वोट बहष्किार घोषणा वाले गांवों में भी जमकर हुआ मतदान
वोट बहिष्कार घोषणा वाले गांवों में भी जमकर हुआ मतदान वोट बहिष्कार का फैसला बदल लोगों ने किया मतदानमधेपुर .लोकतंत्र के महापर्व विधानसभा चुनाव में विभिन्न विकास से संबंधित मांग को लेकर वोट बहिष्कार करने की घोषणा वाले गांवों में भी जमकर मतदान हुए . मधेपुर प्रखंड के महिशाम गांव के लोगों ने जहां चुनाव […]
वोट बहिष्कार घोषणा वाले गांवों में भी जमकर हुआ मतदान वोट बहिष्कार का फैसला बदल लोगों ने किया मतदानमधेपुर .लोकतंत्र के महापर्व विधानसभा चुनाव में विभिन्न विकास से संबंधित मांग को लेकर वोट बहिष्कार करने की घोषणा वाले गांवों में भी जमकर मतदान हुए . मधेपुर प्रखंड के महिशाम गांव के लोगों ने जहां चुनाव से एक पखवाड़े पूर्व से ही सड़क ,बिजली की समस्या को दूर करने के लिए मतदान बहिष्कार करने की घोषणा कर रखी थी. इस गांव के लोगों ने गांव में प्रवेश करने वाली सड़क पर बैनर लगा कर गांव में नेताओं के प्रवेश पर रोक लगा दिया था . चुनाव प्रचार के दौरान नेता भी गांव जाने से कतराते थे .कुछ यही हाल डारह पंचायत के बेला गांव के लोगों ने कर रखा था . इस गांव के लोग भी सड़क ,बिजली, पेयजल ,स्वास्थ आदि समस्याओं के समाधान करने की मांग को लेकर वोट का बहिष्कार करने की चेतावनी प्रशासन को दी थी. इसी तरह पौनी एवं रामबाग गांव के लोगों ने बिजली को लेकर वोट बहिष्कार की सूचना लिखित रुप से प्रशासन को दी थी .आखिरकार इन गांव के लोगों ने भी मतदान के दिन अपना फैसला बदला तथा लोकतंत्र के महापर्व में भाग लेकर अपने मताधिकार का प्रयोग किया. महिशाम गांव के गीतेश झा, गौरीकांत झा ,मांगेन झा सहित कई लोगों ने बताया विगत तीन दशकों से गांव की सड़क पूर्णरुपेण जर्जर हो चुकी थी. बिजली की समस्या का समाधान नहीं किया जा रहा था .सरकार एवं प्रशासन के द्वारा विकास की अनदेखी की जा रही थी. इन लोगों का कहना था लोकतंत्र में सरकार एवं प्रशासन के समक्ष समस्या रखना लोगों का मौलिक अधिकार है .चुनाव के बाद अब गांव के लोगों की निगाहें मतगणना पर टिकी हुई है. लोगों की आशा है सरकार बनने के बाद क्षेत्र सहित गांव का विकास संभव हो सकेगा.जर्जर भवन में हो रही पढ़ाई फोटो: 9परिचय: प्राथमिक विद्यालय शिवा उर्दू का क्षतिग्रस्त भवन अंधराठाढी . प्राथमिक विद्यालय शिवा उर्दू क्षतिग्रस्त भवन में चल रहा है. आये दिन दुर्घटना की आशंका बनी रहती है. शिवा गांव के अल्पसंख्यक समुदायों के मुहल्ले में यह विद्यालय स्थापित है. विद्यालय भवन पूर्णत: क्षतिग्रस्त रहने के बावजूद वर्ग का संचालन होता है. तकरीबन 226 छात्र -छात्राएं नामांकित हैं व तीन शिक्षक कार्यरत हैं. दो क्षतिग्रस्त भवन वाले इस विद्यालय में वर्ग एक से पांचवी तक की पढ़ाई होती है. पढ़ाई के दौरान छत से प्लास्टर गिरते रहता है. एमडीएम संचालन के लिए एक रसोईघर बना हुआ है. विद्यालय में अच्छे भवन, शौचालय और खेल के मैदान की दरकार है. प्रभारी प्रधान शिक्षक मो अब्बास मंसूरी के मुताबिक भूमि की उपलब्धता नहीं रहने के कारण नये भवन का निर्माण का काम नहीं हो रहा है. इस विद्यालय में कम से कम पांच कमरों के अलावे रसोईघर और भंडार गृहके अलावा दो शिक्षकों की कमी है. विद्यालय शिक्षा समिति की ओर से विभाग को कई बार स्मारित किया जा चुका है.
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