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मौत से चली जंग में सन्नो की जीत बोरवेल से निकाली गयी सलामत

मासूम की जान बचाने के लिए सभी अपने तरीके से कर रहे थे मदद मुंगेर : मुंगेर जिले में मंगलवार शाम 110 फीट गहरे बोरवेल में गिरी तीन साल की सन्नो को बाहर निकाल लिया गया है. ये घटना मुंगेर जिले के कोतवाली थाना अंतर्गत मुर्गीयाचक मोहल्ला की थी. ये बच्ची घर के आंगन में […]

मासूम की जान बचाने के लिए सभी अपने तरीके से कर रहे थे मदद

मुंगेर : मुंगेर जिले में मंगलवार शाम 110 फीट गहरे बोरवेल में गिरी तीन साल की सन्नो को बाहर निकाल लिया गया है. ये घटना मुंगेर जिले के कोतवाली थाना अंतर्गत मुर्गीयाचक मोहल्ला की थी. ये बच्ची घर के आंगन में एक बोरवेल में गिर गयी थी. सन्नो अपने ननिहाल आयी हुई थी. बोरवेल में बच्ची को जिंदा रखने के लिए ऑक्सीजन पहुंचाई गयी थी.
मासूम की जान बचाने के लिए हर कोई अपने अपने तरीके से मदद कर रहा था. दो दिन पहले ही सन्नो अपने पिता के साथ नाना उमेश नंदन साह के घर आई थी. मंगलवार की दोपहर खेलने के दौरान बच्ची बोरबेल में गिर गयी. पुलिस प्रशासन ने एनडीआरएफ की टीम को बुलावा भेजा. बच्ची को बोरबेल से निकालने के लिए एनडीआरएफ की टीम को भी बुलाया गया था. आइटीसी के चेयरमैन वाइपी सिंह ने घटनास्थल पर आधुनिकतम लाइट की व्यवस्था की थी, ताकि 110 फीट गहरे बोरबेल में गिरी बच्ची की हालात को देखा जा सके. शहर के मुर्गियाचक में उमेश नंदन साव के घर बोरवेल में गिरी तीन वर्षीया बच्ची सना उर्फ सन्नो
मौत से चली…
को 28 घंटे बाद रेस्क्यू ऑपरेशन से बाहर निकाला गया और अब यह ऑपरेशन समाप्त हो गया. सना को सुरक्षित निकालने के लिए एनडीआरएफ व एसडीआरएफ की टीम को लगाया गया था. साथ ही पूरा प्रशासनिक महकमा इस ऑपरेशन को सफल बनाने में अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी. एक ओर जहां विद्यालयों से लेकर मंदिर-मसजिद-गुरुद्वारे में सना को सकुशल बाहर निकालने के लिए दिन भर दुआओं का दौर चलता रहा, वहीं परिजनों में कोहराम मचा है. मां कभी बोरवेल के मुंह पर बच्ची को आवाज लगाती रही, तो कभी खुद बेहोश हो जाती. हर किसी के जुबां पर बस एक ही दुआ कि भगवान सना को सलामत रखे.
खेलने के दौरान बोरवेल में गिरी थी बच्ची:
मुर्गियाचक निवासी उमेश नंदन साव ने सोमवार को अपने घर के सबसे आगे वाले कमरे में समरसेबुल के लिए बोरवेल करवाया था. इसमें पाइप डाल कर आधे बोरवेल में ग्रेबुल डाला जा चुका था और बोरवेल को एक पतले बोरे से ढ़क दिया गया था. मंगलवार को उमेश नंदन बोरवेल के पास ही बैठा हुआ था और उसकी 3 वर्षीय नतनी सना उर्फ सन्नो वहीं पर अपने हाथ में एक छोटा बैडमिंटन और एक प्लास्टिक का मग लेकर खेल रही थी. खेलने के क्रम में ही सना का पांव फिसल गया और वह बोरवेल में 25 फीट के गहराई पर फंस गयी. इसके बाद परिजन तथा आस-पड़ोस के लोगों ने बच्ची को बाहर निकालने का प्रयास किया, लेकिन बोरवेल में डाले गये पाइप के हिलने-डोलने से बच्ची फिसल कर और नीचे चली गयी, जिसकी दूरी 43 फुट मापी गयी. घटना की सूचना मिलने के बाद जिला प्रशासन का पूरा दल मौके पर पहुंचा और बचाव कार्य में जुट गयी.
जेसीबी और पोकलेन से की गयी खुदाई
बोरवेल में काफी बुरी तरह से बच्ची के फंस जाने के कारण शाम 7 बजे जेसीबी मंगायी गयी और बोरवेल के समानांतर घर के आगे सड़क की खुदाई शुरू कर दी गयी. रात लगभग 10 बजे खगड़िया और भागलपुर से एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची और बचाव कार्य में जुट गयी, पर लगभग 10 फुट की खुदाई के बाद जेसीबी से और गड्ढा खोदना मुशकिल हो गया. इसके बाद एसडीआरएफ ने पोकलेन मंगवाया तथा पोकलेन के मदद से 25 फीट तक की खुदाई की गयी. इसके बाद पोकलेन से खुदाई करना भी मुश्किल हो गया और तब एसडीआरएफ की टीम खुद कुदाल व फावड़े की मदद से खुदाई में जुट गयी. वैसे बुधवार को अपराह्न लगभग 03:00 बजे एनडीआरएफ की टीम को पटना से हेलीकॉप्टर द्वारा मुंगेर लाया गया और 03:20 बजे एनडीआरएफ की टीम ने रेस्क्यू ऑपरेशन का कमान संभाला.
जुगाड़ तकनीक का भी लिया गया सहारा:
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान कई जरूरी इक्यूपमेंट उपलब्ध नहीं रहने के कारण एसडीआरएफ की टीम को जुगाड़ तकनीक का भी सहारा लेना पड़ा. चूंकि एसडीआरएफ की टीम जमीन के सतह से जब 25 फुट की गहराई तक पहुंच गया, तब वहां पर हवा की कमी के कारण उसे ऊमस से परेशानी होने लगी. इसके बाद गड्ढ़े के ऊपर बांस बल्ले के सहारे दो पंखे लगाये गये तथा एक एजॉस्ट फैन लगाया गया. पर जैसे-जैसे गड्ढ़े की गहराई बढ़ते गयी, वैसे-वैसे दोनों पंखा भी बेअसर हो गया. 45 फुट गड्ढे खोदने के बाद जब बोरवेल में फंसी बच्ची के समानांतर सुरंग की खुदाई की जाने लगी, तब पानी के संभावित रिशाव व बहाव की स्थिति से निबटने के लिए सेफ्टी टैंक की व्यवस्था की गयी. इस दौरान लोगों की भारी भीड़ जमी रही, जो सना के सकुशल निकालने की वाट जोह रहा था.
मौके पर जमे रहे वरीय अधिकारी:
सना को बचाने के लिए प्रशासन ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी. मुंगेर के प्रमंडलीय आयुक्त पंकज कुमार पाल, डीआइजी जीतेंद्र मिश्रा, पुलिस अधीक्षक गौरव मंगला, सदर अनुमंडल पदाधिकारी खगेशचंद्र झा, एसएसपी हरिशंकर कुमार, एएसपी अभियान राणा नवीन के अलावा जिला प्रशासन के तमाम अधिकारी पिछले 27 घंटे तक मौके पर मौजूद रहे. वैसे आखिरी समय में बारिश के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में काफी परेशानी हुई.
पूरी रात जगी रही मां
तीन साल की सना ने जिस तरह से इतने बड़े हादसे में अदम्य साहस का परिचय दिया, उस तरह का साहस किसी बड़े लोगों में संभव नहीं हो पाता है. एक ओर जहां बोरवेल में डाले गये सीसीटीवी कैमरे की मदद से बच्ची का हिलने-डोलने का पता चल रहा था, वहीं दूसरी ओर जब बच्ची के रोने की आवाज आने लगी, तब उसकी मां सुधा देवी ने बोरवेल में झांकते हुए जोर से आवाज लगायी कि बेटा मैं भी अंदर में ही हुं, तुमको जल्दी ही बाहर निकाल लेंगे. जब भी बच्ची के रोने की आवाज आती थी, तब उसकी मां उसे यही सांत्वाना देती रही. हर आधे घंटे, एक घंटे पर बच्ची की आवाज सुनाई दे रही थी और उसकी मां उसे बार-बार दिलासा दे रही थी. बुधवार की सुबह जब बच्ची से पूछा गया कि चॉकलेट खाओगी, तब बच्ची ने हांमी भरी. जिसके बाद एक पतली
रस्सी के सहारे उसके हाथ तक चॉकलेट पहुंचाया गया, किंतु बच्ची का हाथ इस कदर उपर की ओर फंसा हुआ था कि वह अपने हाथ को मुंह तक नहीं पहुंचा पायी और चॉकलेट उसके हाथ में ही रह गया. जो भी हो इस मासूम बच्ची ने जो साहस दिखाया, वैसा बड़ों से काफी मुशकिल था.
कितना लाचार हूं अपनी बच्ची को एक बूंद पानी भी पिला नहीं सकता
एक ओर जहां सना की मां सुधा देवी लगातार अपनी बच्ची से बात कर उसे सांत्वना दिये जा रही थी. वहीं दूसरी ओर सना के पिता नचिकेता मायूस हो कर बैठा हुआ था. उन्होंने बताया कि सुबह सना से उसकी बात हुई, सना ने उनसे कहा कि ‘पापा मुझे बाहर निकालो, मुझे जोर से प्यास लगी है’. किंतु जिस स्थिति में वह फंसी हुई है, उस स्थिति में उसे पानी पिलाना मुमकिन ही नहीं था. कितना लाचार हूं कि अपनी फूल सी बच्ची को मैं एक बूंद पानी तक पिला नहीं सकता. उन्होंने बताया कि कार्य में व्यस्तता के कारण मंगलवार को वे दोपहर का खाना खाने के लिए भी घर पर नहीं जा पाये थे. अचानक 4:15 बजे उसे फोन पर सूचना मिला कि सना बोरवेल में गिर गयी है. जिसके बाद वह बैंक से सीधा घर पहुंचा.
Prabhat Khabar Digital Desk
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