पइन का जीर्णोद्धार बना गांवों के लिए नई उम्मीद

जिले में बिहार सरकार की जल-जीवन-हरियाली योजना अब कागज़ से निकलकर ज़मीन पर साफ दिखाई देने लगी है.
गांव में लौट रही हरियाली और जैव विविधता
मधुबनी में 78 पइन का कराया गया जीर्णोद्धारजल जीवन हरियाली योजना का मधुबनी में दिख रहा असर
मधुबनी . जिले में बिहार सरकार की जल-जीवन-हरियाली योजना अब कागज़ से निकलकर ज़मीन पर साफ दिखाई देने लगी है. वर्षों से उपेक्षित पड़ी पारंपरिक जल संरचनाएं-पईन, आहर और तालाब फिर से जीवंत हो रही हैं. इसी कड़ी में जिले के कई प्रखंडों में कराए गए पईन (पीईएन) के जीर्णोद्धार ने किसानों और ग्रामीणों के जीवन में सकारात्मक बदलाव की कहानी लिखनी शुरू कर दी है. विदित हो कि मधुबनी में वित्तीय वर्ष 2025-26 में 48 पईन जीर्णोद्धार का लक्ष्य निर्धारित किया गया था. लेकिन 92 पर कार्य शुरू कराया गया. इनमें से 78 पईन का जीर्णोद्धार कार्य पूरा करा लिया गया है. बतादें कि कभी बरसात में पानी का बह जाना और गर्मी में खेतों का सूख जाना आम बात थी. पईनों में सिल्ट जमने और अतिक्रमण के कारण सिंचाई व्यवस्था लगभग ठप हो चुकी थी. लेकिन अब जल-जीवन-हरियाली योजना के तहत सफाई, खुदाई, गहरीकरण और किनारों का सुदृढ़ीकरण कराया गया है. नतीजा यह हुआ कि बरसाती पानी का स्थायी भंडारण होने लगा और आसपास के खेतों तक पानी की पहुंच आसान हो गई है. गांवों में हरियाली लौटते ही पक्षियों की चहचहाहट फिर सुनाई देने लगी है. गौरैया, तोता, मैना, बगुला और कई जलपक्षी तालाबों और पईनों के किनारे दिखने लगे हैं. मेंढक, मछलियां और कीट-पतंगे बढ़े तो प्राकृतिक खाद्य श्रृंखला भी संतुलित हुई है. इससे रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता भी कम होने लगी है.भूजल स्तर में सुधार से हैंडपंप और कुएं भी दे रहे पानी
पईन के पुनर्जीवित होते ही रबी और खरीफ दोनों मौसमों में फसल का रकबा बढ़ा है. जिन खेतों में पहले एक ही फसल मुश्किल से होती थी, वहां अब समय पर सिंचाई से पैदावार बेहतर हो रही है. गांवों में बहती पईन सिर्फ पानी नहीं ला रही. वह आत्मनिर्भरता, समृद्धि और भविष्य की सुरक्षा का संदेश भी दे रही है. जहां बरसों से पानी की कमी थी, वहां अब हैंडपंपों और नल-जल से राहत मिली है. सिंचाई आसान हुई तो खेतों में धान, गेहूं और सब्ज़ियों की फसलें लहलहाने लगीं. पशुपालन को पानी और गांव की अर्थव्यवस्था को भी मिला संबल इस अभियान की खास बात यह रही कि सामुदायिक भागीदारी, ग्रामीणों, पंचायत प्रतिनिधियों और मनरेगा श्रमिकों ने मिलकर पईनों की सफाई में योगदान दिया. कहीं-कहीं स्कूल के बच्चों और स्वयंसेवी समूहों ने पौधारोपण कर किनारों को हरा-भरा बनाया. इससे न केवल जल संरक्षण हुआ, बल्कि हरियाली और जैव विविधता भी लौटी. वहीं प्रशासनिक स्तर पर भी निगरानी और पारदर्शिता पर जोर दिया गया. यही वजह है कि मधुबनी में पईन का जीर्णोद्धार स्थायी समाधान की ओर कदम बढ़ा है. गांव में लौट रही हरियाली और जैव विविधताकभी सूखे और वीरान से दिखने वाले गांव अब फिर से हरियाली की चादर ओढ़ने लगे हैं. जल संरक्षण और सामूहिक प्रयासों के चलते खेत-खलिहान, मेड़, पईन और तालाबों के आसपास जीवन की हलचल बढ़ गई है. बरसात का पानी अब बेकार बह नहीं जाता, बल्कि जमीन में समाकर भूजल स्तर को मजबूत कर रहा है. पानी की उपलब्धता बढ़ते ही पेड़-पौधों ने नई सांस ली. नीम, पीपल, बरगद, आम और जामुन जैसे देसी वृक्षों के साथ-साथ घास और झाड़ियां पनपने लगी हैं. इससे जहां मिट्टी का कटाव रुका है, वहीं खेतों की उर्वरता बढ़ी और वातावरण ठंडा हुआ है.
जल-जीवन-हरियाली : गांव में दिख रहा बदलाव
कभी प्यास से कराहती धरती और सूनी आंखों वाले खेत. आज वही गांव हरियाली की चादर ओढ़े मुस्कुरा रहा है. जल-जीवन-हरियाली अभियान ने गांव की तस्वीर ही बदल दी है. तालाबों की गहराई बढ़ी, पईन-आहर में फिर से पानी उतरा और हर आंगन तक जीवन की धारा पहुंच गई. जल-जीवन-हरियाली योजना के तहत हुआ यह प्रयास बताता है कि यदि परंपरा और तकनीक साथ चलें, तो गांवों की तस्वीर बदली जा सकती है. क्या कहते हैं अधिकारी परियोजना पदाधिकारी सह निदेशक राष्ट्रीय नियोजन कार्यक्रम राघवेंद्र कुमार ने कहा कि जल-जीवन-हरियाली योजना के तहत वित्तीय वर्ष में 78 पईन (पीईएन) का सफल जीर्णोद्धार कराया गया है. वर्षों से गाद, झाड़-झंखाड़ और अतिक्रमण के कारण बेकार हो चुकी ये पारंपरिक जलधाराएं अब फिर से बहने लगी हैं. इसका सीधा असर सिंचाई, भूजल स्तर और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी दिख रहा है. जीर्णोद्धार के दौरान पईनों की सफाई, खुदाई, गहरीकरण और किनारों का सुदृढ़ीकरण किया गया है.प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी
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