पुस्तकालय में कभी रहता था पाठकों का जमघट

Published at :01 Aug 2017 4:00 AM (IST)
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पुस्तकालय में कभी रहता था पाठकों का जमघट

झंझारपुर : कभी पाठकों से गुलजार रहने वाला किशोर पुस्तकालय आज अपने सुरत-ए-हाल पर आंसू बहा रहा है. बताते चलें कि अनुमंडल क्षेत्र के खड़ौआ गांव में अवस्थित प्रसिद्ध किशोर पुस्तकालय में वर्षों पहले ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं से लेकर बड़े बुजुर्गों का जमघट लगता था. जहां एक तरफ सुधि पाठक अपनी पसंदीदा पुस्तक पढ़कर […]

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झंझारपुर : कभी पाठकों से गुलजार रहने वाला किशोर पुस्तकालय आज अपने सुरत-ए-हाल पर आंसू बहा रहा है. बताते चलें कि अनुमंडल क्षेत्र के खड़ौआ गांव में अवस्थित प्रसिद्ध किशोर पुस्तकालय में वर्षों पहले ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं से लेकर बड़े बुजुर्गों का जमघट लगता था. जहां एक तरफ सुधि पाठक अपनी पसंदीदा पुस्तक पढ़कर ज्ञानवर्धन के संग सुविचारों का आदान – प्रदान करते आज सुधि पाठक समेत ग्रामीणों को मुंह चिढ़ा रहा है. विदित हो कि तीस के दशक में ग्रामीण लाल साहेब के परिवार वालों ने ग्रामीण क्षेत्र के छात्र – छात्राओं को ध्यान में रखकर पुस्तकालय की नींव रखी थी. इसके संवर्द्धन के लिए अपनी निजी जमीन तीन कट्ठा पुस्तकालय के नाम कर दिया. सरकार द्वारा ग्रामीण पुस्तकालय योजना अंतर्गत इसे सूचीबद्ध कर लिया गया,

जो आज भी मधुबनी जिला ग्रामीण क्षेत्रीय पुस्तकालय के सूची में क्रम संख्या 44 पर अंकित है. उस समय के पाठक रहे अवकाशप्राप्त नौ सैनिक विपिन वर्मा ने पूछने पर बताया कि पुस्तकालय उपस्कर से सुसज्जित एवं इसमें पुस्तकों की संख्या पांच हजार से अधिक था. उन्होंने आगे बताया कि लालदास उच्च विद्यालय के स्थापना काल में कुछ पुस्तक विद्यालय के शिक्षकों द्वारा ले जाया गया, जो आज तक पुस्तकालय को नहीं लौटाया गया है. पुस्तकालय के सफल संचालन के लिए एक कमेटी गठित की गयी थी, जिसके अध्यक्ष लाल साहेब स्वयं थे. सचिव के पद पर शिव नारायण दास और पुस्तकालय प्रभारी रघुनंदन लाल दास उर्फ पंडी जी बनाये गये थे. ग्रामीण अमरकांत लाल बताते हैं कि नब्बे के दशक तक पुस्तकालय की स्थिति अच्छी थी धीरे-धीरे यह पतोन्मुख होता चला गया. अब कमेटी के एकमात्र अधिकारी सचिव महोदय जीवित हैं. सूत्र से मिली जानकारी के मुताबिक आज भी सरकार द्वारा पत्राचार जारी है. कभी गुलजार रहने वाला किशोर पुस्तकालय आज अपने जीर्णोद्धारक के इंतजार में आशा भरी निगाहों से टकटकी लगाये खामोश है कि कोई तो होगा जो मेरी सुधि लेगा. 1950 के दशक में सरकार के अनुदान से पुस्तकालय भवन का पक्कीकरण हुआ था. इस संबंध में मुखिया रवींद्र ठाकुर ने बताया कि पुस्तकालय के जीर्णोद्धार के लिए पहल की गयी है.

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