ध्यान से ही अपनी आत्मा को समझ सकता है मानव

Updated at : 08 Sep 2024 9:35 PM (IST)
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ध्यान से ही अपनी आत्मा को समझ सकता है मानव

जिला मुख्यालय स्थित सदगुरु कबीर देव ध्यान साधना संस्थान धर्म स्वरूप नगर वार्ड नंबर दो मधेपुरा के तत्वावधान में तीन दिवसीय ध्यान साधना शिविर का समापन दीनेश प्रसाद यादव की अध्यक्षता में किया गया.

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मधेपुरा. जिला मुख्यालय स्थित सदगुरु कबीर देव ध्यान साधना संस्थान धर्म स्वरूप नगर वार्ड नंबर दो मधेपुरा के तत्वाधान में तीन दिवसीय ध्यान साधना शिविर का समापन दीनेश प्रसाद यादव की अध्यक्षता में किया गया. अनंत श्री विभूषित अंतरराष्ट्रीय संत आचार्य धर्म स्वरूप साहेब जीवन ज्योति केंद्र संत कबीर नगर पूर्णिया के तपोनिस्ठ शिष्य पूज्य गुरुदेव संत श्री अभय साहेब सदगुरु कबीर पारख निकेतन कहलगांव भागलपुर ने कहा सहज ध्यान में रहना चाहिए और गुरु के वचन को अपने जीवन में उतरना चाहिए. ध्यान साधना से ही मन, इंद्रियों, को वश में किया जा सकता है. ध्यान से ही मनुष्य अपनी आत्मा को समझ सकता है. ध्यान से ही मनुष्य अपने सांसारिक विषय वासनाओं को त्याग कर ,आत्म स्वरूप ईश्वर को समझ सकता है. मनुष्य ध्यान और ईश्वर भक्ति में लीन होने पर मन से राग, द्वेष, ईर्ष्या ,छल, प्रपंच, को त्याग कर शांति को प्राप्त करता है, तब परमात्मा की अनुभूति होती है. जब मन से सारे दोष गिर जाते हैं, वहां कुछ नहीं रहता है बिल्कुल शून्य अवस्था होने पर, चेतन अपने स्वरूप में लीन हो जाता है, ईश्वर की प्राप्ति करता है उसे समाधि कहते हैं. आश्रम के अध्यक्ष प्रो नवल किशोर साहेब ने कहा मनुष्य अपने सद्गुण से महान होता है शरीर से महान नहीं होता है. साहित्यकार जय नारायण पंडित ने कहा मोक्ष का अर्थ होता है मोह, माया से छूट जाना. मोह माया ही जन्म-मरण का कारण होता है. मन ही बंधन एवं मोक्ष का कारण है. संत श्री शुभ स्वरूप साहब ने कहा मृग के नाभि में कस्तूरी रहता है और उसकी सुगंधी उसे मालूम नहीं होती. उसे बाहर ढूंढता है वैसे मनुष्य अपने ईश्वर को अंदर में नहीं खोज कर, बाहर में खोजता है. आश्रम के पूर्व अध्यक्ष बिरेंद्र प्रसाद यादव ने कहा शुद्ध ,बुद्धि, यस ,मोक्ष ,धन ,भलाई जब जिसने जिस यत्न से कहीं प्राप्त किया है. ये सभी सत्संग के प्रभाव से ही प्राप्त हुआ है. आश्रम के उपाध्यक्ष सुखदेव साहब ने कहा भक्ति से ही ज्ञान, वैराग्य एवं सुख की प्राप्ति होती है. ब्रह्मचारी आनंद साहेब, पंकज साहेब, उमेश साहेब, मिश्रीलाल साहेब ने समापन सत्र में भजन गाकर माहौल को भक्तिमय कर दिया. आश्रम में जमीन दाता स्वरूपलीन देवनारायण यादव को श्रद्धालु भक्तगण ने श्रद्धांजलि दी. मौके पर उपस्थित मिश्रीलाल साहेब, शालिग्राम साहेब, उमाशंकर साहेब, महंत मनोज साहेब ,रुद्र नारायण भगत, सियाराम यादव शंकरपुर, सेवानिवृत्ति अंचल पदाधिकारी श्याम किशोर यादव, जगदीश प्रसाद यादव, मुन्ना कुमार ,प्रोफेसर कपिल देव यादव, सुमित कुमार शिक्षक, प्रोफेसर अशोक कुमार, संत पटेल साहेब, रंजू देवी, गायत्री देवी, सिंहेश्वरी साहेब, चंदेश्वरी यादव शिक्षक, बालकृष्ण साहेब अधिवक्ता, मधुरा सरकार, रुद्र नारायण यादव, जीवन स्वरूप साहब, अंजन देवी, महेश्वरी भगत, महंत गजेंद्र साहेब, राजेश कुमार ,श्रीवर्धन खंडेलकर, डॉ उमेश कुमार चिकित्सक , हंसराज बाबू, डॉ संजय कुमार नेत्र रोग विशेषज्ञ, घूरन साहेब, डॉ समोल साहेब, हरि विश्वास, संत बिंदेश्वरी साहब, संत वैराग्य साहेब, संत विवेक साहब, सेनि शिक्षक शिवनारायण साह, दुर्गानंद विश्वास, संत गंगादास, तेज नारायण पंडित हजारों की संख्या में श्रद्धालु भक्तगण ध्यान साधना शिविर में भाग लेकर अपना कल्याण किया.

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