शंकराचार्य की जन्मस्थली मधुबनी में लिंगराज के तर्ज पर बन रहा मनसा देवी मंदिर, जानें कब पूरा होगा निर्माण

पिछले तीन दशकों से पूर्वाम्नाय गोवर्द्धन मठ पुरी पीठ के शंकराचार्य पद पर आसीन स्वामी निश्चलानंद सरस्वती की जन्मस्थली मधुबनी जिले के हरिपुर बख्शी टोल में मनसा देवी मंदिर का ढांचा तैयार हो गया है.
पटना. पिछले तीन दशकों से पूर्वाम्नाय गोवर्द्धन मठ पुरी पीठ के शंकराचार्य पद पर आसीन स्वामी निश्चलानंद सरस्वती की जन्मस्थली मधुबनी जिले के हरिपुर बख्शी टोल में मनसा देवी मंदिर का ढांचा तैयार हो गया है.
जगद्गुरु शंकराचार्य की इच्छा से बन रहे विषहरा माता के इस मंदिर का गर्भगृह बनकर तैयार हो गया है. 70 फुट लंबे और 33 फुट चौड़ाई वाले निर्माणाधीन मंदिर के गर्भगृह की मुख्य खासियत यह है कि इसे लाल ईंटों से तराश कर बनाया गया है.
भुवनेश्वर के लिंगराज मंदिर के तर्ज पर यह मंदिर ओड़िशा शैली में बनाया जा रहा है. मंदिर में कुल 20 पिलर हैं. 24 फरवरी, 2021 से ओड़िशा के कारीगर तीन-रात मंदिर निर्माण में जुटे हुए हैं. मंदिर का 59 फुट ऊंचा मुख्य गुंबद बनकर तैयार हो गया है. 35 फुट ऊंचाई का दूसरा गुंबद अगले एक सप्ताह में तैयार हो जायेगा.
मंदिर का निर्माण कराने वाली संस्था शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट की संस्थापक सचिव प्रोफेसर इंदिरा झा ने बताया कि अप्रैल, 2023 तक मंदिर पूरी तरह बनकर तैयार हो जायेगा. गोवर्द्धन मठ, पुरी के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती स्वयं इसका उद्घाटन करेंगे. 17 वर्ष की अवस्था में अपनी जन्मभूमि छोड़कर संन्यास लेने के बाद जगद्गुरु पहली बार अपनी जन्मभूमि में आयेंगे.
प्रो डॉ इंदिरा झा ने बताया कि हरिद्वार के मनसा देवी मंदिर में स्थापित प्रतिमा की तरह ही इस मंदिर में मनसा माता की प्रतिमा स्थापित होगी. हरिपुर बख्शी टोल के सती माई स्थान की ठीक बगल में मनसा देवी मंदिर का निर्माण हो रहा है. सती माई स्थान लगभग 350 वर्ष पुराना बताया जाता है.
पुरी शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती इसे सिद्ध पीठ मानते हैं. उन्होंने कई अवसरों पर हरिपुर बख्शी टोल के सती माई स्थान (महारानी राघव प्रिया की समाधि ) का जिक्र करते हुए कहा है कि उनको उसी स्थान में सिद्धि प्राप्त हुई और सती माता का आशीर्वाद उनके साथ हमेशा बना हुआ है. मंदिर के पास लगभग 15 एकड़ क्षेत्रफल का सतियार पोखर भी है.
मनसा देवी मंदिर के दोनों गुंबदों पर ओड़िशा के कारीगर आठ शेरों की कलाकृति बनायेंगे, जबकि मंदिर के प्रवेश द्वार और मुख्य पिलरों पर भी कुल नाै शेरों की कलाकृति बनेगी. इस प्रकार 17 शेर कलाकृति के रूप में मनसा देवी मंदिर की शोभा बढ़ायेंगे, जबकि अन्य पशु-पक्षियों और प्राकृतिक स्वरूपों की 12 कलाकृतियां बिहार में ओड़िशा वास्तुकला की झांकी प्रस्तुत करेंगे.
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By Prabhat Khabar News Desk
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