सरकारी फंड का इंतजार नहीं... इस पंचायत ने खुद कमाए पैसे, अब पूरे बिहार के मुखिया सीखने आएंगे मॉडल

मुखिया तान्या प्रवीण
पूर्वी चंपारण की सिसवा पूर्वी पंचायत ने सरकारी अनुदान पर निर्भरता खत्म कर दी है। घर-घर कचरा संग्रहण, वोटिंग और ई-लाइब्रेरी से राजस्व जुटाकर विकास कार्यों को नई गति दी है।
Motihari News: पूर्वी चंपारण के बंजरिया प्रखंड स्थित सिसवा पूर्वी पंचायत ने विकास और आत्मनिर्भरता का ऐसा मॉडल तैयार किया है, जिसकी चर्चा अब पूरे बिहार में हो रही है. सरकारी अनुदान पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय पंचायत ने अपने संसाधनों से राजस्व जुटाकर विकास कार्यों को नई गति दी है. इसी वजह से पंचायती राज विभाग ने इसे राज्य की अन्य पंचायतों के लिए 'रोल मॉडल' के रूप में चुना है.
दूसरे जिलों के मुखिया करेंगे अध्ययन दौरा
पंचायती राज विभाग की पहल पर 20 जुलाई के आसपास बिहार के विभिन्न जिलों के 50 से 100 मुखिया सिसवा पूर्वी पंचायत का दौरा करेंगे.
इस अध्ययन भ्रमण का उद्देश्य पंचायत द्वारा विकसित स्व-राजस्व मॉडल को समझना और उससे सीख लेकर अपने-अपने क्षेत्रों में लागू करना है.
आत्मनिर्भरता बना सफलता का आधार
पंचायत की मुखिया तान्या परवीन के नेतृत्व में सरकारी फंड पर निर्भरता कम करने के लिए कई नवाचारी पहल की गईं.
पंचायत ने स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग कर स्वयं आय के स्रोत विकसित किए, जिससे विकास कार्यों को गति मिली.
ऐसे जुटाया जा रहा है पंचायत का राजस्व
सिसवा पूर्वी पंचायत ने आय बढ़ाने के लिए कई अभिनव कदम उठाए हैं.
- घर-घर कचरा संग्रहण के बदले नाममात्र का मासिक शुल्क लिया जाता है.
- पंचायत के पोखर में बोटिंग सुविधा से आय होती है.
- विद्यार्थियों के लिए संचालित वातानुकूलित ई-लाइब्रेरी से भी शुल्क के माध्यम से राजस्व प्राप्त किया जाता है.
- इन संसाधनों से जुटाई गई राशि का उपयोग पंचायत के विकास कार्यों में किया जाता है.
इस मॉडल से पंचायत को छोटी-छोटी आवश्यकताओं के लिए सरकारी अनुदान का इंतजार नहीं करना पड़ता.
महिला सशक्तिकरण पर भी विशेष फोकस
सिसवा पूर्वी पंचायत ने महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी उल्लेखनीय पहल की है.
यहां एक आधुनिक प्रशिक्षण केंद्र विकसित किया जा रहा है, जहां महिलाओं को सिलाई, बुनाई और कंप्यूटर का प्रशिक्षण दिया जा रहा है.
मुखिया तान्या परवीन का कहना है कि महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता ही पंचायत के समग्र विकास की सबसे मजबूत नींव है.
राष्ट्रीय स्तर पर भी मिल चुकी है पहचान
सिसवा पूर्वी पंचायत के नवाचारों को राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली है.
मुखिया तान्या परवीन को स्वच्छता और बेहतर पंचायत प्रबंधन के लिए नई दिल्ली में राष्ट्रपति और केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय द्वारा सम्मानित किया जा चुका है.
जिला प्रशासन ने भी जिले के अन्य प्रखंड विकास पदाधिकारियों (बीडीओ) को इस पंचायत के मॉडल का अध्ययन करने का निर्देश दिया है.
बनेगी सीखने की प्रयोगशाला
आने वाले दिनों में जब राज्यभर के जनप्रतिनिधि सिसवा पूर्वी पंचायत पहुंचेंगे, तब उन्हें पंचायत के स्व-राजस्व मॉडल, जनभागीदारी, स्वच्छता प्रबंधन और महिला सशक्तिकरण से जुड़े सफल प्रयोगों की विस्तार से जानकारी दी जाएगी. पंचायत को उम्मीद है कि यह मॉडल बिहार के अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में भी आत्मनिर्भर विकास की नई दिशा तय करेगा.
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