडिंग का कार्य दिये जाने का आरोप लगाया गया है.

यूएमआइएस एजेंसी एसएमवी से वापस लिया गया कार्य

एमयू द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि परीक्षा बोर्ड के 26 मार्च को हुई बैठक के निर्णय के अनुसार, एसएमवी इन्फोटेक प्राइवेट लिमिटेड (एल1 एजेंसी) को पूर्व में सौंपा गया कार्य, कार्य निष्पादन न करने और समझौते की शर्तों के उल्लंघन के कारण वापस ले लिया गया है. वहीं आसवथ इको इंडिया प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के एल-2 पैनल में शामिल एजेंसी होने के नाते. आसवथ एजेंसी एसएमवी इन्फोटेक प्राइवेट लिमिटेड के सभी कार्यों को तत्काल प्रभाव से अपने हाथ में लेते हुए निष्पादित करेगी. एजेंसी विश्वविद्यालय के अधिकारियों के समन्वय से सभी प्रणालियों, डेटा और चल रहे कार्यों का सुचारू रूप से कार्यभार ग्रहण करेगी और बिना किसी विलंब के सभी सेवाओं को बहाल करेगी. सभी कार्य पूर्व के निविदा और समझौते की शर्तों के अनुसार ही किए जायेंगे.

एल-2 एजेंसी पर सीनेटर लगा चुके हैं कई आरोप

एमयू के सीनेटर सह पूर्व नोडल अधिकारी डॉ कुंदन लाल ने पूर्व में एल-2 में शामिल आसवथ इको इंडिया प्राइवेट लिमिटेड कंपनी पर कई आरोप लगाये थे. इसमें उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा बिना विधिक टेंडर की प्रक्रिया के ही आसवथ इको इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, पटना को उत्तर पुस्तिकाओं के बारकोडिंग और परीक्षा परिणामों का कार्य दिये जाने का आरोप लगाया गया है. इतना ही नहीं इसी एजेंसी द्वारा विश्वविद्यालय में पेमेंट गेटवे का संचालन करने और पेमेंट गेटवे पर विद्यार्थियों से लिये जा रहे अतिरिक्त राशि और आये दिन पेमेंट गेटवे से विद्यार्थियों को हो रही परेशानी की जानकारी भी कुलपति को दी गयी थी.

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