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जन पुस्तकालय में लाखों रुपये के ग्रंथ हो रहे बेकार

Updated at : 17 Sep 2019 8:03 AM (IST)
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जन पुस्तकालय में लाखों रुपये के ग्रंथ हो रहे बेकार

परबत्ता : प्रखंड के माधवपुर पंचायत स्थित जन पुस्तकालय स्वर्णिम अतीत को अपने आंचल में समेटे हुए है. लेकिन यह पुस्तकालय जनप्रतिनिधियों एवं अपने पाठकों व शुभचिंतकों की उपेक्षा के कारण बदहाली पर आंसू बहा रहा है. जिले के सांस्कृतिक धरोहर के रुप में ख्याति प्राप्त परबत्ता प्रखंड के इस पुस्तकालय का हाल बेहाल है. […]

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परबत्ता : प्रखंड के माधवपुर पंचायत स्थित जन पुस्तकालय स्वर्णिम अतीत को अपने आंचल में समेटे हुए है. लेकिन यह पुस्तकालय जनप्रतिनिधियों एवं अपने पाठकों व शुभचिंतकों की उपेक्षा के कारण बदहाली पर आंसू बहा रहा है. जिले के सांस्कृतिक धरोहर के रुप में ख्याति प्राप्त परबत्ता प्रखंड के इस पुस्तकालय का हाल बेहाल है.

वर्ष 1954 में बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री डॉ श्री कृष्णा सिंह द्वारा जन पुस्तकालय का उदघाटन किये जाने के बाद राज्य तथा देश के महान विभूतियों ने इस पुस्तकालय का दौरा किया.
इन दौरों की निशानियां आज भी पुस्तकालय के अतिथि संवाद पुस्तिका में दर्ज है. बिहार के तत्कालीन वित्त मंत्री अनुग्रह नारायण सिंह, तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसाद के सचिव व परबत्ता के प्रथम विधायक त्रिवेणी कुंवर, मुंगेर के तत्कालीन जिला पदाधिकारी राफेउल होदा, कैलाश झा आदि ने पुस्तकालय का दौरा किया और अपने अतिथि आगमन पुस्तिका में अपने बहुमूल्य शब्द अंकित किये.
इस पुस्तकालय को अपना भवन सहित बड़ा परिसर, वाचनालय तथा बड़ा कुंआं है. पुस्तकालय का बहुमूल्य फर्नीचर रख रखाव के अभाव में दीमक की भेंट चढ रही है. कीमती और महत्वपूर्ण पुस्तकें भी खराब होने के कगार पर हैं.
इसमें पवित्र वेद, पुराण, कल्याण, रामायण, महाभारत, गांधी साहित्य, हिन्दी साहित्य के अलावा स्थानीय सैनिक उमेश प्रसाद सिंह के द्वारा दिया गया. अब इंन्टरनेट तथा केबल टी वी के इस दौर में इस पुस्तकालय की तरफ कोई झांकने भी नहीं आता है. इससे पूर्व पिछली बार वर्ष 1997 में तत्कालीन जिला शिक्षा पदाधिकारी ने पुस्तकालय का दौरा कर हाल जानने का प्रयास किया था. इसके बाद किसी ने इस पुस्तकालय की ओर अपना रुख नहीं किया.
विभिन्न पवित्र धर्मग्रंथों तथा लाखों रुपयों के मूल्य के ऐतिहासिक पुस्तकें बर्बाद होने के कगार पर हैं. स्थानीय समाजसेवी डॉ सुखदेव सिंह द्वारा स्थापित इस पुस्तकालय को पूर्व में बिहार सरकार के द्वारा अनुदान भी दिया जाता था. लेकिन कालांतर में यह पुस्तकालय सरकार तथा जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा का शिकार बन कर अपनी आखिरी सांसें गिन रहा है.
सांसद ने लिखा था पत्र
पुस्तकालय की बदहाली को देख सांसद चौधरी महबूब अली कैसर ने 9 अगस्त 2017 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पत्र लिखकर ऐतिहासिक पुस्तकालय को जीर्णोद्धार के साथ साथ पूर्व में जो अनुदान सरकार द्वारा दिया जा रहा था. उसे पूर्व की भांति शुरू करने की दिशा में आवश्यक दिशा निर्देश किया जाए करने की बात कहा गया था. लेकिन इसके बाद भी कुछ नही हो पाया है.
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