मुखिया-उपमुखिया विवाद में फंसीं 9 विकास योजनाएं, अब पुराने वेंडरों की भी होगी जांच

प्रतीकात्मक तस्वीर
ध्रुव लखौरा पंचायत में मुखिया और उपमुखिया के बीच विकास योजनाओं के क्रियान्वयन और भुगतान को लेकर विवाद गहरा गया है. नौ विकास योजनाएं फिलहाल अधर में लटकी हुई हैं. इस मामले में अब पुराने वेंडरों की भी जांच की जाएगी.
Panchayat Dispute: सदर प्रखंड की ध्रुव लखौरा पंचायत में विकास योजनाओं के क्रियान्वयन और भुगतान को लेकर मुखिया एवं उपमुखिया के बीच विवाद गहरा गया है. पंचायत से शुरू हुआ मामला अब प्रखंड और जिला स्तर तक पहुंच चुका है. दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम हैं, जिसके कारण नौ विकास योजनाओं का भुगतान और निष्पादन फिलहाल अधर में लटका हुआ है.
मुखिया के जेल जाने के बाद उपमुखिया को मिला था प्रभार
प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी पुरुषोत्तम वरुणानंद ने बताया कि करीब छह महीने पहले पंचायत के निर्वाचित मुखिया एक मामले में न्यायिक हिरासत में चले गए थे. इसके बाद पंचायत का प्रभार उपमुखिया अमेरिका साहनी को सौंपा गया.
प्रभार अवधि के दौरान नौ विकास योजनाएं स्वीकृत हुईं. इनमें कुछ योजनाओं का कार्य पूरा हो गया, जबकि कुछ अभी अधूरी हैं. बाद में मुखिया के दोबारा कार्यभार संभालने के बाद भुगतान को लेकर विवाद शुरू हो गया.
मुखिया ने भुगतान को बताया नियमसंगत
मुखिया किशोरी साहनी का कहना है कि एक योजना के तहत लगभग 13 लाख रुपये का भुगतान महादेव ट्रेडर्स, नरकटिया को विभागीय नियमों के अनुसार किया गया है.
उन्होंने कहा कि पंचायत योजनाओं में भुगतान सीधे वेंडर के खाते में होता है और सभी प्रक्रियाएं विभागीय नियमों के अनुरूप पूरी की गई हैं.
उपमुखिया बोले- एमबी हो चुकी, फिर भी भुगतान रुका
दूसरी ओर, उपमुखिया अमेरिका साहनी का आरोप है कि उनके प्रभार काल में नौ योजनाओं पर कार्य कराया गया था. इनमें से दो योजनाओं की मापी पुस्तिका (एमबी) विभागीय पोर्टल पर अपलोड हो चुकी है, लेकिन भुगतान रोक दिया गया है.
उन्होंने बताया कि इस संबंध में प्रखंड कार्यालय, जिला पंचायती राज पदाधिकारी, जिलाधिकारी और सहयोग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला है.
पुराने वेंडरों की होगी जांच
प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी पुरुषोत्तम वरुणानंद ने कहा कि महादेव ट्रेडर्स सहित वर्षों से लगातार पंचायतों में कार्य कर रहे वेंडरों की जांच कराई जाएगी.
उन्होंने बताया कि विभागीय नियमों के अनुसार समय-समय पर वेंडर बदलना आवश्यक है, लेकिन कई पंचायतों में लंबे समय से एक ही वेंडर को लगातार काम दिया जा रहा है. रवि एंटरप्राइजेज समेत अन्य पुराने वेंडरों के कार्यों की भी जांच होगी. यदि किसी प्रकार की अनियमितता मिलती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.
स्थानीय वेंडरों को प्राथमिकता देने के नियम पर सवाल
प्रखंड की कई पंचायतों में स्थानीय वेंडरों को प्राथमिकता देने के विभागीय प्रावधान का पालन नहीं होने का मामला भी सामने आया है.
नियम के अनुसार स्थानीय स्तर पर दुकान और गोदाम रखने वाले वेंडरों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए. हालांकि आरोप है कि कुछ सीमित वेंडर वर्षों से लगातार पंचायतों में सामग्री की आपूर्ति कर रहे हैं और केवल कागजी पंजीकरण के आधार पर योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं.
फिलहाल प्रशासन पूरे मामले की जांच कर रहा है. जांच रिपोर्ट आने के बाद भुगतान, वेंडर चयन और अन्य संबंधित मामलों पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.
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लेखक के बारे में
By सामंत कुमार गौतम
सामंत वर्ष 2013 से यानी पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. वाणिज्य (बी.कॉम) और कानून (एलएलबी) स्नातक सामंत को समाचार संकलन, संपादन, कंप्यूटर तकनीक और समाचार प्रबंधन का व्यापक अनुभव है. ये पत्रकारिता के साथ-साथ समाचारों के तकनीकी व प्रबंधकीय कार्यों में विशेष रुचि रखते हैं.
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