शहर में सैकड़ों चापाकल पड़े हैं खराब, उन्हें ठीक कराया नहीं, अब नये चापाकल लगाने की कवायद

Updated at : 20 Feb 2020 7:22 AM (IST)
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शहर में सैकड़ों चापाकल पड़े हैं खराब, उन्हें ठीक कराया नहीं, अब नये चापाकल लगाने की कवायद

मुंगेर : सरकार के विभिन्न योजनाओं के तहत शहर में लगाये गये सैकड़ों चापाकल खराब पड़े हैं. जिसकी मरम्मत पीएचइडी विभाग द्वारा नहीं करायी जा रही. चापाकल के हेड में कहीं बकरी बांधी जा रही है तो कहीं अपनी सुरक्षा के लिए लोग रिक्शा-टमटम को बांध रहे. अलबत्ता पीएचइडी विभाग पुराने चापाकल को मृत घोषित […]

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मुंगेर : सरकार के विभिन्न योजनाओं के तहत शहर में लगाये गये सैकड़ों चापाकल खराब पड़े हैं. जिसकी मरम्मत पीएचइडी विभाग द्वारा नहीं करायी जा रही. चापाकल के हेड में कहीं बकरी बांधी जा रही है तो कहीं अपनी सुरक्षा के लिए लोग रिक्शा-टमटम को बांध रहे. अलबत्ता पीएचइडी विभाग पुराने चापाकल को मृत घोषित करते हुए अब नये चापाकल लगाने की तैयारी प्रारंभ कर दी है. इसके तहत जिले में 150 चापाकल लगाने की स्वीकृति मिली है और 129 स्थानों पर चापाकल लगाये जा रहे हैं.

सांसद, विधायक व विधान पार्षद के मद से हाल के वर्षों में व्यापक स्तर पर चापाकल लगाये गये. इसमें अधिकांश जीपीटी चापाकल लगाये गये. करोड़ों रुपये इस पर खर्च हुए. कई स्थानों पर लोग अपने निजी परिसर में इसे लगाकर इसके पाइप में समरसेबुल मशीन लगाकर यूज कर रहे हैं.
तो अधिकांश स्थानों पर मेंटनेंस के अभाव में चापाकल बेकार पड़ा है. मुंगेर शहर के ही हर गली-मुहल्ले में ऐसे दर्जनों जीपीटी चापाकल खराब पड़े हैं जिसे देखने वाला कोई नहीं है. कारण एक तो चापाकल को निर्धारित गहराई से कम बोरिंग कर लगा दिया गया और उसका कोई मेंटनेंस भी नहीं किया गया. फलत: चापाकल खराब पड़े हैं.
बताया जाता है कि सांसद, विधायक व विधान पार्षद के मद से भी जो चापाकल लगाये गये वे सभी लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण के माध्यम से ही लगा है. किंतु देखरेख के अभाव में अब वह खराब हो चुका है और उसे ठीक करने में विभाग की कोई दिलचस्पी नहीं. अलबत्ता अब नये चापाकल लगाने की स्वीकृति मिली है और विभाग उसी में व्यस्त है.
जिले में 600 में मात्र 150 की मिली स्वीकृति : सरकार द्वारा सभी जिलों से मांग किया गया था कि जिले में कितना पुराना चापाकल खराब हैं. जहां राहगीरों एवं वहां रहने वाले लोगों को पानी की समस्या उठानी पड़ रही है. मुंगेर जिले से 600 चापाकल लगाने का डिमांड भेजा गया था.
लेकिन मात्र 150 चापाकल की स्वीकृति मिली. जिसमें कई ऐसे चापाकल लगाने को कहा गया है जो गंगा किनारे और बालू वाले जगहों पर लगना है. पीएचईडी विभाग ने रिवाईज किया और 150 में 127 चापाकलों को लगाने के लिए टेंडर की प्रक्रिया पूरी कर ली. विभाग ने चापाकल गाड़ने के लिए संवेदक का भी चयन कर लिया है. इस हिसाब से जिले में गर्मी आने से पहले 127 चापाकल लगाया जायेगा.
100 मीटर में नहीं हो पानी की व्यवस्था, तभी लगेगा चापाकल
जगह-जगह सड़क किनारे आपको आज भी वर्षों पुराना चापाकल खराब अवस्था में मिल जायेगा. जो राहगीरों के लिए पेयजल का मुख्य आधार था. लेकिन समय के साथ चापाकल खराब होने लगा और जेट व समरसेबल के कारण चापाकल सुखने लगा. आज वह पूरी तरह से बेकार हो गया है. जिसके कारण राहगीरों को प्यास बुझाने में परेशानी होगी.
इतना ही नहीं कई ऐसे वस्ती व मुहल्ला है. जहां चापाकल के भरोसे आज भी पानी की जरूरत पूरी होती है. जिसे देखते हुए जिले के 127 स्थानों पर चापाकल लगाने के लिए टेंडर की प्रक्रिया पूरी कर ली गयी है. लेकिन इसके लिए कुछ नियम व शर्त भी रखा गया है. चापाकल वैसे स्थानों पर गाड़ा जायेगा जहां 100 मीटर के दायरे में पानी की कोई व्यवस्था नहीं होगी.
कहते हैं कार्यपालक अभियंता : पीएचईडी विभाग के कार्यपालक अभियंता अजीत कुमार ने बताया कि मुंगेर में 127 नया चापाकल लगाया जायेगा.
जिसके लिए टेंडर की प्रक्रिया पूरी करते हुए एजेंसी का चयन किया गया है. जहां पुराना चापाकल खराब होगा तथा वह मरम्मती के लायक नहीं होगा और 100 मीटर दायरा में पानी की कोई सरकारी व्यवस्था नहीं होगा. वहां इस योजना के तहत चापाकल लगाया जायेगा.
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