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Motihari: लीची बगानों में बढ़ा स्टिंक बग कीड़े का प्रकोप

Updated at : 18 May 2025 4:30 PM (IST)
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Motihari: लीची बगानों में बढ़ा स्टिंक बग कीड़े का प्रकोप

कीड़ें की आक्रमण की शिकायत एक सर्वेक्षण के दौरान मिलने के बाद पौधा संरक्षण विभाग काफी सक्रिय हो गया है.

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Motihari: मोतिहारी. जिले के मेहसी, चकिया और कल्याणपुर प्रखंड के लीची बगानों में स्टिंक बग नामक कीड़ें की आक्रमण की शिकायत एक सर्वेक्षण के दौरान मिलने के बाद पौधा संरक्षण विभाग काफी सक्रिय हो गया है. इसके लिए अधिकारियों द्वारा प्रखंड के किसानों से संपर्क स्थापित कर इस कीड़े पर नियंत्रण को आवश्यक सुझाव आदि दिया जा रहा है. विभाग ने सभी प्रखंड कृषि पदाधिकारी, प्रखंड उद्यान पदाधिकारी, प्रखंड तकनीकी प्रबंधक, कृषि समन्वय तथा सहायक तकनीकी प्रबंध को निर्देश देते हुए कहा कि जिले में सर्वेक्षणों के क्रम में स्टिंक बग नामक कीड़े का प्रकोप बढ़ने की शिकायत आ रही है. ऐसे में किसानों को इसके नियंत्रण हेतु तकनीकी जानकारियां या सुझाव देकर उन्हें सहयोग प्रदान करने में मदद करने का निर्देश दिया गया है. बताया गया है कि फलदार वृक्षों में खास कर लीची के पौधों को विशेष रूप से देखभाल की आवश्यकता होती है. लीची में लगने वाले स्टिंक बग कीट बेहद खतरनाक कीट है, जो समय पर नियंत्रण नहीं होने पर भारी नुकसान पहुंचा सकता है. इस कीट का प्रभाव विगत वर्षों में मुजफ्फरपुर तथा पूर्वी चंपारण जिले के कुछ प्रखंडों में देखा जा रहा है. बताया जाता है कि यह कीट गुलाबी या भूरे रंग का एवं बदबूदार होता है. यह कीट झुंड में हमला करता है. इस कीट के नतजात एवं वयस्क दोनों की पौधों को ज्यादातर पौधे के कोमल हिस्सों जैसे की बढ़ती कलियों, पतियों, पत्तीवृत, पुष्पक्रम, विकसित होते फल, फलों के डंठल और लीची के पेड़ की काेमल शाखाओं से रस चूस कर फसल को प्रभावित करते है. रस चुसने के परिणाम स्वरूप फूल और फल काले होकर गिर जाते है. बताया जाता है कि बगानों में फरवरी से अप्रैल, मई तक यह कीट अधिक सक्रिय रहता है. स्टिंक बग लीची का सबसे बड़ा दुश्मन कीट माना जाता है. कीटनाशक छिड़काव का कीट पर त्वरित नॉकआउट प्रभावित होता है. हालांकि कुछ कीट बाग के एक भी पेड़ पर बच गये तो ये बचे कीट अपनी आबादी उस स्तर पर बढ़ा लेने में सक्षम होते है जो पूरे बाग को संक्रमित करने के लिए पर्याप्त होता है. राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र मुजफ्फरपुर के अनुसार सुबह के समय पेड़ की शाखओं को हल्के झटकों से हिलाएं, ताकि कीट नीचे गिर जाए. गिरे कीटों को इकट्ठा करके मिट्टी में दबा कर नष्ट कर दे. साथ ही नियोक्लोप्रिड, लैडासाथ् हैलेमिन, फिप्रोनिल, प्रोफेनोसोस का छिड़काव प्रत्येक 15 दिनों पर करें. इधर सहायक निदेशक पौधा संरक्षण सुशील कुमार सिंह ने बताया कि स्टिंक बग नामक कीड़ें की आक्रमता की शिकायतें मेहसी, कल्याणपुर व चकिया प्रखंडों से आ रही है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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HIMANSHU KUMAR

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