बदहाल व्यवस्था : पढ़ाई की उम्र में हाथों में किताब नहीं, बकरियों की डोर

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खेतों में बकरी चराते सरकारी स्कूल के किशोर-किशोरियां | Prabhat Khabar Network

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हवेली खड़गपुर के भूसीचक गांव में आर्थिक तंगी के कारण बच्चे स्कूल जाने के बजाय बकरियां चराने को मजबूर हैं। शिक्षा व्यवस्था पर उठ रहे हैं गंभीर सवाल।

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हवेली खड़गपुर (मुंगेर) . जिले के हवेली खड़गपुर प्रखंड क्षेत्र के भूसीचक गांव में पढ़ाई की उम्र के किशोर-किशोरियां किताब-कॉपी लेकर विद्यालय जाने की बजाय खेतों के बीच बकरियां चराते हैं. यहां धान की हरे-भरे खेतों के बीच बकरियों के झुंड के साथ खड़े ये बच्चे ग्रामीण समाज की उस वास्तविकता को सामने ला रहे हैं, जहां विद्यालय में नामांकन होने के बावजूद परिवार की आर्थिक और कृषि संबंधी जरूरतों के आगे कई बार पढ़ाई पीछे छूट जाती है. नाम स्कूल में लेकिन खेती के दिनों में खेतों की जिम्मेदारी.

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खेती के कारण नहीं जा पाते नियमित रूप से स्कूल

बकरी चरा रहे किशोर-किशोरियों ने बताया कि उनका नामांकन गांव के मध्य विद्यालय बोखड़ा में है. सामान्य दिनों में वे विद्यालय जाते हैं, लेकिन धान की रोपनी और खेती-बाड़ी के व्यस्त समय में विद्यालय नियमित रूप से नहीं जा पाते हैं. परिवार के बड़े सदस्य खेतों में काम करने निकल जाते हैं तो, पशुओं को चराने और घर-खेती से जुड़े दूसरे कामों में सहयोग करने में बच्चों भी जुट जाते हैं. ऐसे में स्कूल की घंटी बजती रहती है, लेकिन इन बच्चों की सुबह किताब-कॉपी के बजाय खेत और पशुओं के बीच गुजरती है.

पढ़ाई होती है प्रभावित सरकारी विद्यालयों में पाठ्यपुस्तक, पोशाक, मध्याह्न भोजन और अन्य सुविधाओं के बावजूद शिक्षा की वास्तविक सफलता तभी मानी जाएगी, जब सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे नियमित विद्यालय पहुंच सकें. खेती के व्यस्त मौसम में लगातार अनुपस्थिति से उनकी पढ़ाई और सीखने की निरंतरता प्रभावित होने की आशंका रहती है. ऐसे बच्चों की पहचान कर विद्यालय, अभिभावक और शिक्षा विभाग के स्तर पर संवाद एवं विशेष पहल की जरूरत है.

कहते हैं जिम्मेदार हवेली खड़गपुर के प्रभारी प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी गौतम पटेल ने कहा कि यदि विद्यालय अवधि में स्कूली बच्चे पढ़ाई छोड़कर बकरी चराने जा रहे हैं, तो यह काफी गंभीर विषय है. विद्यालय में नामांकित प्रत्येक बच्चे की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना हमारी प्राथमिकता है. इसके लिए संबंधित विद्यालय के प्रधानाध्यापक, शिक्षकों के भी साथ मिलकर बच्चों के अभिभावकों को जागरूक किया जायेगा. इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए प्रखंड क्षेत्र में विशेष जागरूकता अभियान भी चलाया जायेगा, ताकि विद्यालय में नामांकित बच्चे नियमित रूप से स्कूल आएं और उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो.


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