आइ हॉस्पिटल : तीन साल में हुए मात्र 122 ऑपरेशन

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आइ हॉस्पिटल : तीन साल में हुए मात्र 122 ऑपरेशन विभागीय उदासीनता के कारण मरीजों को नहीं मिल रहा लाभफोटो संख्या : 11फोटो कैप्सन : आई अस्पताल, मुंगेर प्रतिनिधि, मुंगेरबड़े ही जद्दोजहद के बाद वर्ष 2013 में सदर अस्पताल परिसर में आई हॉस्पिटल का शुभारंभ किया गया. किंतु दुर्भाग्य यह है कि जिला स्वास्थ्य विभाग […]

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आइ हॉस्पिटल : तीन साल में हुए मात्र 122 ऑपरेशन विभागीय उदासीनता के कारण मरीजों को नहीं मिल रहा लाभफोटो संख्या : 11फोटो कैप्सन : आई अस्पताल, मुंगेर प्रतिनिधि, मुंगेरबड़े ही जद्दोजहद के बाद वर्ष 2013 में सदर अस्पताल परिसर में आई हॉस्पिटल का शुभारंभ किया गया. किंतु दुर्भाग्य यह है कि जिला स्वास्थ्य विभाग की उदासीनता के कारण यह हॉस्पिटल वर्तमान समय में बदहाली के दौर से गुजर रहा है. पिछले तीन साल में यहां मात्र 122 मरीजों के आंख का ऑपरेशन हो पाया है. अर्थात प्रतिवर्ष लगभग 40 ऑपरेशन ही हुए हैं. 122 मरीजों का हुआ है ऑपरेशन वित्तीय वर्ष 2015-16 में स्वास्थ्य विभाग मुंगेर में कुल 3500 मरीजों के आंखों के ऑपरेशन का लक्ष्य निर्धारित है. किंतु अब तक जिले भर में मात्र 500 मरीजों के मोतियाबिंद का ऑपरेशन किया गया है. जिसमें आई हॉस्पिटल में इस वर्ष मात्र 4 ऑपरेशन किये गये हैं जो हास्यास्पद है. क्या- क्या दी गयी थी सुविधाआई हॉस्पिटल में मरीजों को मुख्य रूप से मोतियाबिंद के ऑपरेशन की व्यवस्था दी गई थी. जिसके लिए एक ऑपरेशन थियेटर का निर्माण भी कराया गया तथा संबंधित उपकरण भी लगाये गये. इसके साथ-साथ आंखों से संबंधित अन्य रोगों का भी इलाज किया जाना था. किंतु वर्तमान समय में ऑपरेशन के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है. तीन चिकित्सकों को मिला था प्रशिक्षणअस्पताल में चिकित्सक डॉ केएम पूर्वे, डॉ पीएम सहाय एवं डॉ रईस को मरीजों के इलाज के लिए प्रतिनियुक्त किया गया था. स्वयंसेवी संस्था साइट सेवर द्वारा तीनों नेत्र विशेषज्ञ को ऑपरेशन का प्रशिक्षण दिया गया. जिसके बाद यह नियम बनाया गया था कि प्रत्येक सप्ताह में एक दिन मोतियाबिंद का ऑपरेशन भी किया जायेगा. किंतु विभागीय उदासीनता के कारण सारे नियम व निर्देश फाईलों में ही दम तोड़ रही है. जर्जर हो चुका है आई हॉस्पिटलआई हॉस्पिटल का भवन इन दिनों जर्जरता का दंश झेल रहा है. यहां के डॉक्टर ड्यूटी रूम, जांच कक्ष व ऑपरेशन थियेटर में वर्षा के दिनों में छत से पानी टपकता है. न सिर्फ मरीजों को बल्कि चिकित्सक व नेत्र सहायकों को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. बावजूद इसे विभाग द्वारा मरम्मत नहीं कराया जा रहा है. कहते हैं सिविल सर्जनसिविल सर्जन डॉ श्रीनाथ ने कहा कि आई हॉस्पिटल के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा किसी प्रकार की मदद नहीं की गयी थी. बावजूद उसे जैसे-तैसे चालू किया गया. वर्तमान समय में यहां का भवन पूरी जरह जर्जर हो चुका है. साथ ही यहां संसाधनों का भी अभाव है. जिसके कारण मरीजों को बेहतर सुविधा नहीं मिल पा रही है.

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