चौसा में कुपोषण के खिलाफ बड़ी पहल, सुपोषित मातृ अभियान का पहला चरण पूरा

Published by : Pratyush Prashant Updated At : 09 Jun 2026 9:38 AM

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सुपोषित मातृ अभियान' का पहला चरण पूरा

Madhepura News: मधेपुरा के आकांक्षी प्रखंड चौसा में कुपोषण के खिलाफ एक अनोखी पहल शुरू हुई है. पहली बार 26 आंगनबाड़ी केंद्रों से जुड़ी 1040 गर्भवती और धात्री महिलाओं के बीच पोषण किट वितरित किए गए हैं. अभियान का लक्ष्य सिर्फ राशन बांटना नहीं, बल्कि माताओं और बच्चों को कुपोषण से मुक्त कर स्वस्थ भविष्य की नींव रखना है.

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चौसा (मधेपुरा) से रिपोर्ट.

Madhepura News: आकांक्षी प्रखंड चौसा को कुपोषण मुक्त बनाने की दिशा में चलाए जा रहे “सुपोषित मातृ अभियान” के प्रथम चरण का सफलतापूर्वक समापन हो गया है. अभियान के तहत प्रखंड की सभी पंचायतों के 26 आंगनबाड़ी केंद्रों से जुड़ी कुल 1040 महिलाओं के बीच पोषण किट का वितरण किया गया.

बाल विकास परियोजना के सहयोग से चलाए गए इस अभियान में प्रत्येक चयनित आंगनबाड़ी केंद्र की 40-40 महिलाओं को पोषण सामग्री उपलब्ध कराई गई. इस पहल को सामाजिक कार्यकर्ता बिनोद आशीष के प्रयासों से शुरू किया गया है.

कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व से मिला अभियान को बल

जानकारी के अनुसार जिलाधिकारी के अनुरोध और सामाजिक कार्यकर्ता बिनोद आशीष के प्रयासों के बाद भारत सरकार के पेट्रोलियम मंत्रालय के अधीन सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी ओएनजीसी ने अपने कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (CSR) कार्यक्रम के तहत इस अभियान को स्वीकृति दी.

इसी पहल के तहत चौसा में पहली बार गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए व्यापक स्तर पर पोषण जागरूकता और पोषण किट वितरण कार्यक्रम चलाया गया.

कई विकास मानकों पर पिछड़ा है चौसा

बिनोद आशीष ने बताया कि नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार चौसा प्रखंड स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और पोषण जैसे कई महत्वपूर्ण मानकों पर देश के पिछड़े प्रखंडों में शामिल है. ऐसे में इन क्षेत्रों में विशेष कार्ययोजना बनाकर लगातार काम करने की जरूरत है.

उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि क्षेत्र के लिए भी अलग-अलग योजनाएं तैयार की जा रही हैं, जिन पर जल्द कार्य शुरू किया जाएगा.

माताओं और बच्चों के स्वास्थ्य पर फोकस

अभियान का मुख्य उद्देश्य गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और कुपोषण से प्रभावित बच्चों के बीच संतुलित आहार और पोषण के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाना है. इसके माध्यम से महिलाओं को नियमित और पौष्टिक भोजन अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है.

वितरित पोषण किट में चावल, दाल, आटा, घी, दलिया, ओट्स, आयरन सिरप, डिटॉल साबुन और सैनिटरी पैड जैसी आवश्यक सामग्री शामिल थी.

जिले के लिए मिसाल बना अभियान

बाल विकास परियोजना पदाधिकारी दुर्गेश कुमार ने बताया कि अभियान का उद्देश्य गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और बच्चों को बेहतर पोषण उपलब्ध कराकर कुपोषण से बचाना है.

अभियान के मुख्य संयोजक डॉ अजय कुमार खुशबू ने कहा कि “सुपोषित मातृ अभियान” जिले में अपनी तरह का पहला कार्यक्रम है, जिसका लक्ष्य चौसा प्रखंड को कुपोषण से मुक्त बनाना है. उन्होंने कहा कि समाज और प्रशासन के संयुक्त प्रयास से ही इस लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है.

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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