महिलाओं की गरिमा, सुरक्षा एवं सम्मान से समझौता स्वीकार्य नहीं : डीएम

Updated at : 20 Jan 2026 10:31 PM (IST)
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महिलाओं की गरिमा, सुरक्षा एवं सम्मान से समझौता स्वीकार्य नहीं : डीएम

डीआरडीए के सभाकक्ष में महिला एवं बाल विकास निगम के तत्वावधान में जिला स्तरीय पदाधिकारियों की उन्मुखीकरण-सह-संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया.

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निजी अस्पताल में सात दिनों के भीतर करें आंतरिक शिकायत समिति का गठन पॉश एक्ट 2013 के प्रावधानों के अंतर्गत लगाया जाएगा 50 हजार का जुर्माना मधुबनी . डीआरडीए के सभाकक्ष में महिला एवं बाल विकास निगम के तत्वावधान में जिला स्तरीय पदाधिकारियों की उन्मुखीकरण-सह-संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया. कार्यशाला में कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न की रोकथाम, महिलाओं की गरिमा एवं सुरक्षित कार्य वातावरण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यौन उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध एवं प्रतितोष) अधिनियम, 2013 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जागरूक किया गया. मंच संचालन जिला परियोजना प्रबंधक ने किया. कार्यक्रम की शुरुआत दीप जलाकर किया गया. उद्घाटन उपरांत जिला पदाधिकारी आनंद शर्मा ने संबोधन में कहा कि कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता में शामिल करें. कहा कि जिले के सभी निजी अस्पताल में 7 दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से आंतरिक शिकायत समिति आईसीसी का गठन सुनिश्चित करें. उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्धारित समयावधि के पश्चात औचक निरीक्षण कराया जाएगा. जिस निजी अस्पताल अथवा संस्थान में आंतरिक समिति का गठन नहीं पाया जाएगा. उन पर पॉश एक्ट 2013 के प्रावधानों के अंतर्गत 50 हजार रूपये का जुर्माना लगाया जाएगा. डीएम ने कहा कि महिलाओं की गरिमा, सुरक्षा एवं सम्मान से किसी भी स्तर पर समझौता स्वीकार्य नहीं होगा. इसके पश्चात डीपीओ ने पॉश एक्ट 2013 की पृष्ठभूमि, उद्देश्य एवं प्रमुख प्रावधानों पर विस्तारपूर्वक जानकारी दी. उन्होंने कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की परिभाषा, उसके विभिन्न स्वरूपों तथा नियोक्ता की जिम्मेदारियों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि प्रत्येक संस्थान में आंतरिक शिकायत समिति का गठन अनिवार्य है. शिकायतों का निस्तारण निष्पक्ष, गोपनीय एवं समयबद्ध ढंग से किया जाना चाहिए. जिला परिवहन पदाधिकारी ने कहा कि हमारे समाज में नारी को सम्मान का सर्वोच्च स्थान प्राप्त है. यही सम्मान कार्यस्थल पर भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा केवल कानूनी दायित्व नहीं, बल्कि प्रत्येक संस्था एवं अधिकारी का सामाजिक उत्तरदायित्व है. कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव ने पॉश एक्ट के विधिक पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला. साथ ही शिकायत प्रक्रिया को चरणबद्ध रूप में समझाते हुए बताया कि शिकायत प्राप्ति, जांच, सुनवाई एवं निर्णय की प्रक्रिया पूर्णतः निष्पक्ष एवं गोपनीय होती है. प्रत्येक शिकायत का निस्तारण 90 दिनों के भीतर किया जाना अनिवार्य है. इसके पश्चात उप विकास आयुक्त सुमन प्रसाद साह के संदेश को साझा करते हुए बताया कि इस प्रकार की कार्यशालाओं के माध्यम से महिलाओं को जागरूक करना अत्यंत आवश्यक है. उन्होंने कहा कि यदि महिलाएं प्रारंभिक स्तर पर ही सजग होकर विरोध दर्ज कराती हैं, तो यौन उत्पीड़न की घटनाओं को उसी स्तर पर रोका जा सकता है. तत्पश्चात जिला मिशन समन्वयक अंजनी कुमार झा ने पोर्टल के माध्यम से निजी संस्थानों के पंजीकरण एवं शिकायत निवारण प्रक्रिया पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया. उन्होंने बताया कि यह भारत सरकार द्वारा विकसित एक केंद्रीकृत ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है. जिसके माध्यम से कार्य स्थल पर महिलाओं से संबंधित यौन उत्पीड़न की शिकायतें सुरक्षित, गोपनीय एवं पारदर्शी रूप से दर्ज की जा सकती हैं. उन्होंने निजी संस्थानों के लिए सी बॉक्स पोर्टल पर पंजीकरण की चरणबद्ध प्रक्रिया समझाते हुए बताया कि इससे अनुपालन के साथ-साथ शिकायतों के समयबद्ध एवं पारदर्शी निस्तारण में सहायता मिलती है. कार्यक्रम में यह भी जानकारी दी गई कि एक्ट के प्रावधानों का उल्लंघन करने पर जुर्माना लगाए जाने का प्रावधान है. कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य सभी जिला स्तरीय पदाधिकारियों, विभागों एवं निजी संस्थानों को पॉश एक्ट के प्रति संवेदनशील बनाना तथा महिलाओं के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक एवं भयमुक्त कार्यस्थल सुनिश्चित करना था.

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