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एमजीसीयू व एमआइटी में हुआ एमओयू

Updated at : 09 Oct 2024 9:49 PM (IST)
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एमजीसीयू व एमआइटी में हुआ एमओयू

महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय व मुजफ्फरपुर प्रौद्योगिकी संस्थान (एमआइटी), मुजफ्फरपुर ने सहयोग को बढ़ावा देने और ज्ञान साझा करने के उद्देश्य से एमओयू पर हस्ताक्षर किये हैं.

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मोतिहारी.महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय व मुजफ्फरपुर प्रौद्योगिकी संस्थान (एमआइटी), मुजफ्फरपुर ने सहयोग को बढ़ावा देने और ज्ञान साझा करने के उद्देश्य से एमओयू पर हस्ताक्षर किये हैं. यह साझेदारी परस्पर लाभ, सर्वोत्तम प्रयास और बार-बार होने वाले संवाद के आधार पर अकादमिक व अनुसंधान विनिमय को सुविधाजनक बनाने का लक्ष्य रखती है. इस एमओयू के अंतर्गत बौद्धिक ज्ञान व संसाधनों का आदान-प्रदान, नवाचार व उद्यमिता से प्रेरित अवसरों और संसाधनों में साझेदारी, वैज्ञानिक व तकनीकी नेटवर्क व बुनियादी ढांचा संसाधनों का साझा उपयोग, सहयोगी परामर्श व अनुसंधान परियोजनाएं जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग किया जायेगा. एमजीसीयू के कुलपति प्रो संजय श्रीवास्तव ने कहा कि यह एमओयू दोनों संस्थानों के बीच सहयोग व ज्ञान-विनिमय का एक नया अध्याय है, जो अकादमिक उत्कृष्टता और सामाजिक विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं. हमारे बौद्धिक और बुनियादी ढांचा संसाधनों को एकत्रित कर, हम शिक्षा, अनुसंधान और प्रौद्योगिकी में प्रगति को प्रेरित करने वाले नवाचारों की खोज कर सकते हैं.एमओयू पर औपचारिक रूप से एमआइटी मुजफ्फरपुर के प्राचार्य प्रो. मिथिलेश कुमार झा और एमजीसीयू के अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ के निदेशक प्रो. सुनील कुमार श्रीवास्तव ने हस्ताक्षर किए. इस अवसर पर एमजीसीयू के भाषा और मानविकी संकाय के अधिष्ठाता प्रो. प्रसून दत्त सिंह और राजीव गांधी पेट्रोलियम प्रौद्योगिकी संस्थान, अमेठी के पूर्व निदेशक ए.एस.के. सिन्हा भी उपस्थित थे.सहयोग के प्रति अपनी उत्सुकता व्यक्त करते हुए प्रो. सुनील कुमार श्रीवास्तव, निदेशक, अनुसंधान और विकास प्रकोष्ठ, एमजीसीयू ने कहा, “एमआईटी मुजफ्फरपुर के साथ यह साझेदारी सहयोगात्मक अनुसंधान और विकास के नए द्वार खोलती है. हम अपनी ताकतों का उपयोग करके ऐसे प्रभावशाली प्रोजेक्ट्स बनाने का लक्ष्य रखते हैं जो उद्यमिता, नवाचार और क्षेत्रीय शैक्षणिक विकास को प्रोत्साहित करेंगे. एमजीसीयू इस प्रतिष्ठित संस्थान के साथ सहयोग को लेकर उत्साहित है और दोनों विश्वविद्यालयों के शैक्षणिक वातावरण को समृद्ध करने वाली सार्थक विनिमयों की अपेक्षा करता है.यह कदम दोनों संस्थानों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, क्योंकि वे बिहार और देश के बड़े वैज्ञानिक और प्रौद्योगिकीय परिदृश्य में योगदान देने का प्रयास कर रहे हैं.

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