चुनावी नक्कार खाने में दब गयी किसानों के तूती की आवाज

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चुनावी नक्कार खाने में दब गयी किसानों के तूती की आवाज प्रतिनिधि, तारापुर अल्पवृष्टि से किसान तबाह रहे, धान के खेतों में नहर से पानी नहीं पहुंच सका. सरकार द्वारा घोषित डीजल अनुदान का भी लाभ किसान नहीं ले पाये. कर्ज लेकर किसान ने धान की फसल को बचाने का असफल कोशिश किया. जिसमें कुछ […]

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चुनावी नक्कार खाने में दब गयी किसानों के तूती की आवाज प्रतिनिधि, तारापुर अल्पवृष्टि से किसान तबाह रहे, धान के खेतों में नहर से पानी नहीं पहुंच सका. सरकार द्वारा घोषित डीजल अनुदान का भी लाभ किसान नहीं ले पाये. कर्ज लेकर किसान ने धान की फसल को बचाने का असफल कोशिश किया. जिसमें कुछ सफल रहे तो कुछ असफल. रबी की बुआई भी समय पर हो पायेगा या नहीं इससे भी किसान परेशान हैं. चुनावी नक्कारखाने में दब गयी आवाज राजनीतिक एवं सामाजिक कार्यकर्ता सहित प्रशासनिक महकमा चुनाव एवं त्योहारों में व्यस्त रहे. किसानों को 50 रुपये अधिक कीमत देकर खाद की बोरी खरीदनी पड़ी. हरपुर के किसान विजय यादव का कहना है कि इस वर्ष हमलोग पईमान हो गये. सरकार द्वारा डीजल अनुदान भी नहीं दिया गया. वर्षा भी नहीं हुई और पटवन में अधिक राशि खर्च करना पड़ा. लागत मूल्य भी निकल जाय तो यही गणीमत है. मुखिया संघ के अध्यक्ष रामकृष्ण सिंह कहते हैं कि क्षेत्र सूखा पड़ा है. किसानों के कर्ज माफ होने चाहिए. धौनी के किसान सदानंद चौधरी कहते हैं कि डीजल अनुदान मिलने की गति काफी धीमी है. समय से मिल जाय तो किसानों के काम आ जायेगा. वरना वही हाल होगा ” अब पछताये होत क्या जब चिडि़या चूग गयी खेत ” वाली कहानी चरितार्थ होगी.

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