मिथिला पेंटिंग का बदला स्वरूप

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मधुबनीः बदलते वक्त के साथ साथ मिथिला पेंटिंग अपना मूल स्वरूप खोता जा रहा है. कभी मिथिलांचल की सांस्कृतिक धरोहर रह चुकी यह पेंटिंग अब बाजारवाद की गिरफ्त में आ गई है. अब सिर्फ पौराणिक कथाओं तक ही सीमित नहीं रही यह चित्रकला. आधुनिक विश्व की समस्याओं का भी इसमें समावेश होने लगा है. कलाकारों […]

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मधुबनीः बदलते वक्त के साथ साथ मिथिला पेंटिंग अपना मूल स्वरूप खोता जा रहा है. कभी मिथिलांचल की सांस्कृतिक धरोहर रह चुकी यह पेंटिंग अब बाजारवाद की गिरफ्त में आ गई है. अब सिर्फ पौराणिक कथाओं तक ही सीमित नहीं रही यह चित्रकला. आधुनिक विश्व की समस्याओं का भी इसमें समावेश होने लगा है. कलाकारों को अब कोहबर, रासलीला, राम सीता विवाह, डोली की जगह कलाकारों को आतंकवाद, पोलियो उन्मूलन, क्रिकेट मैच, प्राकृतिक आपदा, ग्लोबल वार्मिग, बम ब्लास्ट पर पेंटिंग बनाने को कहा जा रहा है.

इसके साथ ही मिथिला पेंटिंग के एक युग का अंत हो गया. कलाकारों को अमेरिका ले जाकर वहां की ज्वलंत समस्याओं पर मिथिला पेंटिंग शैली में चित्र बनाने को कहा जाता है. मिथिला पेंटिंग के इस बदले स्वरूप से इसका अस्तित्व दांव पर लग गया हैं. अब मिथिला पेंटिंग में रामायण व महाभारत के पात्रों का चित्रण कम रहता हैं. मिथिला की परंपराओं, संस्कारों, अनुष्ठानों, पर्व त्योहार में प्रयोग होने वाला मिथिला पेंटिंग बाजारवाद की भेंट चढ़ चुका हैं. मिथिला पेंटिंग का पूरी तरह बदलती तसवीर सामने आ रही है. जयमाल की मिथिला पेंटिंग का उपयोग एड्स पर पेंटिंग बनाने में हो रहा है. मिथिला पेंटिंग का नया स्टाइल मूल मिथिला पेंटिंग से अलग हैं. मिथिला पेंटिंग पर फाइन आर्ट्स हावी होता जा रहा है.

हाल ही में मिथिला पेंटिंग स्टाइल में बनी एक पेंटिंग महिला क्रिकेट मैच पर आधारित है. मिथिला पेंटिंग के बदल े स्वरूप को अमेरिका, दक्षिण अफ्रीका, फ्रांस, इंग्लैड, जापान, चीन में काफी पसंद किया जा रहा है. मिथिला पेंटिंग की इस नई शैली से मूल या ऑंरीजनल पेंटिंग को गहरा झटका लगा है और कलाकार पलायन कर रहे हैं. नई शैली की पेंटिंग को विदेश भेजा जा रहा है. धीरे धीरे मिथिला पेंटिंग अपने मूल स्वरूप से भटकता जा रहा है. महिला दुष्कर्म और महिला सशक्तीकरण पर भी मिथिला पेंटिंग बनायी जा रही है.

कलाकार पेंटिंग के बदलते स्वरूप से आक्रोशित है. उनका कहना है कि अगर किसी तरह नई शैली में मिथिला पेंटिंग बनती रही तो एक दिन ऑरीजनल मिथिला पेंटिंग का वजूद ही मिट जायेगा. पर कला विशेषज्ञ डा. परमेश्वर झा का कहना है कि नई शैली के मिथिला पेंटिंग का विश्व में बड़ा बाजार है. इसके स्वरूप में बदलाव को वे शुभ संकेत मानते है. कला प्रेमी कौशिक कहते है कि बदलाव प्रकृति का नियम है. शायद यही कारण है कि मिथिला पेंटिंग से अधिक नई शैली के मिथिला पेंटिंग की विश्व बाजार में मांग है. अब मिथिला पेंटिंग के नाम पर नई शैली की पेंटिंग अधिक लोकप्रिय हो रही है.

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