Madhubani News : निमोनिया से बचाव के लिए एमओआइसी को मिला प्रशिक्षण

Published at :15 Feb 2025 10:48 PM (IST)
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Madhubani News : निमोनिया से बचाव के लिए एमओआइसी को मिला प्रशिक्षण

बच्चों में निमोनिया व उससे होने वाली जटिलताओं के प्रति जागरूक करने के लिए जिले में सांस अभियान का आयोजन किया जा रहा है.

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मधुबनी.

स्वास्थ्य विभाग 5 साल तक के बच्चों में निमोनिया व उससे होने वाली जटिलताओं के प्रति जागरूक करने के लिए जिले में सांस अभियान का आयोजन किया जा रहा है. यह मुहिम 28 फरवरी तक चलेगी. इसी कड़ी में अभियान के सफल क्रियान्वयन को लेकर शनिवार को पीकू हाल में जिले के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया. प्रशिक्षण सदर अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. विवेकानंद पॉल ने दी. प्रशिक्षक ने बच्चों में होने वाली निमोनिया व उसके चिकित्सीय प्रबंधन के संबंध में चिकित्सा पदाधिकारियों को विस्तार से जानकारी दी. डॉ. पॉल ने कहा कि बच्चों में होने वाली निमोनिया के प्रबंधन के लिए नवंबर 2019 में सांस सोशल अवरनेस एंड एक्शन टू न्यूट्रलाइज पीनोम्यूनिया सक्सेसफ़ुली (सांस) कार्यक्रम की शुरुआत की गयी थी.

यह अभियान हर साल जिले में चलाया जाता है. प्रभारी सिविल सर्जन एसएन झा ने कहा है कि सांस अभियान के तहत 0 से 5 वर्ष तक की आयु के सभी बच्चों की निमोनिया के लिए स्क्रीनिंग, चिकित्सा अधिकारियों व नर्सिंग अधिकारियों को निमोनिया स्किल लैब प्रशिक्षण, चिकित्सा संस्थानों पर प्रचार सामग्री प्रदर्शन, आवश्यक दवाओं की उपलब्धता, निमोनिया के लक्षणों की पहचान व प्रबंधन के लिए उन्मुखीकरण किया जा रहा है. जिला सामुदायिक उत्प्रेरक नवीन दास ने कहा कि अभियान के मुख्य घटक पीपीटी यानि प्रिवेंट, प्रोटेक्ट व ट्रीट रणनीति को अपनाते हुए पीसीवी वैक्सीन के तीनों डोज लगाना सुनिश्चित किया जा रहा है. साथ ही पीएचसी, सीएचसी व जिला अस्पतालों में निमोनिया से ग्रसित बच्चों के लिए बेड रिजर्व रखे जा रहे हैं. यहां निमोनिया व गंभीर निमोनिया का प्रोटोकॉल अनुरूप उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है. प्रशिक्षण शिविर में प्रभारी सीएस डा. एसएन झा, डीसीएम नवीन दास, प्रशिक्षित डा. विवेकानंद पाल सहित सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी मौजूद थे.

निमोनिया के लक्षण वाले बच्चों होंगे

समुदाय स्तर पर आशा द्वारा नियमित भ्रमण कर बच्चों में निमोनिया के लक्षणों, खांसी, बलगम, तेज सांस, पसलियां चलना व सांस लेने में परेशानी होना आदि लक्षणों के आधार पर पहचान करने का निर्देश दिया गया है. ऐसे बच्चों का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर इलाज कराने के लिए परिजनों को प्रेरित करने का निर्देश दिया गया. इसके साथ ही गंभीर स्थिति होने पर उच्चतर संस्थान में रेफर करने का निर्देश दिया गया. इसके अलावा जिले के चिकित्सा संस्थानों पर निमोनिया संबंधी प्रचार-प्रसार सामग्री का भी वितरण किया जाएगा.

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