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Madhubani News : सीता नवमी हमारे मूल्यों, नारी गरिमा और सांस्कृतिक चेतना का स्मरण दिवस : संजय झा

Updated at : 07 May 2025 10:09 PM (IST)
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Madhubani News : सीता नवमी हमारे मूल्यों, नारी गरिमा और सांस्कृतिक चेतना का स्मरण दिवस : संजय झा

राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा ने कहा कि माता सीता भारतीय नारी शक्ति, त्याग, धैर्य और मर्यादा की प्रतीक है

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मधुबनी. सीता नवमी पर आयोजित वैदेही उत्सव में राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा ने कहा कि माता सीता भारतीय नारी शक्ति, त्याग, धैर्य और मर्यादा की प्रतीक है. उन्होंने कहा कि वैदिक काल से ही माता सीता का उल्लेख पृथ्वी और उर्वरता की अधिष्ठात्री देवी के रूप में मिलता है, जो यह दर्शाता है कि उनका स्थान केवल एक धार्मिक चरित्र तक सीमित नहीं है, बल्कि वे भारतीय सभ्यता की मूल आत्मा से जुड़ी हुई हैं. राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा ने मिथिला की संस्कृति और परंपरा को विश्वपटल पर ले जाने के लिए व्यापक प्रयासों की आवश्यकता पर भी बल दिया. कहा कि सीता नवमी केवल एक धार्मिक अवसर नहीं है, बल्कि यह हमारे मूल्यों, नारी गरिमा और सांस्कृतिक चेतना का स्मरण दिवस है. हमें गर्व है कि मिथिला जैसी भूमि ने ऐसी दिव्य और प्रेरणादायी शक्ति को जन्म दिया. जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष, संजय कुमार झा नई दिल्ली में मधुबनी लिटेरचर फेस्टिवल और सेंटर फॉर स्टडीज ऑफ टेडिशन एंड सिस्टम्स की ओर से आयोजित वैदेही उत्सव में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे. उल्लेखनीय है कि बीते कुछ वर्षों से सेंटर फॉर स्टडीज ऑफ टेडिशन एंड सिस्टम्स की निदेशक डॉ सविता झा सीता नवमी के अवसर पर वैदेही उत्सव पर कई सत्रों में कार्यक्रम और मधुबनी पेंटिंग्स की प्रदर्शनी का आयोजन करती आ रही है. इसमें मिथिला की कलाकारों की पेंटिंग्स मुख्यतः जगत जननी मां सीता पर ही केंद्रित रहती हैं. इस बार भी दर्जनों कलाकारों ने अपनी पेंटिंग्स लगाई हुई हैं. वैदेही उत्सव में मंथन सत्र के दौरान प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ अनामिका ने कहा कि ज्ञान की सीढ़ी चढ़ते चढ़ते व्यक्ति संज्ञान तक पहुंचता है. अहं से वयं तक की यात्रा में वैदेही प्रज्ञावान दिखती हैं, क्योंकि उनमें धैर्य है. सीएसटीएस की निदेशक डॉ सविता झा के अनुसार, सीता का स्वरुप, जिन्हें रामायण में भगवान राम की पत्नी के रूप में व्यापक रुप से पूजनीय माना जाता है, उनके महाकाव्य रुप से भी पहले का है और उनका उल्लेख वैदिक साहित्य में मिलता है. ऋग्वेद में सीता का एक प्रारंभिक संदर्भ मिलता है. विशेष रूप से मंडल 4, सूक्त 57 के मंत्र 6 और 7 में — जहां उन्हें रानी या पत्नी नहीं, बल्कि उर्वरता और कृषि की अधिष्ठात्री देवी तथा पृथ्वी की साक्षात स्वरुपिणी के रूप में प्रस्तुत किया गया है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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GAJENDRA KUMAR

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By GAJENDRA KUMAR

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