Motihari News: अस्तित्व के संकट में सर्वंगिया मन, 10 किमी से सिमटकर रह गया 2 किमी का ऐतिहासिक जलस्रोत

Published by : Purushottam Kumar Updated At : 10 Jun 2026 2:23 PM

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Motihari News: पूर्वी चंपारण के मधुबन में 10 किलोमीटर में फैला ऐतिहासिक सर्वंगिया मन अतिक्रमण के कारण सिर्फ 2 किलोमीटर में सिमटा. कमल गट्टा और मछली पालन संकट में. डीडीसी समीर सौरभ के निर्देश के बाद भी फाइलों में दबी सौंदर्यीकरण की योजना. जानिए खबर विस्तार से…

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 Motihari News: पूर्वी चंपारण जिले के मधुबन प्रखंड स्थित ऐतिहासिक सर्वंगिया मन का अस्तित्व अब संकट में पड़ता जा रहा है. कभी लगभग 10 किलोमीटर क्षेत्र में फैला यह विशाल जलस्रोत अब प्रशासनिक उदासीनता के कारण सिमटकर महज दो किलोमीटर के दायरे में रह गया है. वर्षों से इसके संरक्षण और विकास की कोई ठोस पहल नहीं होने के कारण इसका क्षेत्रफल लगातार घटता गया है, जिससे स्थानीय पर्यावरण को भी भारी नुकसान पहुंच रहा है.

मछली, सिंचाई और कमल गट्टा व्यवसाय ठप

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, सर्वंगिया मन के लगातार सिकुड़ने से क्षेत्र में मछली उत्पादन, खेतों की सिंचाई व्यवस्था और कमल गट्टा के पारंपरिक व्यवसाय पर बेहद प्रभाव पड़ा है. पूर्व में इस मन के पानी से जुड़े दर्जनों गांवों के हजारों किसानों को सिंचाई की बेहतर सुविधा मिलती थी. इसके साथ ही, बड़ी संख्या में मछुआरा समाज के लोग मछली पालन तथा कमल गट्टा उत्पादन से जुड़े थे, जिससे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती थी और लोगों को घर बैठे रोजगार मिलता था. लेकिन अवैध अतिक्रमण, मुख्य जलस्रोत से संपर्क टूटने और गाद की सफाई न होने के कारण इसकी स्थिति लगातार खराब होती चली गई.

क्षेत्र की अर्थव्यवस्था हुई बदहाल

ग्रामीण बताते हैं कि सर्वंगिया मन में उगने वाला प्राकृतिक कमल और उससे प्राप्त होने वाला कमल गट्टा कभी इस पूरे इलाके की अनूठी पहचान हुआ करता था. इसके अलावा रोहू, कतला, पटैया, झींगा, सिंगी समेत कई प्रकार की स्थानीय स्वादिष्ट मछलियां यहाँ प्रचुर मात्रा में पाई जाती थीं. जलक्षेत्र के सिकुड़ने से अब मछलियों की संख्या में भी काफी गिरावट आ गई है.

गंडक नदी से टूटा मन का संपर्कल

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के अनुसार, बूढ़ी गंडक नदी से जुड़ा यह मन भू-माफियाओं और अतिक्रमणकारियों के अवैध कब्जे के कारण अपने मुख्य जलस्रोत से लगभग पूरी तरह कट चुका है. इससे क्षेत्र में जलभराव और भूजल संरक्षण (वाटर हार्वेस्टिंग) की समस्या भी तेजी से बढ़ी है. ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मन को अविलंब अतिक्रमण मुक्त कराने, नियमित सफाई कराने तथा जल संरक्षण की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है.

जैव विविधता पर मंडराया खतरा

पर्यावरण विशेषज्ञों का भी मानना है कि सर्वंगिया मन स्थानीय जैव विविधता (Biodiversity) और ग्रामीण अर्थव्यवस्था दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. इसके पुनरुद्धार से पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के साथ-साथ क्षेत्र के युवाओं को रोजगार और आजीविका के नए अवसर भी मिल सकते हैं.

सौंदर्यीकरण की योजना फाइलों में सिमटी

सर्वंगिया मन के विकास को लेकर पूर्व में कई सरकारी दावे किए गए, लेकिन वे सभी धरातल पर आने से पहले ही दम तोड़ गए. 26 अप्रैल 2023 को तत्कालीन उप विकास आयुक्त (DDC) समीर सौरभ ने सर्वंगिया मन के सौंदर्यीकरण का कड़ा निर्देश दिया था. उन्होंने मनरेगा के कार्यक्रम पदाधिकारी को विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR) तैयार कर योजना प्रस्तुत करने का आदेश दिया था, लेकिन इस दिशा में आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी.

मनरेगा से महज तीन एकड़ में हुई उड़ाही

दूसरी ओर, स्थानीय स्तर पर आंशिक राहत देने का प्रयास जरूर हुआ है. स्थानीय मुखिया रजिया देवी के निजी प्रयास से मनरेगा योजना के तहत सर्वंगिया मन के लगभग तीन एकड़ क्षेत्र में उड़ाही (गाद सफाई) का कार्य कराया गया. इसका मुख्य उद्देश्य बरसात के दिनों में जल संग्रहण और पानी के स्वाभाविक प्रवाह को बनाए रखना था. इस संबंध में मुखिया प्रतिनिधि धर्मेंद्र सहनी ने बताया कि पंचायत स्तर पर सर्वंगिया मन के विकास, उड़ाही और संरक्षण के लिए जो भी कार्य और बजटीय प्रावधान संभव हैं.

मोतिहारी के मधुबन से शशि चंद्र तिवारी की रिपोर्ट

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