सिकरहना-ढाका को संसद में उठी जिला बनाने की मांग

बिहार में पटना के बाद सबसे बड़ा 27 प्रखंड व बड़ी आबादी वाला दूसरा जिला पूर्वी चंपारण है, जो उत्तर में भारत-नेपाल सीमा में जुड़ा है.
मोतिहारी. बिहार में पटना के बाद सबसे बड़ा 27 प्रखंड व बड़ी आबादी वाला दूसरा जिला पूर्वी चंपारण है, जो उत्तर में भारत-नेपाल सीमा में जुड़ा है, जहां विकास व देश की आंतरिक सुरक्षा को ले पूर्व में भी पूर्वी चंपारण को दो भागों में बांटकर जिला बनाने की मांग उठी थी. जहां शिवहर सांसद लवली आनंद ने संसद में ढाका को नये सिरे से जिला बनाने की मांग की है. कहा है कि इससे सिकरहना, पकड़ीदयाल अनुमंडल के विकास को गति मिलेगी. 90 के दशक में सिकरहना को जिला बनाने की मांग उठी थी, जहां तत्कालीन विधायक अवनिश कुमार सिंह ने शिकारगंज व कुंडवा चैनपुर को प्रखंड बनाने व सिकरहना को जिला बनाने की मांग सदन में की थी. उस समय सिकरहना अनुमंडल के पांच प्रखंड के अलावा रक्सौल व पकड़ीदयाल अनुमंडल को शामिल करने की बात थी. फिर 2010 के दशक में भारत-नेपाल सीमावर्ती रक्सौल को जिला बनाने की मांग उठी. तर्क दिया गया कि यह नेपाल सीमा से सटा है, सुरक्षा की दृष्टि से जिला बनाना महत्वपूर्ण है. इसको ले तिरहुत के आयुक्त द्वारा प्रस्ताव भी मांगा गया था, जो ठंडे बस्ते में चला गया. इधर सिकरहना अनुमंडल मुख्यालय ढाका को सांसद द्वारा जिला बनाने की मांग को राजनीतिक सरगमी बढ़ गयी है. जानकारों का कहना है कि सिकरहना में कुंडवा चैनपुर व शिकारगंज प्रखंड प्रस्तावित है, अगर बन जाता है तो सिकरहना के सात प्रखंड व पकड़ीदयाल के करीब पांच प्रखंड मिलाकर ढाका जिला बनाने की शर्तों को पूरा करता है. दूसरा महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि नेपाल सीमा के अलावा शिवहर व सीतामढ़ी जिले के साथ मुजफ्फरपुर जिले से भी जुड़ा है. पूर्व में नक्सली गतिविधियों के कारण विकास के मामले में पिछड़ा गया था, जहां ढाका को जिला का दर्जा मिलने से विकास को नयी गति मिलेगी.
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