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महिलाओं ने मनाया अखंड सौभाग्यवती का पर्व तीज

Updated at : 06 Sep 2024 10:27 PM (IST)
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महिलाओं ने मनाया अखंड सौभाग्यवती का पर्व तीज

अखंड सौभाग्यवती का पर्व हरतालिका तीज को लेकर शुक्रवार को पूरे दिन घर से लेकर मंदिर तक भजन व शिवलचारी की धून गूंजती रही.

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मोतिहारी. अखंड सौभाग्यवती का पर्व हरतालिका तीज को लेकर शुक्रवार को पूरे दिन घर से लेकर मंदिर तक भजन व शिवलचारी की धून गूंजती रही. पत्नी अपने पति के दीर्घायु होने व अपने परिवार में खुशहाली को लेकर उपवास रखकर तीज व्रत की. भांग, धतूर, अकवन, बेलपत्र, कमल का फुल व फल से भगवान शिव व माता पार्वती की पूजा की. वहीं कुंआरी कन्याएं भी उपवास रहकर अपनी मनोकामना पूरा होने के लिए पूजा-अर्चना की. मठ-मंदिरों में भी पूजा-अर्चना को लेकर भक्तों की भीड़ रही. देर शाम चौथचंद व्रती उपवास रखकर चंद्रमा की पूजा की और परिवार में खुशहाली की कामना की. तीज व्रत को लेकर भक्तिमय रहा माहौल रक्सौल. अखंड सौभाग्य की रक्षा के लिए भगवान शंकर और मां पावर्ती की पूजा करते हुए हरतालिका तीज का व्रत शुक्रवार को रक्सौल में धूमधाम के साथ मनाया गया. तीज पर्व को लेकर शुक्रवार को घर-घर में पूजा का माहौल रहा. महिलाओं ने निर्जला व्रत रखकर अपने-अपने पति के लिए लंबी आयु का वरदान मांगते हुए विधि विधान के साथ मां गौरी और भगवान शंकर की पूजा की. रक्सौल से सटे नेपाल में भी तीज को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह देखा गया. नेपाल में तीज का पर्व बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जाता है. यहां पर तीज का व्रत रखने वाली सभी व्रती महिलाएं केवल लाल रंग की साड़ी पहनती है और भगवान शंकर की पूजा करती है. इधर, तीज पर्व को लेकर नेपाल की राजधानी काठमांडू स्थित बाबा पशुपतिनाथ मंदिर का कपाट सुबह 3 बजे से ही खोल दिया गया था. तीज के दौरान यहां महिलाओं के दर्शन का विशेष प्रबंध मंदिर समिति के द्वारा किया जाता है. तीज व्रत के दौरान महिलाएं न सिर्फ निर्जला व्रत रखती है, बल्कि रात भर जागरण करके कठिन व्रत को पूरा करती है. तीज व्रत के दौरान महिलाओं के द्वारा पहले घर में विधि विधान के साथ पूजा अर्चना की गयी और इसके बाद भगवान शंकर को प्रसन्न करने के लिए लाचारी के गीत गाये गये. केसरिया. अखंड सौभाग्यवती का पर्व हरतालिका तीज शुक्रवार को श्रद्धा, उल्लास से मनाया गया. पति की दीर्घायु के लिए महिलाओं ने 24 घंटे का निर्जला व्रत रखा. इस अवसर पर कुंवारी युवतियों ने भी व्रत रखकर अच्छे वर की कामना की. शाम को शृंगार करके विधिविधान से शिव-पार्वती का पूजन-अर्चन किया और मंगल गीत गाया. हरतालिका व्रत शुक्रवार के दिन होने से ज्यादा पुण्यदायी रहा. मान्यता है इसी दिन माता पार्वती का बिशेष पूजा होता है. व्रती महिलाओं ने मनोकामना की प्राप्ति के लिए शिव मंदिरों में पूजा-अर्चना की. साथ ही फल, खीरा, मिठाई, वस्त्, सुहाग की सामग्री दान किया. वहीं निलम कुमारी व पुनम कुमारी ने बताया कि तीज के दिन दुल्हन की तरह सजना अच्छा लगता है.

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