जयंती पर गांधी की खादी उदास
मधुबनीः खादी और खादी कर्मियों की हालत खराब होती रही और इसके अनुदान के खेल में कई लखपति हो गये हैं. खादी भंडार की करोड़ों की संपत्ति बेकार पड़ी है. जिसे पुनर्जीवित की ठोस योजना पर काम नहीं किया जा रहा है. लिहाजा इन भंडारों में खादी कपड़े के उत्पादन का काम लगभग ठप सा […]
मधुबनीः खादी और खादी कर्मियों की हालत खराब होती रही और इसके अनुदान के खेल में कई लखपति हो गये हैं. खादी भंडार की करोड़ों की संपत्ति बेकार पड़ी है. जिसे पुनर्जीवित की ठोस योजना पर काम नहीं किया जा रहा है. लिहाजा इन भंडारों में खादी कपड़े के उत्पादन का काम लगभग ठप सा हो गया है. पर यहां के उत्पाद को अपनी दुकान में दिखा कर अनुदान की लाखों की राशि का वारा न्यारा किया जा रहा है.
खादी के अनुदान के इस खेल को जानने समझने वाले नरेश चंद्र यादव की माने तो जिले में लगभग आठ ऐसी एजेंसी है, जो हर वर्ष अनुदान की लाखों की राशि गटक रही है. दरअसल खादी को प्रोत्साहन देने के लिए हर वर्ष गांधी जयंती के दिन से खादी वस्त्रों पर भारी छूट दी जाती है. प्रोत्साहन के लिए खादी वस्त्र निर्माण के लिए विभिन्न राज्य सरकार एवं केंद्र सरकार खादी आयोग से निबंधित संगठनों को राशि अलग से मुहैया कराती रही है. यहां के उत्पादित वस्त्रों की बिक्री के प्रोत्साहन के लिए छूट दी जाती है. इन दोनों योजनाओं में भारी गड़बड़झाला है. विभिन्न संगठनों को संकलित कर कथित गड़बड़ी की मुखालत करने वाले मिथिला मूवमेंट अगेंस्ट करप्शन ने इसे बड़ी अनियमितता बताया है.
संगठन के चीफ एक्सक्यूटिव रिंकू झा ने बताया कि इस क्षेत्र के लिए खादी काफी महत्वपूर्ण संपदा रही है. क्षेत्र की आर्थिक उन्नति एवं स्वरोजगार का सशक्त माध्यम रहा है. यहां की संपत्ति तो बची है. लेकिन उत्पादन ठप हो गया है. बावजूद इसके उत्पाद के अनुदान के नाम पर बड़ी डील की जा रही है. खादी कर्मियों ने बताया कि यह मामला उच्चस्तर से जुड़ा है. इसलिए इस पर कुछ नहीं बताया जा सकता हैं. लिहाजा, गांधी जयंती पर जिले में खादी उदास है.
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