Madhubani News : नगर निगम का सख्त रुख : दुकानों का 1.21 करोड़ किराया बकाया, अवैध कब्जेदारों पर गिरेगी गाज

Published by : GAJENDRA KUMAR Updated At : 18 Jan 2026 10:19 PM

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नगर निगम क्षेत्र में राजस्व वसूली की सुस्त रफ्तार को देखते हुए प्रशासन ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है.

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Madhubani News : मधुबनी.

नगर निगम क्षेत्र में राजस्व वसूली की सुस्त रफ्तार को देखते हुए प्रशासन ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है. शहर में नगर निगम की आवंटित दुकानों पर किराये का बोझ बढ़ता जा रहा है और अब तक कुल 1.21 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया लंबित है. नगर निगम अब ऐसे दुकानदारों की सूची तैयार कर रहा है, जिन्होंने लंबे समय से किराया नहीं चुकाया है. निगम ने स्पष्ट कर दिया है कि बकाया वसूली के साथ-साथ नियमों का उल्लंघन करने वालों का एकरारनामा भी रद्द किया जाएगा.

राजस्व वसूली की निराशाजनक स्थिति

नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार, शहर में कुल 230 दुकानें हैं जिनसे सालाना लगभग 47 लाख रुपये राजस्व की उम्मीद रहती है. हालांकि, चालू वित्तीय वर्ष की तीसरी तिमाही तक की रिपोर्ट बेहद निराशाजनक है. अब तक लक्ष्य का मात्र 15.17 प्रतिशत यानी केवल 21,68,301 रुपये ही वसूल हो पाए हैं. जबकि निगम को बाजार किराये के रूप में कुल 1,42,87,021 रुपये (पुराना अवशेष 95.85 लाख चालू वर्ष की मांग 47 लाख) वसूल करने हैं. बकाया राशि का यह आंकड़ा सवा करोड़ के पार पहुंचने से निगम की विकास योजनाओं पर भी असर पड़ रहा है.

किरायेदार कोई और, दुकान चला रहा कोई और

जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि कई दुकानें आवंटित किसी और के नाम पर हैं, लेकिन उन्हें नियम विरुद्ध तरीके से दूसरे व्यक्तियों को ऊंचे किराये पर दे दिया गया है. निगम का किराया महज 3 से 10 रुपये प्रति वर्ग फीट है, जिसका फायदा उठाकर मूल आवंटित व्यक्ति दूसरों से अधिक मुनाफा कमा रहे हैं. इसके अलावा, एक ही परिवार के कई सदस्यों के नाम पर दुकानें आवंटित होने की भी शिकायतें मिली हैं.

बाजारों की स्थिति और कार्रवाई की तैयारी

नगर निगम की दुकानें प्रमुख रूप से गिलेशन मार्केट (149), पालिका बाजार (26), अशोक बाजार (20) और अन्य महत्वपूर्ण चौराहों पर स्थित हैं. मेयर अरुण राय ने इस संबंध में संबंधित कर्मियों को वसूली में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने कहा कि जो दुकानदार समय पर किराया नहीं दे रहे हैं, उनकी सूची मिलते ही उन पर विधिवत कार्रवाई की जाएगी. साथ ही, आवंटित दुकानों की नए सिरे से फिजिकल वेरिफिकेशन (जांच) कराई जाएगी ताकि अवैध रूप से काबिज लोगों को हटाया जा सके.

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