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जमीन की उपलब्धता का न्यायाधीश ने किया निरीक्षण

Updated at : 26 Jul 2024 9:42 PM (IST)
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जमीन की उपलब्धता का न्यायाधीश ने किया निरीक्षण

र्वी चंपारण जिले के चकिया,पकड़ीदयाल,रक्सौल व सिकराहना अनुमंडलों में भी अब व्यवहार न्यायालय चलेंगे. इसके लिए प्रशासनिक पहल तेज कर दी गयी है.

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मोतिहारी.पूर्वी चंपारण जिले के चकिया,पकड़ीदयाल,रक्सौल व सिकराहना अनुमंडलों में भी अब व्यवहार न्यायालय चलेंगे. इसके लिए प्रशासनिक पहल तेज कर दी गयी है. शुक्रवार को पटना उच्च न्यायालय के न्यायाधीश व निरीक्षण न्यायाधीश प्रभात कुमार सिंह मोतिहारी पहुंचे और चिन्हित जमीन का निरीक्षण किया. उनके साथ,जिला एवं सत्र न्यायाधीश देवराज त्रिपाठी व डीएम सौरभ जोरवाल ने चकिया, पकड़ीदयाल, सिकरहना एवं रक्सौल अनुमंडल में व्यवहार न्यायालय के लिए 6.5 एकड़ जमीन की उपलब्धता का स्थलीय निरीक्षण किया. चकिया अनुमंडल में कॉलेज के दाहिनी तरफ राष्ट्रीय उच्च पथ से सटे 6.5 एकड़ जमीन चिन्हित किया गया और अनुमंडल पदाधिकारी व डीसीएलआर चकिया को इसका प्रस्ताव बनाकर शीघ्र भेजने का निर्देश दिया गया. व्यवहार न्यायालय के साथ-साथ डिजिटल कोर्ट रूम,अधिवक्ताओं के बैठने की व्यवस्था व न्यायाधीश आवासीय परिसर का निर्माण होगा. इसी तरह पकड़ीदयाल, सिकरहना एवं रक्सौल अनुमंडल में भी अनुमंडलीय व्यवहार न्यायालय के लिए जमीन की उपलब्धता देखी गयी. पकड़ीदयाल में अनुमंडल कार्यालय से 2 किलोमीटर की दूरी पर पकड़ीदयाल-चोरमा के बीच जमीन की उपलब्धता देखी गई और उसका जायजा लिया गया. रक्सौल में अनुमंडल कार्यालय के बगल में ही अवस्थित जमीन का नापी कराने का निर्देश अनुमंडल पदाधिकारी रक्सौल को दिया गया. अनुमंडल कार्यालय परिसर में भी कोर्ट स्थापना को लेकर सकारात्मक दिखे पटना हाईकोर्ट के जज रक्सौल.अनुमंडल में व्यवहार न्यायालय की स्थापना के लिए कम से कम छह एकड़ जमीन की आवश्यकता होगी. इससे कम जमीन होने पर अनुमति नहीं मिलेगी, यदि यहां अनुमंडल कार्यालय परिसर के आसपास सरकार की जमीन है और दो पार्ट मिलाकर भी छह एकड़ जमीन उपलब्ध हो जाती है तो अनुमंडल में कोर्ट की स्थापना हो सकती है. उक्त बातें पटना उच्च न्यायालय के न्यायाधीश सह पूर्वी चंपारण के निरीक्षी न्यायाधीश प्रभात कुमार सिंह ने शुक्रवार को रक्सौल अनुमंडल कार्यालय में भूखंड के निरीक्षण के दौरान अधिकारियों से कहीं. उन्होंने कहा कि यदि प्राइवेट जमीन ली जाती है तो इसमें भारी राजस्व का नुकसान होगा, ऐसे में पहली कोशिश यह होनी चाहिए कि सरकारी जमीन उपलब्ध है तो उसका उपयोग किया जाये. पटना उच्च न्यायालय के न्यायाधीश प्रभात कुमार सिंह शुक्रवार को जिला जज देवराज त्रिपाठी व जिलाधिकारी पूर्वी चंपारण सौरभ जोरवाल के साथ रक्सौल पहुंचे थे. मोतिहारी से रक्सौल पहुंचने पर सभी का स्वागत अनुमंडल पदाधिकारी शिवाक्षी दीक्षित के द्वारा किया गया. इसके बाद अनुमंडल पदाधिकारी के कार्यालय कक्ष में एक छोटी बैठक हुई. जिसके बाद पटना हाईकोर्ट के न्यायाधीश प्रभात कुमार सिंह के द्वारा अनुमंडल कार्यालय के छत से भूखंड का निरीक्षण किया गया. निरीक्षण के क्रम में अनुमंडल पदाधिकारी शिवाक्षी दीक्षित के द्वारा जमीन के संबंध में आवश्यक जानकारी दी गयी. अनुमंडल कार्यालय के दक्षिण और उतर दोनो तरफ मिलाकर कोर्ट के स्थापना की प्लॉनिंग की जा रही है. पटना से आए न्यायाधीश श्री सिंह निरीक्षण के दौरान इस बात को लेकर काफी सकारात्मक दिखे कि यदि यहां अनुमंडल परिसर में ही न्यायालय की स्थापना हो जाती है तो इससे लोगों को काफी सहुलियत होगी. उन्होंने निरीक्षण के दौरान यह निर्देश दिया कि जो भी जमीन है, उसकी पैमाइस करायी जाये. यदि कोर्ट के स्थापना के लिए जमीन की उपलब्धता होती है तो इसकी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाये. निरीक्षण के दौरान कई बार जिला जज श्री त्रिपाठी और जिलाधिकारी सौरभ जोरवाल से भी पटना उच्च न्यायालय के न्यायाधीश श्री सिंह के द्वारा आवश्यक जानकारी ली गयी. निरीक्षण के तुरंत बाद दोनों न्यायाधीश, जिलाधिकारी मोतिहारी लौट गये. निरीक्षण के उपरांत एसडीओ शिवाक्षी दीक्षित ने बताया कि पैमाइस कराने का निर्देश मिला है, जिसके आलोक में आवश्यक कार्रवाई की जा रही है. मौके पर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी धीरेंद्र कुमार, भूमि सुधार उप समहर्ता रश्मि सिंह, अवर निबंधन पदाधिकारी अश्विनी कुमार, प्रखंड विकास पदाधिकारी जयप्रकाश, अंचलाधिकारी शेखर राज, पुलिस निरीक्षक राजीव नंदन सिन्हा सहित अन्य मौजूद थे.

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