मवि मुंगरौड़ा नंबर टू में डेढ़ वर्षों से अधूरी है पेयजल योजना

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मवि मुंगरौड़ा नंबर टू में डेढ़ वर्षों से अधूरी है पेयजल योजना फोटो संख्या : 20 फोटो कैप्सन : विद्यालय में लगा चापाकल प्रतिनिधि , जमालपुरशिक्षा विभाग अपने कार्यों के प्रति कितना सजग है इसका जीता जागता नमूना इस्ट कॉलोनी क्षेत्र में राजकीय मध्य विद्यालय मुंगरौड़ा नंबर टू की आधी अधूरी पेयजल योजना है. हास्यास्पद […]

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मवि मुंगरौड़ा नंबर टू में डेढ़ वर्षों से अधूरी है पेयजल योजना फोटो संख्या : 20 फोटो कैप्सन : विद्यालय में लगा चापाकल प्रतिनिधि , जमालपुरशिक्षा विभाग अपने कार्यों के प्रति कितना सजग है इसका जीता जागता नमूना इस्ट कॉलोनी क्षेत्र में राजकीय मध्य विद्यालय मुंगरौड़ा नंबर टू की आधी अधूरी पेयजल योजना है. हास्यास्पद स्थिति यह है कि इस योजना के बारे में न तो यहां के प्रधानाध्यापक को है और न ही प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी को ही कोई जानकारी है. जबकि डेढ़ वर्ष बीत चुके हैं, परंतु किसी भी स्तर से इसकी जांच तक की किसी के द्वारा सुधी नहीं ली गई कि सचमुच में यह योजना क्यों, कहां से तथा कैसे इस विद्यालय में आरंभ की गई तथा इतने समय बीतने के बाद यह अब तक आधी अधूरी ही क्यों पड़ी हुई है.क्या है स्थितिइस विद्यालय की पश्चिमी छोर पर जहां विद्यालय का एमडीएम तैयार होता है, उसी स्थल पर एक हैंड पंप लगाया गया है. हैंड पंप से पाइप जोड़ कर उसे विद्यालय के दो मंजिला भवन के ऊपर लगाये गये सिंटेक्स टंकी से जोड़ा गया है. इसके साथ ही विद्यालय के किचेन में भी पाइप लगाया गया है. हैंड पंप से लगभग अस्सी फुट दूर विद्यालय के शौचालय में भी पाइप लगाया गया है. परंतु पाइप के सभी काम आधा अधूरा ही है. जबकि हैंड पंप के सहारे ही उस भवन में चलने वाले दो दो विद्यालयों के बच्चे एवं शिक्षकों की प्यास अब भी बुझती है. राजकीय मध्य विद्यालय मुंगरौड़ा नंबर टू की प्रधानाध्यापिका सुनीता कुमारी ने इस संबंध में बताया कि वर्ष 2014 के ग्रीष्मावकाश के दौरान विद्यालय में इस योजना पर किसी एजेंसी द्वारा कार्य किया गया. अवकाश के बाद जब विद्यालय खुला तब हमलोगों ने यह परिवर्तन देखा. पता नहीं किस एजेंसी द्वारा यह काम कराया गया है.कहते हैं बीइओजमालपुर की प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी मंजु कुमारी ने भी इस योजना के बारे में अनभिज्ञता प्रकट की. उन्होंने कहा कि किसी भी विद्यालय में कोई निर्माण कार्य परियोजना द्वारा किया जाता है. परंतु उन्होंने यह नहीं बताया कि इस विद्यालय में पिछले डेढ़ वर्षों से यह कार्य आधा अधूरा क्यों पड़ा हुआ है.

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