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खाद की किल्लत एवं कालाबाजारी समेत विभिन्न मांगों को लेकर किसान सभा ने किया बीपी मंडल चौक पर प्रदर्शन

छोटे विक्रेताओं एवं किसानों पर बड़ा हमला है.

मधेपुरा.

खाद की किल्लत एवं कालाबाजारी, बीज व विद्युत बिल 2025 एवं फार्मर रजिस्ट्रेशन के खिलाफ सोमवार को समाहरणालय के समक्ष बीपी मंडल चौक पर बिहार राज्य किसान सभा के बैनर तले किसानों ने रोषपूर्ण प्रदर्शन किया. मौके पर प्रदर्शनकारी किसानों ने केंद्र व राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी किया. प्रदर्शन का नेतृत्व किसान सभा के जिला अध्यक्ष रमण कुमार एवं जिला सचिन मुकुंद प्रसाद यादव ने किया. इस अवसर पर अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय सचिव प्रमोद प्रभाकर ने कहा कि बिजली बिल 2025 के अनुसार बिजली आपूर्ति का निजीकरण किया जाएगा, क्रॉस सब्सिडी समाप्त की जायेगी, सबसे एक बराबर रेट लिया जायेगा, ताकि निजी बिजली कंपनियों का मुनाफा एवं बड़े और उद्योगों के निजी निवेशकों को मुनाफे का लालच देकर आकर्षित किया जा सके. उन्होंने कहा कि इस नये नियम से बिजली और महंगा होगा और इसे आसानी से लागू करने के लिए स्मार्ट मीटर लगाया जा रहा है. पहले रिचार्ज फिर बिजली.

किसान नेता प्रभाकर ने कहा कि नया बीज बिल 2025 के अनुसार बाजार में अब से कोई भी बीज या पौधा बिना सरकारी पंजीकरण के नहीं बेचा जा सकेगा. बेचने पर लंबी कैद व भारी जुर्माना लगेगा, यह छोटे विक्रेताओं एवं किसानों पर बड़ा हमला है. उन्होंने कहा कि कानून में लिखा है कि विदेशों से बीज के आयात को छूट दी जाएगी और उसके बीज की गुणवत्ता का कोई परीक्षण भारत में नहीं किया जायेगा. इसकी कीमत पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं रहेगा. श्री प्रभाकर ने कहा कि बीज बाजार पर कंपनियों का नियंत्रण बढ़ने से किसानों की उपभोग की खेती और देश की खाद्य सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी. श्री प्रभाकर ने कहा कि फार्मर रजिस्ट्रेशन के नाम पर बड़े पैमाने पर प्रधानमंत्री सम्मान निधि योजना से किसानों को वंचित किया जा रहा है. किसानों से अपने नाम की जमीन के कागजात एवं जमाबंदी रसीद मांगे जा रहे हैं, जो बहुत हीं कम किसानों को उपलब्ध है, उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री सम्मान निधि योजना से किसानों का नाम छाँटना किसानों के साथ अन्याय है. श्री प्रभाकर ने केंद्र व राज्य सरकार को किसान विरोधी करार देते हुये केंद्र की मोदी सरकार एवं राज्य की नीतीश सरकार की किसान विरोधी नीति के खिलाफ संघर्ष तेज करने का आह्वान किसानों से की. किसान नेता विद्याधर मुखिया ने खाद की किल्लत एवं कालाबाजारी पर रोष प्रकट करते हुये कहा कि सुशासन की सरकार में 270 की यूड़िया 500 रुपये बोड़ी और 1350 की डीएपी 1800 रुपये बोड़ी बिक्री हो रही है. किसान नेता उमाकांत सिंह, अनिल भारती एवं रमेश कुमार शर्मा ने मनरेगा का नाम बदलकर वीबी जी राम जी अधिनियम करने एवं सभी श्रम कानून को निरस्त कर चार लेबर कोड बनाने पर घोड़ आपत्ति व्यक्त करते हुए कहा कि यह मजदूरों के व्यापक हित के खिलाफ है. किसान शंभू क्रांति, कुंदन यादव एवं दिलीप पटेल ने न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान की खरीद सुनिश्चित करने की मांग की. विरोध प्रदर्शन में किसान नेता अंबिका मंडल, अरुण कुमार तांती, जयप्रकाश महतो, मो चांद, रौशन यादव, सुरेंद्र साह, सिकंदर मंडल, शंभू पासवान, राजेंद्र राम, वसीम उद्दीन, बूटीश स्वर्णकार, ब्रह्मदेव मंडल आदि शामिल थे. किसान सभा के जिलाध्यक्ष रमन कुमार एवं जिला सचिव मुकुंद प्रसाद यादव ने कहा कि केंद्र एवं राज्य की सरकार किसानों की नहीं कॉरपोरेटों की है. नेताओं ने कहा कि किसान हित के खिलाफ नीति बनाने वाली सरकार होश में आवे नहीं तो इसके गंभीर परिणाम होंगे.

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