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लोगों ने स्नान-दान कर मकर संक्रांति का त्योहार मनाया, तिल-चावल का प्रसाद बांटा

लोगों ने स्नान-दान कर मकर संक्रांति का त्योहार मनाया, तिल-चावल का प्रसाद बांटा

हवेली खड़गपुर/ तारापुर. मकर संक्रांति का त्योहार लोगों ने स्नान-दान कर मनाया. इसके बाद महिलाओं ने अपने घरों में पारंपरिक रीति रिवाज के साथ तिल, चावल व गुड़ का पूजन किया व अपने इष्ट देव को दही-चुड़ा का भोग लगाया. इसके बाद अपने परिवार एवं रिश्तेदारों के संग लजीज व्यंजनों का लुत्फ उठाया. वहीं छोटे-छोटे बच्चों के साथ युवाओं ने पतंगबाजी भी की.

हवेली खड़गपुर .

प्रखंड के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में मकर संक्रांति का त्योहार उमंग और धार्मिक भाव के साथ मनाया गया. हालांकि इस बार 14 जनवरी के अलावा 15 जनवरी को भी अधिकांश लोग मकर संक्रांति का त्योहार मनाएंगे. बुधवार को मकर संक्रांति मनाने वाले लोगों ने स्नान व दान कर पारंपरिक पूजन के साथ त्योहार मनाया और अपने परिवार और रिश्तेदारों के साथ चूड़ा-दही और अन्य पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद चखा. लोगों ने तिल, गुड़, चावल, तिलवा, तिलकुट आदि का दान भी किया. मकर संक्रांति के अवसर पर बच्चों और युवाओं ने जमकर पतंगबाजी भी की. रंग-बिरंगे पतंगों के साथ बच्चे और युवाओं ने खूब मस्ती की. पंडित अनंत कुमार मिश्रा, पंडित अरुण कुमार पाठक और सुभाष झा ने बताया कि इसी दिन सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है और उत्तरायण हो जाता है.

तारापुर.

मकर संक्रांति का पावन पर्व पूरे श्रद्धा, आस्था और सौहार्दपूर्ण वातावरण में मनाया गया. सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ इस पर्व का विशेष धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व है. मकर संक्रांति को सनातन संस्कृति में पुण्यकाल माना गया है. इस दिन सूर्यदेव की उपासना, गंगा स्नान, दान और संयम का विशेष महत्व है. मान्यता है कि इस दिन किए गए दान-पुण्य का फल कई गुना बढ़ जाता है. इसी कारण लोगों ने तिल, चावल, गुड़, खिचड़ी और वस्त्र का दान कर पुण्य अर्जित किया. बौंसी स्थित गुरूधाम के वेदाचार्य पंडित राजेंद्र झा ने बताया कि तिल और चावल का दान न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि स्वास्थ्य की दृष्टि से भी अत्यंत लाभकारी है. तिल शरीर को गर्मी प्रदान करता है, जबकि चावल ऊर्जा का प्रमुख स्रोत है. शीत ऋतु में इनका सेवन और दान दोनों ही कल्याणकारी माना गया है. इधर तारापुर के विभिन्न मोहल्लों और मंदिरों में पूजा-अर्चना के साथ सामूहिक रूप से खिचड़ी भोज का भी आयोजन किया गया. इसके अलावा धौनी के कृष्ण काली भगवती मंदिर में पंडित नटवर आचार्य जी द्वारा माता को अरवा चावल से बनी खिचड़ी का भोग लगाया गया एवं उस प्रसाद को भंडारा के रूप में श्रद्धालुओं के बीच वितरित किया.

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