मधुबनी.
अकादमी एवं हिंदी साहित्य समिति मधुबनी के संयुक्त तत्वावधान में ब्रहमदेव चंद्रकला परिसर में ””””गांधी एवं हिंदी विषय पर परिचर्चा व काव्य पाठ का आयोजन गुरुवार को किया गया. परिचर्चा के प्रथम सत्र का विषय प्रवेश कराते हुए डॉ. नरेंद्र नारायण सिंह निराला ने कहा कि गांधी अक्सर कहते थे कि यदि भारत को एक राष्ट्र बनाना है तो हिंदी को राष्ट्रभाषा स्वीकार करना होगा. गांधी के इस निर्णय का प्रभाव पड़ा और पूरा देश एक सूत्र में बंधे गये. पंकज सत्यम ने कहा कि गांधी के प्रयासों से हिंदी राजभाषा के रूप में स्थापित हुई. उदय जायसवाल ने कहा कि हिंदी सभी विधाओं पर गांधी का प्रभाव पड़ा है. डॉ. विभा कुमारी ने कहा कि गांधी और हिंदी में अन्योनाश्रय का संबंध है. डॉ. दीपक त्रिपाठी ने कहा कि गांधी से पूर्व हिंदी का राजनैतिक महत्व इस रूप में नहीं था. अरविंद प्रसाद ने कहा कि हिंदी भाषा को प्रतिष्ठित करने में गांधी का योगदान अतुलनीय है. संचालन के क्रम में ज्योतिरमण झा ने कहा कि गांधी ने हिंदी के माध्यम से भारत को मजबूत किया. डॉ. निवेदिता कुमारी ने कहा कि गांधी ने हिंदी के जरिये संपूर्ण देश को एक सूत्र में बांधकर स्वतंत्रता आंदोलन को मजबूती प्रदान की. भोलानंद झा ने हिंदी को आंदोलन का हथियार बताया. दयानंद झा ने कहा कि गांधी ने हिंदी को आकार दिया. डॉ. एस बालक ने कहा कि गांधी के प्रयास से हिंदी का प्रभाव साहित्य एवं फिल्मों दोनों पर पड़ा. इंगलैंड की फिल्म गांधी एवं सुभाष घई की फिल्म ””””गांधीः ए पर्सपेक्टिव”””” के जरिए अभिनेता मनोज वाजपेयी बापू के सिद्धांतों को बताया है. डॉ. शुभकुमार वर्णवाल ने कहा कि गांधी और हिंदी में अन्योन्याश्रय संबंध है. शुकदेव राउत ने कहा कि हिंदी के विकास एवं देश में इस भाषा को स्थापित करने में गांधी का महती योगदान है. संगोष्ठी में डॉ. प्रतिमा कुमारी, स्नेहलता कुमारी, डॉ. शिवकुमार पासवान भी शामिल हुए. सभी बुद्धिजीवियों एवं साहित्यकारों ने दूसरे सत्र में काव्य पाठ किया.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

