यज्ञ से चलती है पूरी सृष्टि : कन्हैया जी महाराज
फोटो संख्या : 2 फोटो कैप्सन : प्रवचन करते कन्हैया जी महाराज प्रतिनिधि, बरियारपुर जिस समय सृष्टि की रचना ब्रह्मा ने की थी उसी दिन यज्ञ की भी शुरुआत हुई थी. यह पूरी सृष्टि यज्ञ के माध्यम से चलती है. जैसे सूर्य में जो प्रकाश होता है उसी का अंत ज्योति है. उसी प्रकार जहां […]
फोटो संख्या : 2 फोटो कैप्सन : प्रवचन करते कन्हैया जी महाराज प्रतिनिधि, बरियारपुर जिस समय सृष्टि की रचना ब्रह्मा ने की थी उसी दिन यज्ञ की भी शुरुआत हुई थी. यह पूरी सृष्टि यज्ञ के माध्यम से चलती है. जैसे सूर्य में जो प्रकाश होता है उसी का अंत ज्योति है. उसी प्रकार जहां कोई स्वार्थ न हो उसी का नाम यज्ञ है. ये बातें ईटहरी पंचायत के शिव मंदिर में आयोजित 11 दिवसीय यज्ञ के चौथे दिन शनिवार को प्रवचनकर्ता कन्हैया जी महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कही. उन्होंने कहा कि यज्ञ चार प्रकार के होते हैं. ज्ञान, जिज्ञासा, द्रव्य और ताप. ज्ञान यज्ञ से भक्त परमात्मा का पाने की कोशिश करता है. जिज्ञासा यज्ञ से भक्त-परमात्मा स्वरूप को जानने की चेष्टा करता है. तपो यज्ञ से भक्त तपस्या कर परमात्मा के करीब आना चाहता है और द्रव्य यज्ञ धान की शुद्धि के लिए किया जाता है. भक्त द्रव्य दान कर परमात्मा को पाने की चेष्टा करता है. चारों यज्ञ में ज्ञान यज्ञ सर्वोपरि है. मौके पर सैकड़ों महिला श्रद्धालु मौजूद थे.
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