कलम-कॉपी छोड़ रजाई में दुबके बच्चे
-ठंड में चौपट हुई पढ़ाई कैसे पूरी करेंगे बच्चे- मधुबनीः जिले में चल रही तेज शीतलहर ने बच्चे बच्चियों की पढ़ाई को भी नहीं बख्शा. कंपकंपा देने वाली ठंडी हवा ने उन्हें स्कूल में मिलने वाली शिक्षा से वंचित कर दिया है. पिछले लगभग एक सप्ताह से सभी निजी और सरकारी स्कूल बंद हैं. वैसे […]
-ठंड में चौपट हुई पढ़ाई कैसे पूरी करेंगे बच्चे-
मधुबनीः जिले में चल रही तेज शीतलहर ने बच्चे बच्चियों की पढ़ाई को भी नहीं बख्शा. कंपकंपा देने वाली ठंडी हवा ने उन्हें स्कूल में मिलने वाली शिक्षा से वंचित कर दिया है. पिछले लगभग एक सप्ताह से सभी निजी और सरकारी स्कूल बंद हैं. वैसे तो अभी सिर्फ 18 जनवरी तक के लिये ही सभी स्कूल बंद रहेगा. पर अगर ठंड का सिलसिला जारी रहा तो आगे भी स्कूलों के बंद रहने की संभावना है.
बच्चों के लिये घर में पढ़ना ही बस एक सहारा है. सरकारी स्कूलों में लगभग आठ लाख से भी अधिक बच्चे बच्चियां नामांकित हैं. इनमें अधिकांश बच्चे बच्चियों की आर्थिक हैसियत इतनी नहीं है कि वे इनके लिये निजी ट्यूशन की व्यवस्था कर सकें. वैसे भी शिक्षा के अधिकार कानून लागू होने के बाद सरकारी शिक्षकों के निजी ट्यूशन करने पर रोक लगा दी गई है. निजी स्कूल के शिक्षक घर पर जा कर बच्चों को पढ़ाते हैं पर उनकी फिश कम से कम दो हजार रुपये मासिक हैं. इस राशि को देना सभी अभिभावकों के लिये संभव नहीं है. कुछ अभिभावक इतने पढ़ने लिखे भी नहीं हैं कि वे अपने बच्चे बच्चियों को पढ़ा सकें. ऐसे बच्चे बच्चियों की ठंड के कारण पढ़ाई लिखाई बाधित हो गयी है. मार्च 2014 में प्रारंभिक कक्षाओं का सत्र समाप्त हो रहा है. जनवरी बीत रहा है. ठंड के कारण गरीब बच्चों की पढ़ाई लिखाई तहस नहस हो गई है. जिले में कई ऐसे सरकारी स्कूल हैं जहां बच्चे बच्चियां जाती हैं पर वहां भवन नहीं होने के कारण खुले आसमान के नीचे प्लास्टिक लगा कर पढ़ना पड़ता है. शिक्षाविदों का कहना है कि सरकार को शिक्षा विभाग को यह निर्देश देना चाहिये कि ठंड के कारण हुई पढ़ाई की क्षतिपूर्ति के लिये विशेष व ठोस कार्य योजना तैयार की जाय.
जिससे वे सत्रंत के अंत में होने वाली सीसीइ परीक्षा में बच्चे बच्चियां अच्छे ग्रेड ला सकें. अभिभावकों का कहना है कि छात्रवृत्ति व पोशाक योजना की राशि वितरण को लेकर भी कई स्कूलों में पढ़ाई लिखाई प्रभावित हुई है. इसकी भरपाई के लिये वे भी विभागीय ठोस कार्य योजना की मांग कर रहे हैं. गुणवत्ता शिक्षा पर ठंड कहर बरपा रही है.
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