Madhubani News : श्रद्धा व भक्ति भाव से मनाया गया देवोत्थान एकादशी
Updated at : 01 Nov 2025 9:40 PM (IST)
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कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि शनिवार को देवोत्थान एकादशी शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में हर्षोल्लास एवं भक्ति भाव से मनाया गया.
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मधुबनी.
कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि शनिवार को देवोत्थान एकादशी शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में हर्षोल्लास एवं भक्ति भाव से मनाया गया. इसे प्रबोधिनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है. इस दिन श्री हरि विष्णु 4 महीने के बाद जागते हैं. देवोत्थान एकादशी पर विधि-पूर्वक पूजा और व्रत करने से उत्तम फल की प्राप्ति होती है. देवोत्थान एकादशी को विधि विधान, वैदिक मंत्रोच्चार से भगवान विष्णु को निद्रा से उठाने से जातक का सोया हुआ भाग्य चमक जाता है और धन-धान्य में भी वृद्धि होती है. देवोत्थान एकादशी का बहुत ही खास महत्व है. इस दिन भगवान विष्णु चार माह की निद्रा के बाद जागते हैं. साथ ही इस दिन चातुर्मास का भी समापन हो जाता है. ऐसे में इस दिन विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है. देवोत्थान एकादशी के दिन भगवान की पूजा करते समय और श्रीहरि को जगाते समय कुछ मंत्रों का जाप अवश्य करना चाहिए. इस दिन विधिपूर्वक पूजा व व्रत करने से जातक का भाग्य जाग सकता है और पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है.भगवान विष्णु को निद्रा से जगाने की विधि
भगवान विष्णु को निद्रा से जगाने की विधि कार्तिक शुक्ल एकादशी को रात के समय किया जाता है. उस समय शयन करते हुए हरि को जगाने के लिए सुभाषित स्तोत्र पाठ, भगवत कथा, पुराणादि का श्रवण और भजनादि का ””””गायन””””, घंटा, शंख, मृदंग, नगारे और वीणा आदि का ””””वादन”””” और विविध प्रकार के देवोपम खेल-कूद, लीला और नाच आदि से भगवान को जगाया गया.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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