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हर दिन स्वास्थ्य संस्थानों को टीबी के 10 संदिग्ध मरीज की करें जांच

Updated at : 21 Aug 2024 10:02 PM (IST)
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हर दिन स्वास्थ्य संस्थानों को टीबी के 10 संदिग्ध मरीज की करें जांच

सरकार द्वारा वर्ष 2025 तक टीबी मुक्त भारत द्वारा लिये गये संकल्प को पूरा करने के लिए स्वास्थ्य विभाग लगातार नई नीति तैयार कर उसे लागू कर रही है.

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मधुबनी . सरकार द्वारा वर्ष 2025 तक टीबी मुक्त भारत द्वारा लिये गये संकल्प को पूरा करने के लिए स्वास्थ्य विभाग लगातार नई नीति तैयार कर उसे लागू कर रही है. इस कड़ी में टीबी मुक्त अभियान के लिए स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से माइक्रो प्लान तैयार करने, प्रतिदिन टीबी के 10 संदिग्ध मरीज की जांच करने का निर्देश दिया है. गाइडलाइन के अनुसार प्रति एक लाख आबादी पर 2000 लोगों की जांच निर्धारित की गयी है. विदित हो की जांच में तेजी लाने के लिए जिले के 22 स्वास्थ्य संस्थानों में स्पुटम माइक्रोस्कोपी, 16 स्वास्थ्य संस्थानों में ट्रूनेट मशीन लगाया गया है. वहीं सदर अस्पताल एवं अनुमंडलीय अस्पताल झंझारपुर में 1-1 सीबी-नट मशीन लगाया गया है. जबकि सदर अस्पताल स्थित एआरटी सेंटर में स्थापित सीबी-नट मशीन को मधुबनी मेडिकल कालेज को हस्तांतरित करने की प्रक्रिया जारी है. बढ़ाया जाएगा टीबी नोटिफिकेशन सीडीओ डॉ जीएम ठाकुर ने कहा है कि टीबी संक्रमण दर को कम करने के लिए अधिक से अधिक टीबी मरीजों का नोटिफिकेशन करने की जरूरत है. इसके लिए एसीएस ने टीबी नोटिफिकेशन टारगेट को 90 प्रतिशत करने का निर्देश दिया गया है. डॉ. ठाकुर ने कहा कि विभाग द्वारा प्रत्येक माह 800 टीबी मरीजों इसमें 500 निजी संस्थानों व 300 सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों द्वारा जांच करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. एक साल में 9600 टीबी मरीजों का नोटिफिकेशन का लक्ष्य रखा गया है. वर्तमान में जिले में 86 प्रतिशत नोटिफिकेशन किया गया है. जिले में 9600 टीबी मरीजों कै निर्धारित लक्ष्य के एवज में जनवरी 2024 से जुलाई तक सात माह में लक्ष्य के एवज में 4819 मरीजों का नोटिफिकेशन किया गया है. विदित हो कि पंचायत प्रतिनिधियों को अपने-अपने पंचायत में आशा के माध्यम से डोर टू डोर संदिग्ध टीबी मरीजों को चिन्हित कराने का निर्देश दिया गया है. इसके अलावे जिले में उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों एवं समूहों पर खास ध्यान रखा जा रहा है. पंचायत में कोई टीबी संदिग्ध व्यक्ति अपना स्पुटम देने से इंकार करते हैं तो पंचायत के मुखिया द्वारा आशा के सहयोग से व्यक्ति को समझकर स्पुटम लिया जाता है. एक प्रखंड के सभी पंचायत के टीबी मुक्त होने से ही टीबी मुक्त प्रखंड का स्वप्न साकार हो सकता है. टीबी के मरीजों को मिलने वाली निक्षय पोषण योजना में लाभुकों को समय से भुगतान करने का निर्देश दिया गया. सभी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर अपने कार्य क्षेत्र के सभी टीबी रोगियों को तीन साल पूर्व तक की लाइन लिस्ट तैयार कर उनके संपर्क में रहने वाले हाउसहोल्ड कंटेक्ट का प्रत्येक छह माह पर स्क्रीनिंग करने की भी विभाग की योजना है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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