भीख मांग कर नेत्रहीन मुशो ने नतनी के लिए बनवाया शौचालय
Author :Prabhat Khabar Digital Desk
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Updated at :19 Feb 2017 5:44 AM
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मुशो देवी की जुनून को जिला प्रशासन ने किया सलाम स्वच्छ भारत अभियान के लिए बनेगी रॉल मॉडल मुंगेर : इरादा मजबूत हो तो हर मंजिल आसान है. बिहार के दशरथ मांझी ने पहाड़ का सीना चीर कर रास्ता बनाया. इसी तरह मुंगेर जिले की नेत्रहीन भिखारिन मुशो देवी ने मजबूत इच्छा शक्ति के बल […]
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मुशो देवी की जुनून को जिला प्रशासन ने किया सलाम
स्वच्छ भारत अभियान के लिए बनेगी रॉल मॉडल
मुंगेर : इरादा मजबूत हो तो हर मंजिल आसान है. बिहार के दशरथ मांझी ने पहाड़ का सीना चीर कर रास्ता बनाया. इसी तरह मुंगेर जिले की नेत्रहीन भिखारिन मुशो देवी ने मजबूत इच्छा शक्ति के बल पर अपनी तीन वर्षीय अनाथ नतनी के लिए बिना सरकारी सहायता के शौचालय निर्माण करा हर व्यक्ति को शौचालय की अहमियत बताने का प्रयास किया है.
मुशो के इस जुनून को जिला प्रशासन ने भी सलाम किया और बताया गया कि उसे स्वच्छ भारत मिशन अभियान के लिए मुंगेर जिले का रॉल मॉडल बनाया जायेगा.
भीख व कर्ज लेकर बनाया शौचालय
धरहरा प्रखंड के हेमजापुर पंचायत की वार्ड संख्या चार निवासी नि:शक्त मनोहर चौधरी की पत्नी मुशो देवी का मुख्य पेशा भीख मांगना है. वह कहती है कि उसका पति कोई काम नहीं कर पाता है और लाठी के सहारे किसी प्रकार चलता-फिरता है, जबकि वह खुद नेत्रहीन है. उसने कहा कि हेमजापुर, लखीसराय के मेदनी चौकी, सूर्यगढ़ा बाजार में वह रोजाना जाकर भीख मांगती है. उसके पास घर चलाने के कोई दूसरा विकल्प नहीं है. उसने बताया कि गांव में लोगों से सुना कि सरकार सभी के घर में शौचालय बनवा रही है.
मैने भी कई लोगों से कहा लेकिन किसी ने नहीं सुनी. सरकारी सहायता भी कहीं से नहीं मिली. इसके बाद मैंने भीख से जमा की गयी राशि से शौचालय बनाना प्रारंभ किया. पैसा जब कम हुआ तो गांव-टोला के कुछ लोगों से कर्ज लिया. शौचालय निर्माण पर 25 हजार रुपये खर्च हुआ. 10 हजार रुपया कर्जा लिया. अभी मिस्त्री व मजदूर का दो हजार रुपया बकाया है.
मुशो देवी ने बताया कि उसे दो बेटी थी. किसी प्रकार दोनों की शादी उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में की. छोटी बेटी सुनीता देवी की शादी गाजियाबाद निवासी कृपाल सहनी से की. तीन साल पूर्व उसकी मौत हो गयी. उससे एक बच्ची थी. वह तीन-साढ़े तीन साल की हो गयी. सभी का शौचालय बन रहा था, लेकिन मेरे घर में नहीं बना. मुझे लगा कि हमलोग तो किसी तरह काम चला लेते हैं. नतनी बच्ची है, जो धीरे-धीरे बड़ी हो रही है. वह खेत में कैसे शौच को जायेगी. उसी समय मैंने ठान लिया कि अपने घर में शौचालय बनवाऊंगी. मेरी नतनी खेत में शौच नहीं जायेगी.
भीख मांगती है फिर नहीं मिलता खाद्यान्न
भीख मांगना अपराध है. इसी प्रथा को खत्म करने के लिए केंद्र व राज्य सरकार ने कई कल्याणकारी योजना चला रखी है. इसमें एक है राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना. इसके तहत एक लाभुक को तीन किलो चावल व दो किलो गेहूं दिया जाता है, लेकिन मुशो देवी की कहानी ही कुछ अलग है. वह बताती है कि पहले लाल कार्ड दिया गया था. अनाज मिलता था, लेकिन अब अनाज नहीं मिलता है. डीलर से झगड़ कर वह केरोसिन लेती है.
स्वच्छता अभियान के तहत जिला प्रशासन
मुशो को करेगा पुरस्कृत
नेत्रहीन मुशो देवी के शौचालय निर्माण की जब सच्ची हकीकत से उपविकास आयुक्त रामेश्वर पांडे को रू-ब-रू कराया गया तो वे काफी जज्बाती हो गये. उन्होंने तत्काल एसडीओ से बात कर उन्हें खाद्य सुरक्षा योजना के तहत कार्ड बनाने व राशन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया. इसके साथ ही धरहरा पीओ को मुशो के नाम मनरेगा कार्ड बना कर कार्य स्थल पर बच्चों को
खिलाने का काम देने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन द्वारा स्वच्छता अभियान के तहत उसे पुरस्कृत किया जायेगा और सरकारी नियमानुसार शौचालय निर्माण के लिए मिलने वाली राशि उपलब्ध करायी जायेगी. उन्होंने कहा कि मुशो को शौचालय निर्माण के लिए मुंगेर से रॉल मॉडल बनाया जायेगा और इसकी सक्सेस स्टोरी को राज्य सरकार के समक्ष प्रस्तुत की जायेगी.
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