जिला सुखाड़ग्रस्त घोषित

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मधुबनी: जुलाई, अगस्त एवं सितंबर माह में आवश्यकता से कम बारिश होने की वजह से किसान ना सिर्फ अपने खेत में धान की रोपनी करने से वंचित रह गये. बल्कि आच्छादित धान भी अब सूखते लगे है. सूखे की इस भयावह स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने अंतत: जिले को सूखा ग्रस्त क्षेत्र घोषित […]

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मधुबनी: जुलाई, अगस्त एवं सितंबर माह में आवश्यकता से कम बारिश होने की वजह से किसान ना सिर्फ अपने खेत में धान की रोपनी करने से वंचित रह गये. बल्कि आच्छादित धान भी अब सूखते लगे है. सूखे की इस भयावह स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने अंतत: जिले को सूखा ग्रस्त क्षेत्र घोषित कर दिया है. जिले को सूख क्षेत्र घोषित करने की अनुशंसा जिला पदाधिकारी लोकेश कुमार सिंह ने विगत दिनों ही राज्य सरकार से की थी.

लक्ष्य से दूर आच्छादन

खरीफ फसल में खेत आच्छादन का लक्ष्य पूरा करने में जिला कृषि विभाग रहा. प्राप्त आंकड़ों के अनुसार जिले में 2 लाख 34 हजार 723 हेक्टेयर खेती योग्य जमीन है. विभाग को सरकार द्वारा एक लाख 56 हजार हेक्टेयर जमीन में खरीफ फसल में धान का आच्छादन का लक्ष्य प्राप्त हुआ. लेकिन समय से बारिश नहीं होने व सिंचाई का कोई ठोस स्नेत नहीं रहने के कारण विभाग मात्र एक लाख 18 हजार 395 हेक्टेयर भूमि में ही धान आच्छादित करने में सफलता प्राप्त कर सकी. के विरुद्ध मात्र 85.6 एम एम बारिश हुई. जबकि सितंबर माह में 238.6 एम एम के विरुद्ध 73.6 एम एम बारिश रिकार्ड किया गया. सूखे की स्थिति में आच्छादित फसल को बचाने के लिये सरकार ने जिला को 11 करोड़ 92 लाख 39 हजार 600 रुपये दिये है. इनमें से जिला पदाधिकारी लोकेश कुमार सिंह ने पूर्व में 2 करोड़ 64 लाख 80 हजार 300 रुपये विभाग को दिया था. जिसे जिला कृषि विभाग ने प्रखंडवार उपावंटित कर दिया था. इस उपावंटित राशि में से 178.83 लाख रुपये किसानों के बीच वितरित किया जा चुका है. शेष 9 करोड़ 27 लाख 59 हजार 300 रुपये को जल्द ही प्रखंडों को उपावंटित कर दिया जायेगा.

कूल्थी बीज वितरण

सूखे के मद्देनजर खाली खेत को आच्छादित करने के उद्देश्य से आकस्मिक फसल योजना के तहत जिले को 600 क्विंटल कूल्थी बीज मुहैया कराया गया है. इस बीज को युद्ध स्तर पर जिला कृषि पदाधिकारी के देख रेख एवं जिला कृषि पदाधिकारी के निर्देश पर किसानों के बीच वितरित किया जा रहा है. वहीं बीडीओ व सीओ द्वारा किये गये सर्वे के अनुसार 1 लाख 16 हजार 772 हेक्टेयर जमीन ही आच्छादित हुआ.

सिंचाई की व्यवस्था नहीं

जिले में सिंचाई की कोई ठोस व्यवस्था अब तक नहीं हो सका है. प्राप्त आंकड़ों के अनुसार जिले में कुल 222 राजकीय नलकूप है. जिसमें से मात्र 50 राजकीय नलकूप को विभाग चालू अवस्था में बता रहा है. लेकिन खरीफ में विभाग द्वारा प्राप्त आंकड़ों के अनुसार मात्र करीब 36 हजार एकड़ जमीन में ही सिंचाई उपलब्ध करायी गयी है. हालांकि सूत्रों का कहना है कि यह आंकड़ा भी मात्र कागज पर ही है. खेतों में इससे भी कम पटवन किया गया है.

कम हुई बारिश

जिले में सूखे का मुख्य कारण तीन माह में आवश्यकता से काफी कम बारिश होना है. जिला कृषि विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार जुलाई माह में 335.6 एम एम बारिश की आवश्यकता थी. लेकिन मात्र 130.8 एम एम बारिश ही रिकार्ड की गयी. इसी प्रकार अगस्त माह में 293.9 एम एम बारिश की आवश्यकता थी.

क्या कहते हैं अधिकारी

जिला कृषि पदाधिकारी के के झा ने बताया है कि जिला पदाधिकारी लोकेश कुमार सिंह जिले की स्थिति का व्यापक रूप से अवलोकन करते हुए सरकार को सूखा क्षेत्र घोषित करने की अनुशंसा किये थे. सरकार ने क्षेत्र को सूखा क्षेत्र घोषित कर दिया है. अब सरकार व जिला पदाधिकारी के निर्देश के तहत किसानों को मिलने वाली सुविधा को पारदर्शिता पूर्वक किसानों को लाभाविंत किया जायेगा.

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