पदों की स्वीकृति मिलने के दो माह बाद भी नहीं हुई पीजी विभागों में नियुक्ति
Updated at : 01 Nov 2025 6:49 PM (IST)
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मुंगेर विश्वविद्यालय एक ओर जहां नये कॉलेजों में पीजी की पढ़ाई तक आरंभ कर रहा है, जब कई विषयों में या तो शिक्षक नहीं है या शिक्षक विश्वविद्यालय में अधिकारी बने हुए हैं.
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पांच अगस्त को ही कैबिनेट से मिली है एमयू के पीजी विभागों को 167 पदों की स्वीकृति
मुंगेर. मुंगेर विश्वविद्यालय एक ओर जहां नये कॉलेजों में पीजी की पढ़ाई तक आरंभ कर रहा है, जब कई विषयों में या तो शिक्षक नहीं है या शिक्षक विश्वविद्यालय में अधिकारी बने हुए हैं. वहीं इससे अलग विश्वविद्यालय अपने पीजी विभागों के लिए सरकार से पद सृजन की स्वीकृति मिलने के दो माह बाद अबतक उन स्वीकृत पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया पूर्ण नहीं कर पाया है. जिसके कारण अबतक एमयू के पीजी विभाग सृजित पद होने के बावजूद बिना कर्मियों और शिक्षकों के चल रहा है.दो माह पहले मिली है पदों की स्वीकृति
एमयू के 20 पीजी विभागों के लिए पदों की स्वीकृति कैबिनेट से पांच अगस्त को ही मिली है. जिसमें वनस्पति विज्ञान, जंतु विज्ञान, रसायनशास्त्र, भौतिकी, बायोटेक्नोलॉजी, गणित, हिंदी, अंग्रेजी, दर्शनशास्त्र, उर्दू, संगीत, अर्थशास्त्र, भूगोल, इतिहास, समाजशास्त्र, राजनीति विज्ञान, मनोविज्ञान, गृहविज्ञान, वाणिज्य तथा बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन शामिल है. इसमें कुल 167 पदों के लिए स्वीकृति मिली है. जिसमें शिक्षकों के कुल 120 तथा शिक्षकेतर कर्मचारियों के कुल 47 पद शामिल हैं. वहीं प्रत्येक पीजी विभाग के लिए प्राध्यापक के एक, सह प्राध्यापक के दो तथा सहायक प्राध्यापक के तीन पद के अतिरिक्त निम्न वर्गीय लिपिक के दो पदों की स्वीकृति मिली है.सभी पीजी विभागों में विभागाध्यक्ष, लेकिन शिक्षक व कर्मियों की कमी
बता दें कि एमयू द्वारा साल 2021 में ही 20 पीजी विभागों को आरंभ किया गया. हालांकि एमयू को उस समय पीजी विभागों के लिए पद सृजन की स्वीकृति नहीं मिल पायी थी, जिसके कारण विश्वविद्यालय द्वारा बिना स्वीकृत पद के ही शिक्षकों की वैकल्पिक व्यवस्था कर पीजी विभागों को आरंभ कर दिया गया, लेकिन अब जब एमयू को अपने पीजी विभागों के लिए पद की स्वीकृति मिल चुकी है. इसके बावजूद अबतक एमयू के पीजी विभाग के स्वीकृत पद दो माह से खाली पड़े हैं. हाल यह है कि एमयू के सभी पीजी विभागों में विभागाध्यक्ष तो हैं, लेकिन शिक्षक और कर्मियों की कमी है. जिसके कारण अधिकांश कार्य खुद पीजी विभागाध्यक्षों को ही करना पड़ता है.पीजी विभागों के स्वीकृत पदों पर शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर कुलपति द्वारा विचार किया जा रहा है. जल्द ही इसे लेकर अंतिम निर्णय लिया जायेगा.
डॉ सूरज कोनार, पीआरओB
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