Madhubani News : मधुबनी.
जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के दावों के विपरीत सदर अस्पताल की जमीनी हकीकत आज भी जस की तस बनी हुई है. ताजा मामला स्वास्थ्य विभाग की संवेदनहीनता और कुव्यवस्था को उजागर करता है, जहां एक गर्भवती महिला को अस्पताल से इसलिए लौटना पड़ा क्योंकि वहां ड्यूटी पर कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था. डीएम आनंद शर्मा और सिविल सर्जन डॉ. हरेंद्र कुमार के सख्त निर्देश भी अस्पताल के लापरवाह कर्मियों के सामने बौने साबित हो रहे हैं.क्या है पूरा
मामला.
सीतामढ़ी जिले के नरहा निवासी धीरेंद्र झा की 25 वर्षीय पुत्री को उनके पति चंदन कुमार झा ने प्रसव पीड़ा के बाद गुरुवार को सदर अस्पताल के स्त्री एवं प्रसूति विभाग में भर्ती कराया था. आरोप है कि उस समय प्रसव कक्ष में कोई महिला चिकित्सक उपलब्ध नहीं थी, केवल दो जीएनएम ड्यूटी पर थीं. जीएनएम ने जांच के बाद मरीज को सिजेरियन ऑपरेशन की जरूरत बताई, लेकिन साथ ही यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि रात 8 बजे के बाद ऑपरेशन नहीं होगा और फिलहाल डॉक्टर भी नहीं हैं. उन्होंने मरीज को अगले दिन आने की सलाह दे डाली.मजबूरी में उठाना पड़ा निजी अस्पताल का खर्च :
पीड़ित चंदन कुमार झा ने बताया कि प्रसव कक्ष में तैनात कर्मियों का व्यवहार बेहद निराशाजनक और असहयोगात्मक था. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उन्हें मजबूरी में अपनी पत्नी को निजी नर्सिंग होम ले जाना पड़ा, जहां सिजेरियन के जरिए उनकी पुत्री का जन्म हुआ. श्री झा ने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि सरकारी व्यवस्था पर भरोसा करना उन्हें महंगा पड़ा और अब वे भारी भरकम मेडिकल बिल के कारण आर्थिक तंगी झेल रहे हैं.हवा-हवाई साबित हुए निर्देश :
सिविल सर्जन ने स्पष्ट निर्देश दिया था कि रात में भी प्रसव कक्ष में डॉक्टर की तैनाती और ऑपरेशन की सुविधा रहेगी, लेकिन यह आदेश केवल कागजों तक सीमित रह गया. इस मामले पर डीपीएम पंकज कुमार मिश्रा ने कहा कि यह एक गंभीर विषय है. उन्होंने जांच कर दोषी कर्मियों पर सख्त कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है. फिलहाल, अस्पताल प्रबंधन की इस लापरवाही ने गरीब मरीजों के प्रति सरकारी संवेदनहीनता की पोल खोल दी है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

