Madhubani News : प्रसव के 48 घंटे में मिलेगी जननी बाल सुरक्षा योजना की राशि

Published by : GAJENDRA KUMAR Updated At : 03 Sep 2025 10:45 PM

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महिलाओं व नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य सुरक्षित करने की दिशा में सरकार ने जननी बाल सुरक्षा योजना को सशक्त बनाने की पहल शुरू की है.

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मधुबनी.

महिलाओं व नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य सुरक्षित करने की दिशा में सरकार ने जननी बाल सुरक्षा योजना को सशक्त बनाने की पहल शुरू की है. इस योजना के तहत प्रसव के बाद मिलने वाली प्रोत्साहन राशि सीधे डीबीटी पोर्टल के माध्यम से लाभार्थियों के खाते में जाएगी. इसके लिए 48 घंटे का समय निर्धारित किया गया है.

ग्रामीण व शहरी महिलाओं को मिलता है लाभ

स्वास्थ्य विभाग की ओर से संचालित इस योजना के तहत ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों की महिलाओं को संस्थागत प्रसव कराने पर आर्थिक सहायता दी जाती है. इसमें ग्रामीण क्षेत्रों की लाभार्थी महिलाओं को 1 हजार 400 रुपये व शहरी क्षेत्रों की महिलाओं को 1 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है. पहले यह राशि लाभुकों तक पहुंचने में समय लगता था, लेकिन अब डीबीटी की सुविधा से यह कार्य बेहद आसान और त्वरित हो जाएगी.

डिजिटल बदलाव से पारदर्शिता

डीबीटी पोर्टल से राशि सीधे खाते में जाने से अब बिचौलियों की भूमिका पूरी तरह खत्म हो गई है. इससे न केवल भुगतान की प्रक्रिया तेज होगी बल्कि पारदर्शिता भी सुनिश्चित होगी. स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि इस बदलाव से महिलाओं का संस्थागत प्रसव के प्रति और अधिक भरोसा बढ़ेगा.

जननी बाल सुरक्षा योजना में पहले भुगतान में कई माह लग जाता था. वहीं, अब 48 घंटे के अंदर राशि उपलब्ध होने से गर्भवती और प्रसूता महिलाओं को त्वरित आर्थिक मदद मिल रही है. यह सहायता प्रसव के बाद मां और शिशु की देखभाल में काफी उपयोगी साबित हो रहा है. योजना का लाभ पाने के लिए गर्भवती महिलाओं को आशा कार्यकर्ता की मदद से सरकारी अस्पतालों में पंजीकरण कराना अनिवार्य है. प्रसव के बाद आशा कार्यकर्ता की रिपोर्टिंग और सत्यापन के बाद लाभार्थी के खाते में राशि भेज दी जाती है.

सिविल सर्जन डॉ. हरेंद्र कुमार ने कहा कि यह पहल महिलाओं को संस्थागत प्रसव के लिए प्रेरित करेगी. ग्रामीण इलाकों में सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करने में मददगार साबित होगा. इससे मातृ-शिशु मृत्यु दर में निश्चित तौर पर कमी आएगी. पहले राशि मिलने में हफ्तों लग जाता था, लेकिन अब 48 घंटे के अंदर राशि सीधे खाते में चला जाता है. इससे महिलाओं का विश्वास सरकारी अस्पतालों पर बढ़ा है. इसके कारण संस्थागत प्रसव की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है. उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य है कि जिले में कोई भी महिला घर पर प्रसव करने को मजबूर न हो. आशा कार्यकर्ता और स्वास्थ्य कर्मियों की मदद से हर महिला को सरकारी अस्पताल में सुरक्षित प्रसव के लिए प्रेरित किया जा रहा है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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