आइएम की नेपाली नक्सली से गंठजोड़ के संकेत
मधुबनीः बीते 27 अक्तूबर को हुंकार रैली के दौरान पटना के गांधी मैदान में हुए सीरियल बम ब्लास्ट को जहां शुरुआत में पटाखा समझा गया था. बाद में इसे नक्सली वारदात माना गया. जब लोगों के घायल होने का सिलसिला बढ़ा तो काफी समय बाद यह माना गया कि यह आतंकी वारदात हुआ. दरअसल इसमें […]
मधुबनीः बीते 27 अक्तूबर को हुंकार रैली के दौरान पटना के गांधी मैदान में हुए सीरियल बम ब्लास्ट को जहां शुरुआत में पटाखा समझा गया था. बाद में इसे नक्सली वारदात माना गया. जब लोगों के घायल होने का सिलसिला बढ़ा तो काफी समय बाद यह माना गया कि यह आतंकी वारदात हुआ.
दरअसल इसमें पुलिस और सुरक्षा एजेंसी के समक्ष की कमी नहीं थी. बल्कि जिस क्षमता का बम विस्फोट हुआ अथवा बरामद हुए वह तत्काल कतई ही आतंकी वारदात की ओर इशारा नहीं कर रहा था. ऐसे में आइएम की इस घटना में संलिप्ता ने सुरक्षा एजेंसियों को भी चौका दिया था. खुफिया सूत्र बताते है कि इतना कम क्षमता बम का प्रयोग अमूमन आतंकी संगठन नहीं करता है. बल्कि इस तरह का उपयोग नक्सली संगठन करता है. वह भी भारतीय नहीं नेपाली नक्सली ऐसे बम का प्रयोग करता है.
दरअसल गांधी मैदान में जो बम फटा था. उसका अधिकतम दायरा डेढ़ मीटर बताया जाता है. इस परिधि में आने पर ही ज्यादा नुकसान होता है. नक्सली जीवन त्याग चुके दरभंगा जिले के एक व्यक्ति ने बताया कि भारतीय नक्सली जिस बारूद का प्रयोग करते है. वह अमूमन साउथ एरिया से आता है. उसकी मारक व विस्फोट क्षमता अधिक होती है. जबकि नेपाली नक्सली ही ऐसे बम का प्रयोग करते है. उसका मकसद मारने से ज्यादा आतंक फैलाना रहता है. एनआइडी (नेपाल इंटेलीजेंस डिपार्टमेंट) के अधिकार ने भी इस तथ्य पर अपनी सहमति दी है. उन्होंने नाम नहीं छापने के शर्त पर बताया है कि गांधी मैदान ब्लास्ट में आइएम की संलिप्ता से यह स्पष्ट हो गया है कि आइएम का नेपाली नक्सली संगठनों से गठजोड़ है.
हालात इस ओर स्पष्ट इशारा कराता है. क्योंकि जिस तरह ब्लास्ट किया गया है वह नेपाली नक्सलियों का पुराना स्टाइल है. जिस बम का प्रयोग हुआ वह कम मारक क्षमता का था. इसको बनाने में भी कम समय लगता है. इसके टाइमर में भी तमाम लोकल डिवाइस का लगाये जाते है. वहीं एनआइडी अधिकारी की बातों पर गौर करें तो स्पष्ट है कि आतंकी संगठन भारत में वारदात को अंजाम देने के लिये नेपाली नक्सली का सहारा ले रहा है. इस तथ्य से तत्काल इनकार भी नहीं किया जा सकता है. क्योंकि नेकपा माओवादी प्रमुख मोहन किरण वैद्य ने तो खुले तौर भारत विरोधी झंडा उठाये हुए है. इसका फायदा आइएम और आइएसआइ उठा रही है.
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