किसानों के मंसूबे पर पानी

मधुबनीः जिले में पेड़ जीर्णोद्धार योजना एक बार फिर विफल हो चुका है़. वर्ष 12-13 में लक्ष्य के विरुद्ध एक भी पेड़ का जीर्णोद्धार नहीं किया गया था़ जबकि चालू वित्तीय वर्ष में लक्ष्य के 25 फीसदी ही उपलब्धि हासिल किया जा सका़ इस कारण यह योजना जिले में पूरी तरह विफल हो चुकी है़. […]
मधुबनीः जिले में पेड़ जीर्णोद्धार योजना एक बार फिर विफल हो चुका है़. वर्ष 12-13 में लक्ष्य के विरुद्ध एक भी पेड़ का जीर्णोद्धार नहीं किया गया था़ जबकि चालू वित्तीय वर्ष में लक्ष्य के 25 फीसदी ही उपलब्धि हासिल किया जा सका़ इस कारण यह योजना जिले में पूरी तरह विफल हो चुकी है़. विभागीय पदाधिकारी की मानें तो समय पर विभाग को पेड़ काटने वाला मशीन जिला को नहीं उपलब्ध कराये जाने के कारण इस योजना को पूरा करने में विभाग को परेशानी हुई़.
जिले में पेड़ जीर्णोद्धार योजना के लिये आयी राशि दो साल से जिला में पड़ा रहा़. इस राशि का खर्च योजना में नहीं हो पाना विभागीय विफलता को स्वत: उजागर कर रहा है. उद्यान विभाग द्वारा वर्षो पुराने पेड़ को तकनीकी रूप से काट कर उसे नये सिरे से नया बनाये जाने की योजना को सरकार ने स्वीकृति दी़ इसके तहत पुराने आम के पेड़, जिसका फलन क्षमता काफी कम हो गया है़. उसे विभागीय तकनीशियन एवं विशेषज्ञ की देख रेख में करीब तीन या चार फीट ऊपर से काटा जाता है़. फिर कटे हुए भाग पर रासायनिक दवा का लेप लगाया जाता है जिससे उस कटे हुए भाग से नया तना निकलता है़. और यह दो तीन साल में फिर से नये पेड़ की तरह अधिक फल देने लगता है़.
इस योजना के तहत किसानों को एक हेक्टेयर के लिये 27 हजार रुपये विभाग द्वारा अनुदान दिये जाने का प्रावधान था़ इस योजना के लिये कई किसानों ने आवेदन दिया़. लेकिन समय पर मशीन उपलब्ध नहीं रहने के कारण यह योजना विफल हो गया और किसानों के मंसूबे पर पानी फिर गया. पेड़ जीर्णोद्धार योजना लक्ष्य से दूर रही. चालू वित्तीय वर्ष में जिले को 8 हेक्टेयर में पेड़ जीर्णोद्धार का लक्ष्य प्राप्त हुआ़ इसके विरुद्ध मात्र 3 हेक्टेयर में ही पेड़ का जीर्णोद्धार किया जा सका़ इस लक्ष्य को पूरा करने में तकनीकी परेशानी भी सामने आयी़ दरअसल इस योजना के तहत दिसंबर जनवरी में ही पेड़ को काटा जा सकता है़ .
इसके तहत लक्ष्य को पूरा करने के लिये विभागीय अधिकारी ने मुजफ्फरपुर से मोबाइल प्रूनर नामक पेड़ काटने की मशीन भी मंगाय़े लेकिन जल्द ही इस मशीन का चेन खराब हो गया़ फिर दुबारा ना तो चेन आया और ना ही चेन आने की प्रतीक्षा में तकनीशियन ही रह़े जिस कारण विभाग के लाख प्रयास के बाद भी मात्र तीन हेक्टेयर ही लक्ष्य को पूरा किया जा सका़ इस बाबत जिला उद्यान पदाधिकारी अजीत यादव ने बताया कि समय से मशीन नहीं आने एवं मशीन में तकनीकी खराबी आ जाने के कारण कार्य प्रभावित हुआ.
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