यूं ही नहीं मिला िजतवारपुर को कलाग्राम का दर्जा

Published at :05 Aug 2017 3:42 AM (IST)
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यूं ही नहीं मिला िजतवारपुर को कलाग्राम का दर्जा

दीवारों पर की गयी पेंटिंग ही साबित कर रही गांव के लोगों के कला प्रेम को वस्त्र मंत्रालय द्वारा जितवारपुर कलाग्राम घोषित होने वाला बिहार का पहला गांव, लोगों में खुशी मधुबनी : जिले से सटे जितवारपुर गांव में जिस परंपरा को आज से करीब सात पीढ़ी पहले के पूर्वजों ने शुरू किया आज, उसका […]

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दीवारों पर की गयी पेंटिंग ही साबित कर रही गांव के लोगों

के कला प्रेम को
वस्त्र मंत्रालय द्वारा जितवारपुर कलाग्राम घोषित होने वाला बिहार का पहला गांव, लोगों में खुशी
मधुबनी : जिले से सटे जितवारपुर गांव में जिस परंपरा को आज से करीब सात पीढ़ी पहले के पूर्वजों ने शुरू किया आज, उसका प्रतिफल मिलने लगा है. जितवारपुर गांव को वस्त्र मंत्रालय द्वारा कला ग्राम घोषित कर दिया गया है. पर यह पुरस्कार इस गांव को इतनी आसानी से नहीं मिला है. इस गांव की सात पीढ़ी ने इस दिन के लिए ही दिन रात मेहनत की है. आज भी इनकी कला बोलती है. गांव के प्राय: हर घर की दीवार पर मिथिला पेंटिंग की गयी है. जो यहां के लोगों में कला के प्रति प्रेम को दर्शाने के लिए काफी है.
घरों की दीवार पर कोहबर, अरिपन, अष्टदल, राश लीला, प्राकृतिक प्रेम को दर्शाती एक से बढकर एक कलाकृति. किस आंगन के दीवार का कला बेहतर है और किसका औसत यह कहना मुश्किल. इस गांव में इस कला की शुरुआत कब हुई और किसने किया इसका सही से आंकलन नहीं है. पर आज भी सात पीढी तक के साक्ष्य इस गांव में मौजूद है. इस गांव के कई लोगों को कई अवार्ड मिल चुका है. बिहार का पहला गांव है जिसको कला ग्राम घोषित किया गया है.
यह ना सिर्फ इस गांव के लोगों के लिये गौरव की बात है बल्कि इस उपलब्धि ने जिले को भी गौरवान्वित कर दिया है. जानकारी के अनुसार इससे पहले गुजरात के पेतापुर को भी कला गांव घोषित किया गया था. जितवारपुर गांव के लगभग 500 घर है. जिसमें से 300 व्यक्ति महिला पुरुष एवं बच्चा इस कला के जानकार है. कलाकार प्रभाकर झा ने बताया कि यह गांव पहले से ही टूरिज्म गांव है. कला ग्राम बनने के बाद जितवारपुर भी बंगाल की तरह शांति निकेतन के रूप में जाना जायेगा.
खुलेगा ट्रेनिंग सेंटर. कला गांव की दर्जा मिलने से यहां सरकार द्वारा ट्रेनिंग सेंटर के साथ ऑनलाइन बिक्री की व्यवस्था भी होगी. ग्रामीण विश्वंभर झा, कलाकार तपेंद्र झा, कृष्णकांत झा, पवन कुमार झा, विमलेश कुमार झा ने बताया कि सरकार द्वारा इस गांव को कला ग्राम घोषित किये जाने से वहां के कलाकारों में खुशी है. अब कलाकारों को बिचौलिया के माध्यम से समान नहीं बेचना पड़ेगा. साथ ही अंतराष्ट्रीय मेला में भाग लेने के लिए अब चक्कर नहीं काटना पड़ेगा.
दो दर्जन से ज्यादा कलाकारों को मिल चुका है अवार्ड
बिहार का इकलौता यह गांव है जहां से दो दर्जन से ज्यादा कलाकारों को राज्य अवार्ड, नेशनल अवार्ड पद्मश्री एवं गुरू शिल्प का अवार्ड मिल चुका है. पदम श्री बौआ देवी ने बताया कि इस गांव के मिट्टी में ही कलावास करता है. यहां पर सबसे पहले सीता देवी को उनके कला को लेकर उद्योग विभाग द्वारा राज्य अवार्ड 1971 में मिला था. उसके बाद जगदंबा देवी, चानो देवी, श्याम पासवान सहित कई कलाकारों को राज्य से लेकर राष्ट्रीय अवार्ड मिल चुका है. स्व. सीता देवी को नेशनल अवार्ड, पदमश्री व शिल्प गुरू का अवार्ड मिला है.
कला ग्राम होने से मिलेंगी कई सुविधाएं
कला ग्राम होने से जितवारपुर गांव आने वाला कुछ समय में राज्य के अव्वल गांव की श्रेणी में आयेगा. कलाकार प्रभाकर झा ने बताया कि सबसे पहले कलाकारों के लिए रोजगार श्रृजन होगा. सरकार द्वारा सेल्स सेंटर खोला जायेगा. जहां कलाकार अपनी पेंटिंग को सही दाम में बेच सकता है. कलाकारों का समान सीधा सरकार खरीद करेगी. बिजली, सड़क, नाला सहित अन्य मूलभूत सुविधा से गांव सुसज्जित होगा. साथ ही अन्य राज्य की तरह यहां पर भी अंतराष्ट्रीय कला मेला लगाया जायेगा. जहां कलाकार सीधे तौर पर पर्यटक के हाथ से अपना सामान की बिक्री कर उसका उचित मूल्य प्राप्त कर सकेंगे.
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