मृत मवेशियों को दूर फेंकने के नाम पर हर माह दो लाख हो रहे खर्च

मधुबनी : नप में कमाई का कई जरिया है कचरा, होल्डिंग टैक्स, सड़क, पानी के साथ साथ अब मरे हुए मवेशी के नाम पर भी कमाई किये जाने की बातें सामने आ रही है. औसतन करीब डेढ़ से दो लाख रुपये का खर्च हर माह मरे हुए मवेशी के नाम पर हो रहा है. पर […]
मधुबनी : नप में कमाई का कई जरिया है कचरा, होल्डिंग टैक्स, सड़क, पानी के साथ साथ अब मरे हुए मवेशी के नाम पर भी कमाई किये जाने की बातें सामने आ रही है. औसतन करीब डेढ़ से दो लाख रुपये का खर्च हर माह मरे हुए मवेशी के नाम पर हो रहा है. पर इस खर्च के बाद भी जब मवेशी की मौत होती है तो वह शहर में ही सड़क किनारे फेंक दिया जाता है.
मिट्टी में दबाने या शहर से दूर फेंकने तक की पहल नहीं होती. जानकारी के अनुसार शहर मुख्यालय में अगर कही पशु की मौत होती है तो उसको फेंकने के लिये नगरपरिषद प्रशासन ने अलग से इंतजाम किया है. शहरी क्षेत्रों में जितना पशु मरता है उसको एनजीओ के माध्यम से शहर से बाहर गाड़ने की व्यवस्था की जाती है. लेकिन ऐसा देखा जाता है कि एनजीओ के कर्मी शहर में ही उस मरे मवेशी को फेंक देते हैं.जिस कारण आम लोगो को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है. मृत पशु के नाम पर प्रत्येक माह होता है लाखो खर्च.
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