आधुनिक बिहार के शिल्पकार थे बिहार केसरी डॉ श्रीकृष्ण, सबने किया नमन

Updated at : 22 Oct 2019 9:20 AM (IST)
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आधुनिक बिहार के शिल्पकार थे बिहार केसरी डॉ श्रीकृष्ण, सबने किया नमन

मुंगेर : बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री बिहार केसरी डॉ श्रीकृष्ण सिन्हा का सोमवार को विभिन्न संगठनों द्वारा 132वीं जयंती समारोहपूर्वक मनाया गया. उपस्थित लोगों ने कांग्रेस मुख्यालय तिलक मैदान, श्रीकृष्ण सेवा सदन एवं कष्टहरणी घाट के समीप श्रीकृष्ण वाटिका में उनके आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया और उनके बताये […]

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मुंगेर : बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री बिहार केसरी डॉ श्रीकृष्ण सिन्हा का सोमवार को विभिन्न संगठनों द्वारा 132वीं जयंती समारोहपूर्वक मनाया गया. उपस्थित लोगों ने कांग्रेस मुख्यालय तिलक मैदान, श्रीकृष्ण सेवा सदन एवं कष्टहरणी घाट के समीप श्रीकृष्ण वाटिका में उनके आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया और उनके बताये मार्ग पर चल कर उनके अधूरे सपने को पूरा करने का संकल्प लिया.

श्रीकृष्ण सेवा सदन पुस्तकालय में बिहार केसरी श्रीबाबू की जयंती पर भव्य समारोह का आयोजन किया गया. जिलाधिकारी राजेश मीणा, सिविल सर्जन डॉ पुरुषोत्तम कुमार, एसडीओ खगेश चंद्र झा, डीईओ दिनेश चौधरी ने श्रीकृष्ण सिन्हा के प्रतिमा पर माल्यार्पण किया. कार्यक्रम की अध्यक्षता ट्रस्ट के सचिव प्रो. प्रभात कुमार ने की. डीएम ने पुस्तकालय का निरीक्षण किया और श्रीकृष्ण द्वारा यहां दिये गये पुस्तकों का अवलोकन किया.
उन्होंने कहा कि अखंड बिहार के विकास में उनके अतुलनीय, अद्वितीय व अविस्मरणीय योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता. प्रो. प्रभात कुमार एवं अन्य वक्ताओं ने कहा कि आजादी के बाद बिहार के नवनिर्माण उनका अतुलनीय योगदान रहा है. देवघर मंदिर में दलितों के प्रवेश को चालू कराया और उसे समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का काम किया. आजाद भारत का पहला रिफाइनरी, आईओसीएम बरौनी सहित दर्जनों ऐसे उल्लेखनीय कार्य किया जिसके लिए वे आज भी याद किये जाते हैं.
उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी से श्रीकृष्ण सिन्हा को भारत रत्न देने की मांग की. मौके पर जेआरएस कॉलेज के प्राचार्य ललन प्रसाद सिंह, मॉडल स्कूल के प्राचार्य राजीव कुमार, प्रो. सुधीर कुमार, मधुसूदन आत्मीय, डॉ फैज, बमबम सिंह, प्रो. देवेंद्र कुमार सहित अन्य मौजूद थे. इधर ब्रह्मर्षि चेतना मंच की ओर से कष्टहरणी घाट स्थित श्रीकृष्ण वाटिका में उनकी जयंती मनायी गयी. उसकी अध्यक्षता कार्यकारी अध्यक्ष विमलेंदु राय ने की.
उन्होंने कहा कि आधुनिक बिहार के निर्माण में उन्होंने शिल्पकार की भूमिका निभायी. गुलाम भारत में अंतरिम सरकार के गठन की परंपरा में बिहार के प्रधानमंत्री के पद को सुशोभित किया. लेकिन वे कभी भी अंग्रेजों के दबाव में नहीं आये. स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन में उन्होंने अग्रणी भूमिका निभायी.
देश आजाद होने के बाद वे बिहार के पहले मुख्यमंत्री बने. मौके पर अधिवक्ता सुनील कुमार, डॉ हेमंत कुमार, विमल कुमार मिश्रा, गिरिजाशंकर नलिन, प्रणव कुमार, प्रसून कुमार, राजेश कुमार, दीपक कुमार सहित अन्य ने भी अपने-अपने विचार व्यक्त किये. इधर कांग्रेस मुख्यालय तिलक मैदान में जिलाध्यक्ष डॉ अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में श्रीकृष्ण सिंह की जयंती मनायी गयी.
कांग्रेसियों ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्होंने नमन किया. उन्होंने कहा कि श्रीबाबू आधुनिक बिहार के निर्माता थे और गरीब, किसान, युवाओं का वे मसीहा भी थे. उन्होंने जमींदारी प्रथा को खत्म कर बिहार को पहला राज्य बनाया. मौके पर रणजीत कुमार सिंह, अजमत हुसैन, इंद्रदेव मंडल, बीडी चौरसिया, अमलेश कुमार, राहित मणिभूषण सहित अन्य मौजूद थे.
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