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दलित व मुस्लिम कार्ड के भरोसे अब मुंगेर में कांग्रेस तलाश रहा अपना आधार

Updated at : 28 Apr 2025 7:52 PM (IST)
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दलित व मुस्लिम कार्ड के भरोसे अब मुंगेर में कांग्रेस तलाश रहा अपना आधार

लंबे समय तक बिना जिला कमेटी के संचालित कांग्रेस पार्टी अब मुंगेर जिले में दलित व मुस्लिम कार्ड के भरोसे अपना आधार तलाश रही है.

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मुंगेर. लंबे समय तक बिना जिला कमेटी के संचालित कांग्रेस पार्टी अब मुंगेर जिले में दलित व मुस्लिम कार्ड के भरोसे अपना आधार तलाश रही है. हाल के दिनों में बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने दो पुराने कांग्रेसी अशोक पासवान को जहां पार्टी का जिलाध्यक्ष मनोनीत किया है. वहीं इनामुल हक को कार्यकारी जिलाध्यक्ष बनाया गया है. अर्थात दलित व मुसलमान को जिला का नेतृत्व सौंप कर पार्टी इन वर्गों को अपनी ओर आकर्षित करना चाह रही है. लेकिन लंबे समय से बिहार में जातीय राजनीति के गोलबंदी में ये दोनों वर्ग दूसरे पार्टियों में अपना भविष्य तलाशते रहे हैं. बिहार विधानसभा के चुनावी वर्ष में कांग्रेस पार्टी ने नये सिरे से संगठन को मजबूती प्रदान करने का कार्य प्रारंभ किया है. मुंगेर जिले की स्थिति बड़ा ही सोचनीय रहा है. वर्ष 2018 में जिला कांग्रेस कमेटी के तत्कालीन अध्यक्ष सौरभ निधि के जदयू में चले जाने के बाद पार्टी ने अजय कुमार सिंह को प्रभारी जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी. वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने महागठबंधन उम्मीदवार के रूप में अजय कुमार सिंह को जमालपुर से अपना प्रत्याशी बनाया और वे विधायक चुने गये. लेकिन विधायक बनने के बावजूद प्रभारी जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी उनके कंधों पर ही रही. इस दौरान जिला कमेटी का गठन भी नहीं हो पाया और कांग्रेस पार्टी से जुड़े लोग बिना पद के ही इधर-उधर रहे. फलत: पार्टी आम जनता की समस्याओं को लेकर मुखर नहीं हो पायी और क्षेत्र में अपना जनाधार मजबूत करने में भी कारगर नहीं रही. जिसके कारण लंबे समय तक पार्टी का कार्यकलाप आम लोगों से नहीं जुड़ पाया.

एक समय कांग्रेसियों का गढ़ था मुंगेर

मुंगेर आजादी के बाद से ही कांग्रेसियों का गढ़ रहा है. मुंगेर के प्रथम सांसद बनारसी प्रसाद सिंह से लेकर बिहार के पहले मुख्यमंत्री डॉ श्रीकृष्ण सिंह, बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पहले अध्यक्ष नंदकुमार सिंह का यह कर्मस्थल रहा है. बाद के वर्षों में राजेंद्र प्रसाद सिंह, प्रफुल्लो मिश्र, राजो सिंह जैसे दिग्गज इस जिले का नेतृत्व करते रहे. मुंगेर व तत्कालीन जमुई के चंद्रशेखर सिंह जहां बिहार के मुख्यमंत्री रहे थे, वहीं त्रिपुरारी प्रसाद सिंह जैसे नेता भी पुराने मुंगेर जिले में ही थे, लेकिन बाद के वर्षोंं में कांग्रेस पार्टी की जमीन खिसकती चली गयी और अब उसे अपनी जमीन तलाशने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है.

दलित व मुस्लिम को सौंपी गयी जिला कांग्रेस की जिम्मेदारी

मुंगेर जिला कांग्रेस की जिम्मेदारी पार्टी नेतृत्व ने दलित व मुस्लिम को सौंपी है. जबकि बिहार की राजनीति में दलित समाज जहां पूर्व से लोजपा से संबद्ध रहा है. वहीं मुस्लिम समाज राजद के साथ राजनीति करता रहा है. इस परिस्थिति में कांग्रेस पार्टी इन दोनों वर्गों को कितने हद तक अपनी ओर मुखातिब करने में सफल हो पायेगी, यह तो समय ही बतायेगा. लेकिन इतना तय है कि पार्टी को अब अपनी जमीन तलाशने के लिए कड़ी मशक्कत की जरूरत है. नवमनोनीत कार्यकारी अध्यक्ष इनामुल हक का मानना है कि वे नये सिरे से संगठन को गठन करने में लगे हैं. जिले में 12 उपाध्यक्ष व 24 सचिव बनाये जायेंगे. जिसमें एक उपाध्यक्ष व दो सचिव को एक-एक प्रखंड की जिम्मेदारी दी जायेगी. उनका मानना है कि कांग्रेस पार्टी को जिले में मजबूत किया जायेगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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MD. TAZIM

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