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Motihari : अगले 24 घंटे में तेज हवा के साथ कहीं कही हल्की वर्षा की संभावना

Updated at : 06 May 2025 5:55 PM (IST)
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Motihari : अगले 24 घंटे में तेज हवा के साथ कहीं कही  हल्की वर्षा की संभावना

मौसमीय वेधशाला पूसा के आकलन के अनुसार 7 से 11 मई के बीच उत्तर बिहार के जिलों में आसमान में हल्के से मध्यम बादल देखे जा सकते हैं.

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Motihari : मोतिहारी. मौसमीय वेधशाला पूसा के आकलन के अनुसार 7 से 11 मई के बीच उत्तर बिहार के जिलों में आसमान में हल्के से मध्यम बादल देखे जा सकते हैं. अगले 24 घंटों में गरज वाले बादल बनने के साथ कहीं-कहीं हल्की वर्षा होने की सम्भावना बनी रहेगी. उसके बाद मौसम शुष्क रहने की सम्भावना है. न्यूनतम तापमान 23-26 डिग्री सेल्सियस के आस-पास रह सकता है.

किसानों को समसामयिक सुझाव

अगले 12-24 घंटों में गरज वाले बादल बनने के साथ-साथ वर्षा होने की संभावना को देखते हुए किसान भाइयों को कृषि कार्य में सावधानी बरतने की सलाह दी गयी है. रबी मक्का की कटनी तथा सुखाने का काम सावधानीपूर्वक करें. जिस किसान भाई को कीटनाशकों का छिड़काव करना है वो किसान आसमान साफ रहने पर करें या वर्षा न होने की स्थिति में करें.

15 मई से करें अदरक व हल्दी की बुआई

कुछ दिनों में उत्तर बिहार के जिलों में अच्छी वर्षा हुई है. जिसके चलते खेतों में पर्याप्त नमी आ गयी है, जो बुआई के लिए अनुकूल है. हल्दी की बुआई किसान भाई 15 मई से करें हल्दी की राजेन्द्र सोनिया, राजेन्द्र सोनाली किस्में उत्तर बिहार के लिए अनुशंसित है. खेत की जुताई में 25 से 30 टन गोबर की सड़ी खाद, नेत्रजन 60 से 75 किलोग्राम् स्फूर 50 से 60 किलोग्राम, पोटास 100 से 120 किलोग्राम एवं जिंक सल्फेट 20 से 25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से व्यवहार करें. हल्दी के लिए बीज दर 20 से 25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रखें. इसी तरह अदरक की बुआई 15 मई से करें. अदरक की मरान एवं नदिया किस्में उत्तर बिहार के लिए अनुषसित है. अच्छे उपज के लिए रीडोमिल दवा के 0.2 प्रतिशत घोल से उपचारित बीज की बुआई करें।

उरद व मूंग फसल में मोजैक वायरस से ग्रस्त पौधों को उखार दें.

उरद व मूंग की फसल में पीला मोजैक वायरस से ग्रस्त पौधों को उखार कर नष्ट कर दें. यह रोग सफेद मक्खी द्वारा फैलता है. इसके शुरूआती लक्षण पत्तियों पर पीले धब्बे के रूप दिखाई देता है, बाद में पत्तियों तथा फलियों पूर्ण रूप से पीली हो जाती है। इन पत्तियों पर उत्तक क्षय भी देखा जाता है। फलन काफी प्रभावित होता है.

ओल के गजेन्द्र किस्म की रोपाई संपन्न करें। प्रत्येक 0.5 किलोग्राम के कन्द की रोपनी के लिए दूरी 75×75 से० मी० रखें। 0.5 किलोग्राम से कम वजन की कंद की रोपाई नहीं करे।

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SN SATYARTHI

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By SN SATYARTHI

SN SATYARTHI is a contributor at Prabhat Khabar.

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