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कीचड़मय हुईं सड़कें, जलजमाव से पैदल चलना भी हुआ मुश्किल

Updated at : 09 Jul 2019 1:27 AM (IST)
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कीचड़मय हुईं सड़कें, जलजमाव से पैदल चलना भी हुआ मुश्किल

नाला जाम रहने से शहर की सड़कों पर फैला वर्षा का पानी मधुबनी : मानसून की पहली बारिश ने ही नगर परिषद की सफाई व्यवस्था की पोल खोल दी है. रविवार की देर रात शुरू हुई बूंदाबांदी सोमवार को दिन के 12 बजे तक जारी रहने से व तकरीबन एक घंटे तक हुई झमाझम बारिश […]

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नाला जाम रहने से शहर की सड़कों पर फैला वर्षा का पानी

मधुबनी : मानसून की पहली बारिश ने ही नगर परिषद की सफाई व्यवस्था की पोल खोल दी है. रविवार की देर रात शुरू हुई बूंदाबांदी सोमवार को दिन के 12 बजे तक जारी रहने से व तकरीबन एक घंटे तक हुई झमाझम बारिश शहर को नारकीय बना डाला है. बारिश होने से भीषण गर्मी से लोगों को राहत तो मिली, लेकिन शहर में जगह-जगह जल जमाव की स्थिति उत्पन्न होने से शहर के लोग मुश्किलों से घिर गये हैं. शहर के अधिकांश सड़कों व मुहल्ला में पानी जमा हो गया है.
शहर के विनोदानंद झा कॉलोनी, गदियानी, महंथी लाल चौक, महिला कॉलेज रोड, जलधारी चौक, पंचवटी चौक, ईदमोहम्मद चौक आदि दर्जनों सड़कें पानी में डूबी नजर असा रही है. मानसून आने से पहले नगर परिषद नगर परिषद प्रशासन द्वारा नाले की सफाई का दावा किया जा रहा था. लेकिन नाला सफाई योजना कागजों में ही सिमट कर रह गयी. पहली बारिश ने ही सब कुछ बयां कर दी है. शहर के सभी नाले जाम हैं.
योजनाएं तो बनीं, लेकिन समस्या बरकरार
नगर परिषद मानसून से पहले नाला व कैनालों की सफाई की योजना बनायी थी. पिछले एक महीने में कैनालों व नाले का 45 से 50 फीसदी भाग की सफाई हुई है. जहां सबसे अधिक जरूरत है वहां सफाई ही नहीं हुई है. बताया जा रहा है कि न तो कैनालों और न ही नाले की सफाई के लिए प्लान बनाया गया. इधर उधर मजदूर लगा कर सफाई की खानापूर्ति की गयी है. आलम यह है कि गदियानी के पास कैनाल का पानी सड़कों पर जमा है. कैनाल, सड़क से उपर है. वहीं नाला में कैनाल का पानी जमा है. जबकि नाला का पानी कैनाल में होना चाहिए था. वार्ड नंबर 2, 4, 5 के पार्षद ने कैनालों की सफाई पर सवाल खड़े किये हैं.
लोगों में जगी उम्मीद
सोमवार को हुई बारिश ने जहां लोगों को गरमी से राहत दी वहीं लोगों को जल स्तर उपर उठने की उम्मीद जगा दी. सुरेंद्र कुमार, संजीव कुमार, शंकर कुमार, रोहित झा, बिंदु भूषण, अमरनाथ झा ने कहा कि इस बारिश से जल स्तर में कुछ वृद्धि होगी. जिससे चापाकल पानी गिरना शुरू हो जाएगा. दो- चार दिन इसी तरह बारिश हुई तो पेयजल संकट दूर होगी.
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