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अंग्रेजों से आजादी दिलायी, अब चाइना को दे रहे टक्कर

Updated at : 16 Oct 2017 1:00 PM (IST)
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अंग्रेजों से आजादी दिलायी, अब चाइना को दे रहे टक्कर

सौरभ हवेली खड़गपुर : पहले देश को आजादी दिलाने के लिए अंग्रेजों से लोहा लिया और अब मिट्टी के बने सामान बना चाइना को चुनौती दे रहे हैं खड़गपुर के स्वतंत्रता सेनानी 101 वर्षीय नारायण पंडित. गांधी के अनुयायी नारायण आज भी लोगों को स्वदेशी अपनाने की सीख देते हैं. वह अपने कांपते हाथों से […]

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सौरभ
हवेली खड़गपुर : पहले देश को आजादी दिलाने के लिए अंग्रेजों से लोहा लिया और अब मिट्टी के बने सामान बना चाइना को चुनौती दे रहे हैं खड़गपुर के स्वतंत्रता सेनानी 101 वर्षीय नारायण पंडित.
गांधी के अनुयायी नारायण आज भी लोगों को स्वदेशी अपनाने की सीख देते हैं. वह अपने कांपते हाथों से मिट्टी के दीपक बना कर चाइनीज बल्बों व झालरों को चुनौती देते हैं. कहते हैं कि चाइना तभी हमें आंख दिखाना बंद करेगा, जब हम उसकी अर्थव्यवस्था पर प्रहार करेंगे. महादेवपुर निवासी वयोवृद्ध नारायण पंडित अपनी पत्नी के साथ मिल कर 83 वर्षों से लागातर मिट्टी को आकर्षण रूप देकर अपना और अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे. लेकिन, बाजार में चाइनीज सामान उनकी मेहनत को चिढ़ाते हैं.
वे कहते हैं कि जब दीपक की खरीदारी करने वाले ही कम रह गये हैं, तो ज्यादा बनाने से क्या फायदा.शहर से गांव तक चाइनीज दीये की मांग हर साल बढ़ती ही जा रही है. इसलिए इस वर्ष दीपावली में मात्र 5000 दीपक ही बनाया है.
चाइनीज सामान की खरीदारी करें बंद : स्वतंत्रता सेनानी नारायण पंडित का कहना है कि अब मिट्टी के दीप का जमाना गया. कभी दीपावली पर्व से एक महीने पहले मोहल्ले में रौनक छा जाती थी. कुम्हारों में यह होड़ रहती थी कि कौन कितनी कमाई करेगा. लेकिन, अब तो खरीदार ही नजर नहीं आते.
महंगाई की मार से मिट्टी भी अछूती नहीं रही. कच्चा माल भी महंगा हो गया है. दिन-रात मेहनत के बाद हमें मजदूरी के रूप में 100 से 150 रुपये की कमाई हो पाती है. इससे परिवार का गुजारा नहीं हो पाता. जीवन के अंतिम समय में हम किसी तरह पति-पत्नी अपना जीवन गुजर बसर कर रहे हैं.
आने वाली पीढ़ी के लिए जरूरी है कि वह स्वदेशी अपनाये और विदेशी भगाये. हमे स्वतंत्रता भी इसी रणनीति से मिली है. आज चीन हमें आंख दिखा रहा है और हमारे देश की अर्थव्यस्था को कमजोर कर रहा है. सिर्फ हमारा देश चाइनीज सामान को खरीदना छोड़ दे, तो चीन हमें आंख भी दिखाना बंद कर देगा जो देश हित में जरूरी है. इतना ही नहीं पर्यावरण के लिहाज से मिट्टी के बर्तन खास हैं.
स्वतंत्रता सेनानी की कहानी उसकी जुबानी :
101 वर्षीय नारायण पंडित बताते हैं कि अंग्रेजों के समय में तो मिट्टी का दिया और बर्तन बनाने के बावजूद खाने के लिए अनाज नहीं जुट पाता था, अब भी वही हाल है.
वे बताते हैं कि खड़गपुर के बाबूहरि सिंह व नंदकुमार सिंह की अगुवाई में अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन करने के लिए प्रचार-प्रसार के दौरान जब महात्मा गांधी जी खड़गपुर आये थे, तब उन्होंने भी अपना योगदान दिया था. हमनें नगर क्षेत्र स्थित जोड़ी पोखर के पुल को उड़ाया था. इसमें अंग्रेजों और खड़गपुर वासियों में दो तरफा जंग छिड़ गयी थी. ताबड़तोड़ गोलियां चलीं और मुख्य बाजार निवासी नेवाजी केशरी शहीद हो गये थे.
शख्सीयत
101 वर्षीय स्वतंत्रता सेनानी नारायण पंडित के बनाये मिट्टी के दीये चाइनीज बल्बों को दे रहे चुनौती
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