गुटखा प्रतिबंध के बावजूद बाजार में उपलब्ध होने की शिकायत, लोगों ने मांगी सख्त जांच और कार्रवाई

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काल्पनिक फोटो | Prabhat Khabar Network

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मधेपुरा जिले में तंबाकू और निकोटीन युक्त गुटखा-पान मसाला पर लगे प्रतिबंध के बावजूद कथित बिक्री की शिकायतें थम नहीं रही हैं. स्थानीय लोग दुकानों पर इन उत्पादों की सहज उपलब्धता पर चिंता जता रहे हैं, जो स्वास्थ्य सुरक्षा और सरकारी आदेशों के अनुपालन पर सवाल खड़े करती है.

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Madhepura News: सरकार ने तंबाकू और निकोटीन युक्त गुटखा और पान मसाला के निर्माण, भंडारण, वितरण, परिवहन और बिक्री पर प्रतिबंध लगाया है, लेकिन मधेपुरा जिले में इन उत्पादों की कथित बिक्री को लेकर शिकायतें थमने का नाम नहीं ले रही हैं.

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शहर से लेकर विभिन्न प्रखंड क्षेत्रों तक कई दुकानों पर प्रतिबंधित गुटखा और तंबाकू उत्पाद आसानी से मिलने की बात स्थानीय लोग कह रहे हैं. यदि ये शिकायतें सही हैं, तो यह न केवल सरकारी आदेशों के पालन पर सवाल उठाती हैं, बल्कि स्वास्थ्य सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को लेकर भी गंभीर चिंता पैदा करती हैं.

प्रतिबंध का उद्देश्य और जमीनी चुनौती

सरकार ने तंबाकू और निकोटीन युक्त उत्पादों पर प्रतिबंध सार्वजनिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए लगाया है. चिकित्सा विशेषज्ञ लंबे समय से चेतावनी देते रहे हैं कि ऐसे उत्पादों के सेवन से मुंह के कैंसर, गले के कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है.

आदेश के अनुसार गुटखा और निकोटीन युक्त पान मसाला के निर्माण से लेकर भंडारण, वितरण, परिवहन और बिक्री तक पर रोक लागू की गई है. इसके बावजूद मधेपुरा में कथित रूप से इन उत्पादों की उपलब्धता को लेकर लगातार चर्चाएं हो रही हैं.

स्थानीय लोगों ने क्या कहा

स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर के साथ-साथ कई प्रखंड क्षेत्रों की दुकानों पर प्रतिबंधित गुटखा और अन्य तंबाकू उत्पाद बेचे जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं. उनका दावा है कि पहले भी इस मुद्दे को लेकर शिकायतें उठी थीं और मीडिया में खबरें भी प्रकाशित हुई थीं.

लोगों का कहना है कि शुरुआती स्तर पर कार्रवाई की उम्मीद बनी थी, लेकिन वर्तमान में भी कई स्थानों पर ऐसे उत्पाद आसानी से उपलब्ध होने की बात कही जा रही है. इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि संबंधित विभाग की जांच के बाद ही संभव होगी.

युवाओं पर पड़ सकता है सबसे ज्यादा असर

स्थानीय नागरिकों के अनुसार यदि प्रतिबंधित तंबाकू उत्पाद खुलेआम बिक रहे हैं, तो इसका सबसे अधिक प्रभाव युवाओं और किशोरों पर पड़ सकता है. दुकानों पर इनकी आसान उपलब्धता प्रतिबंध के उद्देश्य को कमजोर कर सकती है.

सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि नशे से जुड़ी आदतों की शुरुआत अक्सर इसी तरह के आसानी से उपलब्ध उत्पादों से होती है. इसलिए रोक तभी प्रभावी मानी जाएगी जब जमीनी स्तर पर नियमित जांच और कार्रवाई हो.

निगरानी व्यवस्था पर सवाल

लोगों ने जिला प्रशासन और खाद्य संरक्षा विभाग से सवाल किया है कि यदि प्रतिबंध लागू है, तो अब तक कितनी दुकानों की जांच की गई और कितने मामलों में कार्रवाई हुई.

उनका कहना है कि केवल आदेश जारी करना पर्याप्त नहीं है. प्रतिबंध को प्रभावी बनाने के लिए नियमित निरीक्षण, बाजार स्तर पर निगरानी और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है.

Madhepura News: विशेष अभियान चलाने की मांग

स्थानीय लोगों ने मांग की है कि शहर के साथ-साथ प्रखंड और ग्रामीण क्षेत्रों में भी विशेष अभियान चलाकर दुकानों की जांच की जाए. उनका कहना है कि यदि लगातार निगरानी और कानूनी कार्रवाई की जाए, तो अवैध बिक्री पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है.

अब लोगों की नजर जिला प्रशासन और संबंधित विभागों की अगली कार्रवाई पर टिकी है. यदि शिकायतों की पुष्टि होती है, तो यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार के प्रतिबंध को मधेपुरा जिले में प्रभावी ढंग से लागू कराने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं.

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